जावाल से मनादर क्षतिग्रस्त सड़क दे रही दर्द

जावाल से मनादर क्षतिग्रस्त सड़क दे रही दर्द

mahesh parbat | Publish: Sep, 10 2018 09:33:27 AM (IST) Sirohi, Rajasthan, India

- प्रशासन की अनदेखी

सिरोही. प्रशासन की अनदेखी से गांवों की सड़कें वाहनों की तो छोड़ो पैदल चलने लायक तक नहीं बची हैं। इन सड़कों से सरकारी अफसरों सहित जनप्रतिनिधि भी गुजरते हैं। लग्जरी गाडिय़ों में बैठने वाले इन लोगों को शायद बेहाल सड़कों पर हिचकोले नहीं लगते तभी गांवों की ये सड़कें पिछले कई महीनों से मरम्मत को तरस रही हैं।
जावाल से मनादर तक करीब तीस किलोमीटर का व्यस्तम मार्ग खस्ताहाल है। जगह-जगह गड््ढे हो गए हैं। यहां बारिश के पानी से सड़कों का डामर तो पहले ही उखड़ चुका था लेकिन सरकारी विभागों की अनदेखी से कंक्रीट भी उखड़ रही है। लोगों को हादसे का अंदेशा बना रहता है। जिले के कैलाशनगर तथा मनादर बड़े गांव होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की उदासीनता एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग की अनदेखी का खमियाजा यहां से गुजरने वाले राहगीरों व वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। इसी मार्ग से जालोर एवं तखतगढ़ के लिए भी कई यात्री जाते हैं।
यहां हैं बदतर हालात
जावाल के मेघवाल बस्ती, अखापुरा, मांडाणी, सेऊड़ा, कैलाशनगर, झाड़ोली वीर, मनादर एवं जुबलीगंज क्षेत्र की सड़कें उखड़ी हुई हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों से वाहन चालक भी परेशान हैं। वाहनों की मरम्मत का खर्चा बढ़ रहा है। वहीं टायर भी समय से पहले घिस रहे हैैं। सबसेज्यादा समस्या कैलाशनगर में है। बारिश के दिनों में पानी एकत्र होने से हादसों की आशंका है। बसों व एम्बुलेंस को निकलने में भी दिक्कत होती है। कैलाशनगर थाने के पास तो छोटी कार निकालना भारी पड़ता है।
झाडिय़ों से बाधा
पूरे मार्ग पर दोनों तरफ फैली झाडिय़ां वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। झाडिय़ों के कारण रास्ता काफी संकरा हो गया है। मांडाणी से ओड़ा होते हुए गोल जाने वाले मार्ग पर भी बबूल की समस्या ज्यादा है।

बिना कार्य बिल दर्शाने की शिकायत
आबूरोड. रेलवे कॉलोनी से गुजरते मुख्य नाले की सफाई में बिना पोकलेन का उपयोग किए भुगतान के लिए बिल दर्शाने की शिकायत स्वायत्त शासन निदेशक से की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्यामकुमार शर्मा ने ज्ञापन भेजकर बताया कि वार्ड- २३, २४, २५, २६ से रेलवे कॉलोनी होते हुए मुख्य नाले की सफाई के लिए पोकलेन के उपयोग का करीब १.२२ लाख रुपए का बिल दर्शाया गया है। बिल में ३० जून से ४ जुलाई तक नाला साफ करना बताया, जबकि नाले की सफाई १७ से १९ जुलाई तक जेसीबी से करवाई। बिल के साथ कचरा निस्तारण के लिए न कोई ट्रैक्टर लगा और न ही डम्पर। १२ जुलाई को सफाई निरीक्षक ने नाला सफाई को संतोषजनक मानते हुए प्रमाण पत्र दिया व भुगतान की सिफारिश की लेकिन प्रमाण पत्र में यह नहीं दर्शाया की नाला कितना फीट गहराई तक साफ किया गया।
पालिका ने सफाई के लिए जेसीबी किराए पर ले रखी है। ज्ञापन में मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।

 

 

 

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