खरीद के बचे चंद दिन : 5 एमटी तक ही पहुंचा धान खरीद का आंकड़ा

नहीं बढ़ेगी तिथि....

सिंगरौली. जिले में शासन के लिए समर्थन मूल्य पर धान की खरीद में संबंधित एजेंसियां पिछड़ी हालत में हैं। अब तक जिले के 28 केंद्रों पर धान खरीद का आंकड़ा पांच लाख मीट्रिक टन के करीब ही पहुंच पाया है जबकि इसका लक्ष्य छह लाख मीट्रिक टन है। इस प्रकार एजेंसियां अब तक खरीद के लक्ष्य से एक लाख मीट्रिक टन दूर हैं। जबकि खरीद के अब मात्र पांच दिन ही बचे हैं। इससे लगता है कि इस सीजन में जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीद की मात्रा तय लक्ष्य तक पहुंचना संदिग्ध हो चला है। हालांकि खरीद व्यवस्था से जुड़े अधिकारी अब भी काफी धान की और खरीद होने के प्रति आश्वस्त हैं।

जिले में मंगलवार शाम तक 28 केंद्रों पर चार लाख 89 हजार 404 क्विंटल धान की समर्थन मूल्य पर खरीद की गई है। यह मात्रा लगभग पांच लाख मीट्रिक टन के आसपास है मगर लक्ष्य से लगभग एक मीट्रिक टन से कम है। जिले मंें इस सीजन में छह लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया था। बताया गया कि अब तक इतनी मात्रा में जिले के केन्द्रों पर 8579 किसान अपनी उपज बिक्री के लिए लेकर आए। इसके विपरीत नवंबर माह में शासन को धान बिक्री के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या लगभग साढ़े १२ हजार थी। इससे पता चलता है कि लगभग चार हजार की संख्या में पंजीयन कराने वाले किसान अब तक शासन को अपनी उपज बिक्री के लिए लेकर नहीं आए। इस कारण ही खरीद की मात्रा भी लक्ष्य के मुकाबले घट रही है।

अब खरीद के मात्र पांच दिन ही बचे हैं। इसलिए इस छोटी से अवधि में लक्ष्य के अनुसार जिले में लगभग एक लाख मीट्रिक टन की और खरीद करने के लिए आपूर्ति व सहकारिता विभाग के संबंधित अधिकारियों को भागदौड़ करनी पड़ रही है। बताया गया कि शासन की ओर से पूर्व कार्यक्रम के अनुसार 20 जनवरी तक ही समर्थन मूल्य पर धान की खरीद करना तय किया गया है। इस संबंध में जिलों के खरीद व्यवस्था से जुड़े व प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इसके अनुसार 20 जनवरी के बाद धान की खरीद नहीं होगी। इसलिए आपूर्ति व सहकारिता विभाग अमले को खरीद केंद्र प्रभारियों के साथ तालमेल से पंजीयन कराने वाले शेष किसानों तक पहुंचने का कहा गया है। इसके तहत ही हर केंद्र संचालक व व्यवस्थापक को अपने अधीनस्थ क्षेत्र के पंजीयन कराने वाले संबंधित किसान को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारी सूत्रों के अनुसार यह अनुमान नहीं है कि पंजीयन कराने के बावजूद अब तक खरीद केन्द्र नहीं आने वाले किसानों ने अपनी उपज कहां बेची है। खरीद बंद होने के बाद इस संबंध में स्थिति साफ हो सकेगी।

Amit Pandey
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