राख के फैले हजारों टन मलबे से पर्यावरण को खतरा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा, सासन पॉवर तत्काल हटाए

रिलायंस सासन पावर के फ्लाइऐश डैम से हुई तबाही का मामला .....

By: Ajeet shukla

Published: 23 Apr 2020, 10:09 PM IST

सिंगरौली. रिलायंस सासन पॉवर के फ्लाइ ऐश डैम फूटने से गोबहइया नाले से लेकर रिहंद नदी तक फैले हजारों टन राख के मलबे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बताया है। बोर्ड ने सासन पॉवर प्रबंधन को तत्काल इसे हटाने और नदी-नाले को प्राकृतिक स्वरूप में लाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड कंपनी पर पहले ही 10 करोड़ रुपए का अंतरिम जुर्माना लगा चुका है।

गौरतलब है कि 10 अप्रेल को सासन पॉवर के फ्लाइ ऐश डैम फूटने के कारण नदी-नालों के साथ किसानों की 130 एकड़ जमीन भी राख से डूब गई है। हर्रहवा से लेकर रिहंद नदी तक करीब 8 किलोमीटर के इलाके में 5 से 10 फीट राख का मलबा भर चुका है। इसी मलबे से 6 लोगों के शव तो निकाले जा चुके हैं पर दर्जनों मवेशियों और हजारों मुर्गियों के शव अब भी इसके नीचे दफन हैं जो बड़ा संकट पैदा कर सकते हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सासन पॉवर प्रबंधन को पत्र लिखकर तत्काल राख का मलबा हटाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड का कहना है कि गर्मी का मौसम होने से यह राख हवा के साथ दूसरे इलाकों में फैलेगी और पर्यावरण का बड़ा नुकसान करेगी। वहीं राख नहीं हटी तो बरसात में यह पूरा मलबा रिहंद नदी से होकर डैम तक पहुंच जाएगा। इससे पहले भी बड़े पैमाने पर राखड़ रिहंद डैम में समा चुका है।

हर रोज कमियां उजागर, कार्रवाई से बच रहे
जिला प्रशासन से लेकर तमाम सरकारी एजेंसियां घटना के दिन से लगातार फ्लाइ ऐश डैम के निर्माण से लेकर डंप तक की कमियां उजागर कर रही हैं। नोटिसों में भी सासन पॉवर की लापरवाही को उजागर किया गया है। इसके बाद भी कार्रवाई पर चुप्पी बरकरार है। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जुर्माना लगाने के बाद यह निर्देश कंपनी को फ्लाइऐश डैम टूटने की घटना का जिम्मेदार मानते हुए जारी किया है। यह बात और है कि जिला प्रशासन को एफआइआर कराने जैसी कानूनी कार्रवाई के लिए अभी भी शासन से मार्गदर्शन और स्थानीय विशेषज्ञों से तकनीकी रिपोर्ट मिलने का इंतजार है।

गर्मी में धूल के गुबार तो वर्षा में गोहबइया नाला बनेगा मुसीबत
कंपनी की ओर से क्षेत्र में फैले मलवा की सफाई नहीं की गई तो वहां ग्रामीणों के लिए इस गर्मी में धूल का उडऩे वाला गुबार मुसीबत बनेगा। इतना ही नहीं गर्मी के बाद वर्षा ऋतु में गोहबइया नाला मुसीबत की सबब बनेगा। दरअसल गांवों के बरसात का पानी निकलने के लिए गोहबइया नाला एक मात्र माध्यम है, लेकिन डैम की तबाही में नाले का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। पूरा नाला मलबे से भर कर लगभग समतल हो गया है। इससे बरसात के पानी को निकलने के लिए स्थान नहीं बचा है। ऐसे में सिद्धिखुद व लटबुढ़वा सहित अन्य गांवों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। इसको लेकर ग्रामीण परेशान भी हैं और उनकी ओर से कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा गया है।

दावा, जल्द मिलेगी रिपोर्ट, दर्ज होगी एफआइआर
इधर, जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि अधिकतम तीन से चार दिनों में स्थानीय स्तर पर गठित कमेटी की तकनीकी रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद एफआइआर दर्ज कराने जैसी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक मजिस्ट्रियल जांच को भी तेजी के साथ पूरा करने को कहा गया है। उम्मीद है कि वह जांच रिपोर्ट भी निर्धारित 45 दिन की अवधि से पहले ही प्राप्त हो जाएगी। गौरतलब है कि डैम फूटने से हुई तबाही की घटना को 13 दिन बीत चुके हैं।

मृतकों को श्रद्धांजलि देने अधिवक्ता ने कराया मुंडन
ऐश डैम फूटने की घटना में हुई छह मौतों पर शोक व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के ऑन द रिकॉर्ड अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने उन सभी को श्रद्धांजलि देते हुए मुंडन कराया गया है। अधिवक्ता ने घटना में कंपनी प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। लेकिन अब तक एफआइआर ही नहीं की गई। इस तरह की औद्योगिक लापरवाही के मामले में यह पहली बार है जब 13 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है।

वर्जन -
मलबे में ऊपर की ओर जो भी मवेशी थे, वह निकाल लिए गए हैं। जो मलबे में नीचे दब गए हैं, जब कंपनी की ओर से मलबा हटाया जाएगा तब वह भी बाहर आ जाएंगे। मवेशियों के मरने से बदबू व संक्रमण की स्थिति नहीं बने। इसका ख्याल रखा जा रहा है। कई टीम से निरीक्षण भी कराया है।
ऋषि पवार, एसडीएम सिंगरौली.

Ajeet shukla Reporting
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