सूखी राख की फिलिंग की अनुमति लेकर कंपनी ने भर दिया गीला मलबा

रिलायंस सासन पॉवर के फ्लाइऐश डाइक टूटने का मामला....

By: Ajeet shukla

Published: 18 Apr 2020, 03:31 AM IST

सिंगरौली. फ्लाइ ऐश डैम (डाइक) फूटने से सिंगरौली में मची भीषण तबाही के पीछे रिलायंस सासन पॉवर की लापरवाही मुख्य वजह है। यह बात पहले ही कलेक्टर की नोटिस में जाहिर हो चुकी है। फ्लाइ ऐश को लेकर कंपनी की लापरवाही यही खत्म नहीं होती। प्लांट परिसर में स्थित डाइक में भी मनमानी सामने आई है।

परिसर में स्थित दोनो डाइक में सूखी राख डंप करने की अनुमति पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड से ली गई थी। इसमें राख को फिलिंग के अंदाज में हैवी मशीनों से दबाने की शर्त रखी गई थी। लेकिन इस अनुमति की आड़ में कंपनी ने गीला मलबा पाट दिया। इससे अब इन दोनों डाइक के टूटने का खतरा मंडराने लगा है।

पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सासन पॉवर को जारी किए गए नोटिस में इस बात का उल्लेख किया गया है। नोटिस में इसके साथ यह भी जिक्र है कि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन कर कंपनी के अधिकारियों ने हर्रहवा के फ्लाइ ऐश डाइक में राख और पानी छोड़ा है।

क्षमता से अधिक मलबा होने से दबाव इतना बढ़ा कि यह डैम टूट गया। यह गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद भी एक हफ्ता पूरा होने पर भी अभी तक कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। इधर दूसरी ओर जुर्माना लगाने पर भी कोताही बरती गई है।

जुर्माने पर भी सवाल
पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सासन पॉवर पर लगाए गए जुर्माने पर भी सवाल उठने लगे हैं। बहुत बड़े हिस्से में राखड़ फैलने और भारी तबाही के बाद भी महज 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। हालाकि यह अंतरिम आदेश है फिर भी यह नुकसान का दसवां हिस्सा भी नहीं है। अगर इससे पहले एस्सार पॉवर प्लांट में हुए इसी तरह के हादसे से तुलना करें तो इस बार क्षति गई गुना अधिक हुई है। एस्सार पर भी 10 करोड़ रुपए का ही जुर्माना लगाया गया था।

ऐसे समझिए नुकसान का अंतर
- एस्सार पॉवर की घटना में 53 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ था, जबकि सासन पॉवर की घटना में 130 एकड़ से अधिक क्षेत्र प्रभावित बताया गया है।
- एस्सार की घटना में डाइक से 1336 क्यूबिक टन बॉटम ऐश निकला था, जबकि इस घटना में 1700 क्यूबिक टन से अधिक बॉटम ऐश निकलने की बात सामने आई है।
- एस्सार की घटना में कुछ गांवों के कुआं व तालाब जैसे जल स्रोत प्रदूषित हुए थे, जबकि इस घटना में छोटे जल स्रोत के अलावा रिहंद डैम का पानी प्रदूषित हुआ है।
- एस्सार की घटना में केवल धन हानि हुई थी, जबकि इस घटना में धनहानि के साथ जनहानि भी हुई है। छह लोग लापता बताए गए थे, जिसमें से पांच का शव मिल चुका है।
- एस्सार की घटना में प्रभावित किसानों की संख्या महज 68 रही है, जबकि इस घटना में 610 किसान प्रभावित हुए है। आकलन में 52 हेक्टेयर रकबे की फसल बर्बाद हुई है।

यह है दलील
अंतरिम जुर्माना की राशि के संबंध में जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जिला प्रभारी एसडी बाल्मिकी से बात की गई तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए केवल इतना कहा कि यह अभी अंतरिम जुर्माना है। पर्यावरणीय क्षति का आकलन अभी जारी है। आगे और जुर्माना लगाया जाएगा। लेकिन उन्होंने शर्तों के उल्लंघन और अनुमति के समय तय की गई एक करोड़ की राशि के बारे में कुछ नहीं कहा।

Ajeet shukla Reporting
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