साहब! हर महीने किराया देते हैं, ऐसे ही नहीं रखा है सामान......

अधिकारियों को अतिक्रमणकारियों से मिला जवाब....

सिंगरौली. साहब! हर महीने किराया देते हैं। बिना अनुमति के न ही गोदाम बनाया है और न ही सामान रखा है।ऐसे कैसे हटा लें। मोरवा सब्जी मंडी में अतिक्रमण कर सैकड़ों क्विंटल आलू सहित अन्य सब्जी रखने वाले व्यापारियों का कुछ ऐसा ही तर्करहा। नगर निगम का अमला बुधवार को वहां अतिक्रमण हटाने पहुंचा था। सब्जी मंडी में अतिक्रमण कर गोदाम बनाने और वहां भारी मात्रा में सब्जी रखने को लेकर जब निगम अधिकारियों ने जब व्यापारियों से पूछताछ शुरू की और उनकी ओर से बनाए गए अवैध गोदाम को अवैध बताते हुए हटाने की बात की तो व्यापारी बिफर पड़े।

व्यापारियों ने दो टूक में अधिकारियों से कहा कि वह निगम के ही स्थानीय अधिकारियों को हर महीने यहां सामान रखने का किराया देते हैं। किराया चुकता करने के बाद उन्हें यहां सब्जी रखने की अनुमति मिली है। अब ऐसे तत्काल सारा सामान कहां ले जाएं। व्यापारियों की इस दलील पर कुछ पल के लिए तो वहां मौजूद निगम अधिकारियों में हैरत में पड़ गए, लेकिन व्यापारी जब किराया चुकता करने का रसीद नहीं दिखा पाए तो अधिकारी उन पर हावी हो गए। अधिकारियों ने कहा कि बिना रसीद वह किसी को किराया देते हैं तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार है। निगम की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है।

एक सप्ताह बाद जब्त हो जाएगा सामान
निगम के कार्यपालन यंत्री व्हीबी उपाध्याय ने व्यापारियों से कहा कि उनकी ओर से बिना रसीद के किसी को किराया देना और मंडी में अवैध रूप से गोदाम बनाना दोनों ही कार्य अनधिकृत है। हिदायत देते हुए कार्यपालन यंत्री ने कहा कि सामान हटाने के लिए उन्हें एक सप्ताह का मौका दिया जा रहा है। एक सप्ताह के भीतर सामान शिफ्टि करने के साथ ही टीन शेड या अन्य माध्यम से बनाया गया गोदाम स्वत: हटा लिया जाए। ऐसा नहीं किया जाता है कि एक सप्ताह बाद सारा सामान जब्त करने के साथ ही गोदाम ध्वस्त कर दिया जाएगा।

बैढऩ सब्जी मंडी का भी यही हाल
मोरवा जैसा ही हाल यहां बैढऩ सब्जी मंडी का भी है। निगम के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते यहां भी व्यापारियों ने मंडी में अवैध तरीके से न केवल गोदाम बना लिया है। बल्कि वहां भारी मात्रा में सब्जी भी भंडारित कर रखा गया है। निगम अधिकारियों ने यहां भी व्यापारियों को सामान और गोदाम हटाने की हिदायत दी है। व्यापारी ऐसा नहीं करते हैं तो निगम अधिकारी बल प्रयोग का अवैध कब्जा हटवाएंगे। माना जा रहा है कि यह कब्जा निगम के लिए कर्मचारियों की मिलीभगत का नतीजा है।

Ajeet shukla
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