scriptShortage of doctors in MP's Singrauli district hospital | विश्व डॉक्टर्स डे : मर्ज बढ़े, मरीज बढ़े, नहीं बढ़े चिकित्सक, स्वीकृत 1110 पदों में रिक्त 643 | Patrika News

विश्व डॉक्टर्स डे : मर्ज बढ़े, मरीज बढ़े, नहीं बढ़े चिकित्सक, स्वीकृत 1110 पदों में रिक्त 643

- चिकित्सकों की कमी का दंश झेल रहा जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर, बेमानी साबित हो रही लाखों की बिल्डिंग सहित व्यवस्थाएं......

सिंगरौली

Updated: July 01, 2022 08:46:00 pm

सिंगरौली. मर्ज बढ़ रहे हैं, रोगियों की संख्या बढ़ रही है लेकिन चिकित्सक और विशेषज्ञों की पूर्ति नहीं हुई है। जिलेभर में स्वीकृत 1110 पदों में 467 पदस्थ हैं। बाकी 643 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में लाखों की बिल्डिंग व सुविधाएं बेमानी साबित हो रही हैं। चिकित्सक व विशेषज्ञों की कमीं का दंश झेल रहा जिले का स्वास्थ्य विभाग मरीजों के लिए आफत है। जिस अनुपात में मरीज बढ़ रहे हैं उस अनुपात में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। जिसके कारण मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। आबादी के हिसाब से विशेषज्ञों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र की जनता के सामने स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कहने को तो जिलेभर में चिकित्साधि कारी और विशेषज्ञों के 129 पद स्वीकृत हैं। जहां सिर्फ 35 ही पदस्थ हैं। विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से इलाज में संविदा डॉक्टर की मदद ली जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे कुछ स्वास्थ्य केन्द्रोंं में जांच की सुविधाएं हैं लेकिन पैथालॉजिस्ट नहीं होने के कारण मजबूरी में निजी सेंटरों पर मरीज जांच कराते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मरीजों को इलाज के लिए दिक्कतें बढ़ गई हैं। यहां सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एक भी चिकित्सक नियमित रूप से पोस्टेड नहीं हैं। जिससे मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक व झोलाछाप के पास इलाज के लिए जाना पड़ता है।

विशेषज्ञों की कमी
जिले में विशेषज्ञों की कमी है। सर्जरी विशेषज्ञ के साथ ही स्त्री रोग, नाक, कान, गला व त्वचा रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके साथ ही अन्य कई विशेषज्ञ नहीं होने के चलते मरीजों को यहां से रीवा, जबलपुर अथवा वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीज बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं क्योंकि उनकी भी मंशा है कि यहां ट्रामा सेंटर जैसे बिल्डिंग कंपनियों के अस्पताल की भी नहीं है। लकिन इसके बावजूद जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत:
जिलेभर में स्वीकृत पद - 1110
विभिन्न पदों पर कार्यरत - 467
रिक्त पदों की संख्या - 643
जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर - 01
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र - 07
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र - 15
जिलेभर की आबादी - 14 लाख (लगभग में)
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इनसेट:-
जिला अस्पताल में नहीं है सुरक्षा के इंतजाम
- केवल निर्देश तक सीमित रह गई पुलिस चौकी
सिंगरौली. जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। रात में ड्यूटी कर रहे चिकित्सक व स्टाफ नर्सों को डर बना रहता है। कई बार मरीजों के परिजनों से विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। चिकित्सकोंं की मांग पर अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस चौकी संचालित करने की मांग की थी लेकिन यह व्यवस्था अभी केवल निर्देश तक सीमित रह गई है। बता दें कि जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में कई बार रात के समय में अराजक तत्व पहुंच जाते हैं। जिससे स्टाफ नर्स व चिकित्सक भयभीत रहते हैं। उन्हें इस बात को लेकर भय बना रहता है कि ये कहीं अप्रिय घटना घटित न कर दें। हालांकि सिक्योरिटी ड्यूटी पर तैनात रहती है मगर उसका खौफ अराजक तत्वों में नहीं रहता है। जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में पुलिस चौकी बनाए जाने की मांग की पूर्ति नहीं हो पाई है। यह प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई है इसके पीछे कारण चाहे जो भी हो। लेकिन पुलिस अधिकारी स्थान नहीं मिलने का हवाला दे रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि चौकी को संचालित कराने के लिए कोशिश की जा रही है।
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यादों के झरोखे से:
Shortage of doctors in MP's Singrauli district hospital
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होम आइसोलेशन में रहते हुए भी कोविड मरीजों के इलाज की निभाई थी जिम्मेदारी
- कोविड मरीजों का इलाज करते हुए दो बार संक्रमित हुए थे डॉ. संतोष कुमार

सिंगरौली. परिवार के लोगों की बिना परवाह किए कोरोना के आपदा में लगातार ड्यूटी कर मरीजों की सेवा किया है। एक भी दिन जिम्मेदारी से विरत नहीं रहे। कोविड मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए तो होम आइसोलेशन में रहते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों का हाल लिया और उनके इलाज का परामर्श दिया। इतना नहीं कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव होते ही फिर से कोविड वार्ड पहुंच गए। बात जिला अस्पताल में पदस्थ मेडिसिन के डॉ. संतोष कुमार की कर रहे हैं। कोविड मरीजों के इलाज के दौरान का अनुभव साझा करते हुए डॉ. संतोष ने कहा कि पहली लहर में सभी ज्यादा भयभीत रहे, लेकिन दूसरी लहर में डर कुछ कम रहा। इसलिए पूरी तन्मयता के साथ कोविड मरीजों की सेवा की गई। स्वस्थ मरीजों की संख्या बढ़ाने को लेकर अजीब सा जुनून सवार था। उनके साथियों व वरिष्ठजनों ने भी पूरी शिद्दत के साथ मरीजों का इलाज किया। जब किसी मरीज की मौत होती थी तो उसके लिए पूरी टीम खुद को फेल अनुभव करती थी। व्यक्तिगत अनुभव के बारे में बताया कि घर परिवार की चिंता तो थी मगर दूसरी ओर कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों की स्थिति देखने पर खुद को नहीं रोक पा रहे थे। मन में आता था कि ऐसे कैसे छोड़ दें इनका परिवार भी तो है। इस दौरान कई समस्याएं भी आईं। कई बार ऐसा भी हुआ कि घर जाने की मोहलत नहीं मिली, लेकिन सारी थकावट तब दूर हो जाती थी, जब मरीज स्वस्थ होकर घर के लिए निकलता था। डॉ. संतोष ने कहा कि दूसरी लहर की आपदा में सभी चिकित्सकों ने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी पूर्वक निभाई। सभी एक दूसरे से प्रेरणा लेते और एक दूसरे को तसल्ली देते। डॉ. संतोष कुमार जब संक्रमण से मुक्त होने के बाद वार्ड में पहुंचे तो उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कोविड मरीजों का हौसला बढ़ाया। कहा कि देखो मैं स्वस्थ होकर आ गया, आप सब भी हिम्मत रखो। जल्द ही स्वस्थ होकर घर पहुंचोगे। इलाज के दौरान उन सब को विशेषज्ञों की कमी जरूर खली, लेकिन उन सबने जैसे-तैसे स्थानीय व बाहर के वरिष्ठ चिकित्सकों से संपर्क कर उनका मार्गदर्शन लेते हुए खुद के अनुभव के आधार पर कोविड मरीजों का इलाज किया और काफी हद तक सफल रहे।
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रात भर कोरोना वार्ड में ड्यूटी, सुबह शादी करने के बाद फिर पहुंचे थे अस्पताल
- डॉ. गंगा वैश्य ने पेश की थी मिशाल, उस दौरान पूरे पीक पर था कोरोना

सिंगरौली. कोरोना की आपदा में मरीजों के इलाज व सेवा को लेकर चिकित्सकों में अजीब जज्बा देखने को मिला था। जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में पदस्थ चिकित्सक डॉ. गंगा वैश्य इसका उदाहरण हैं। कोरोना वार्ड में ड्यूटी के प्रति इनकी प्रतिबद्धता को हर कोई सलाम किया। जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में पदस्थ डॉ. गंगा वैश्य का विवाह गोरबी निवासी डॉ. दीपिता के साथ बीते वर्ष 2021 में 29 अप्रेल को हुआ। जीवन का यह महत्वपूर्ण मौका होने के बावजूद डॉ. गंगा ने मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी। यह वाकया उस समय का है। जब कोरोना पूरे पीक पर था। उन्होंने रात तक कोरोना वार्ड में ड्यूटी की। साढ़े तीन बजे घर पहुंचे। इसके बाद डॉ. दीपिता के साथ परिणय सूत्र में बंधे और वहां फुर्सत होने के बाद शाम 7 बजे फिर से कोरोना वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने पहुंच गए। डॉक्टर के इस दायित्व बोध की चर्चा जिला अस्पताल से लेकर जिला प्रशासन तक के अधिकारियों में थी। वह दौर था जब वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर हाय तौबा मची थी। अस्पताल में ड्यूटी करने से स्टाफ डरता था मगर डॉ. गंगा वैश्य ने शादी समारोह को भी बहुत तवज्जो नहीं दिया। उनका दायित्व था कि मरीजों को देखना पहली प्राथमिकता है।
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