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हवाई यात्रा के लिए नहीं जाना पड़ेगा वाराणसी, यहां मिलने जा रही है सुविधा

हवाई यात्रियों को म्योरपुर में मिलेगी सुविधा, सिंगरौलिया हवाई अड्डा की कवायद पट्टी तक ही सीमित

सिंगरौली

Published: April 20, 2022 05:15:47 pm

सिंगरौली. सब कुछ ठीक रहा तो वर्ष 2023 में हवाई यात्रा के लिए वाराणसी तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तरप्रदेश के पड़ोसी जिले सोनभद् से ही हवाई यात्रा की सुविधा सोनभद्र के म्योरपुर में तैयार हो रहे हवाई अड्डा का कार्य तेजी के साथ जारी है। हालांकि निर्माण क्षेत्र में कुछ विवादित भूमि है और मामला न्यायालय तक पहुंच गया है, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही विवादित प्रकरणों का निराकरण हो जाएगा।

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हवाई यात्रा के लिए अभी सिंगरौली व सोनभद्र यानी ऊर्जाधानी के लोग वाराणसी पर निर्भर है। हवाई यात्रा के लिए यहां के लोगों को करीब ढाई किलोमीटर की 6 घंटे से अधिक की यात्रा करनी पड़ती है। जितना समय हवाई यात्रा में है लगता है। उसका करीब तीन गुना समय वाराणसी पहुंचने में लगता है। यही वजह है कि म्योर पुर के साथ यहां सिंगरौली में हवाई अड्डा बनाने की मांग की गई है।

अभी केवल वाराणसी एक विकल्प
इधर जिले के सिंगरौलिया में हवाई यात्रा के लिए अभी हवाई अड्डा का सपना अधूरा रह गया है। हवाई पड्टी का निर्माण कार्य भी कछुआ चाल से चल रहा है। जिले में एनसीएल व एनटीपीसी लिए सहित कई बड़ी कंपनियां संचालित है ऐसे में यहां हवाई अड्डा की सख्त आवश्यकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से यह राग अलापा जा रहा है। यह बात और है कि हकीकत में हवाई अड्डा का सपना जल्द पूरा होता नहीं दिख रहा है और तो और हवाई अड्डा सिंगरौली में हवाई अड्डा बनाने की योजना हवाई पट्टी तक सीमित हो गई है, लेकिन निर्माण एजेंसी हवाई पट्टी का कार्य भी समय पर पूरा नहीं कर पा रही है।

गौरतलब है कि जिले में हवाई पट्टी के निर्माण के लिए 35.30 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से आधी से अधिक रकम कंपनियों की ओर से दी गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य समय पर पूरा होता नहीं दिख रहा है। गौरतलब है कि हवाई पट्टी का निर्माण कार्य इसी महीने पूरा करना होगा।

250 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च
जिले में हवाई अड्डा बनाए जाने में सबसे बड़ी बाधा बजट और चिहिनत स्थान सिंगरौलिया में बिजली के बड़े टावर हैं। हवाई अड्डा बनाने की स्वीकृति विमानन विभाग से तभी मिलेगी, जब पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन के टावर शिफ्ट किए जाएंगे। टावरों को शिफ्ट करने और भूमि अधिग्रहण सहित अन्य मामलों में 250 करोड़ से अधिक का खर्च आने की संभावना है। इतने बजट की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

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