तीरंदाजी में नहीं तो चित्रकला में ही सही

तीरंदाजी में नहीं तो चित्रकला में ही सही

Rajendra Singh Denok | Publish: Jan, 17 2017 11:02:00 AM (IST) Abu Road, Rajasthan, India

हाल ही में उदयपुर में हुई द्वितीय राज्य स्तरीय जनजाति छात्रावास खेलकूद प्रतियोगिता में कोच की सुविधा वाले सांतपुर खेल छात्रावास (बालक) के बच्चे तीरंदाजी में तो खास करतब नहीं दिखा पाए, पर इसी प्रतियोगिता के तहत हुई चित्रकला की प्रतियोगिता में उन्होंने आबूरोड ब्लॉक का नाम जरूर रोशन किया।

हाल ही में उदयपुर में हुई द्वितीय राज्य स्तरीय जनजाति छात्रावास खेलकूद प्रतियोगिता में कोच की सुविधा वाले सांतपुर खेल छात्रावास (बालक) के बच्चे तीरंदाजी में तो खास करतब नहीं दिखा पाए, पर इसी प्रतियोगिता के तहत हुई चित्रकला की प्रतियोगिता में उन्होंने आबूरोड ब्लॉक का नाम जरूर रोशन किया। इससे उलट, सांतपुर में ही स्थित खेल छात्रावास (बालिका) में कोच की सुविधा नहीं होने के बावजूद अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए दो बालिकाओं ने तीरंदाजी में और एक बालिका ने दौड़ में आबूरोड का नाम रोशन किया।
इन खिलाडिय़ों ने किया नाम रोशन
इस राज्य स्तरीय जनजाति छात्रावास खेलकूद प्रतियोगिता में सांतपुर खेल छात्रावास (बालिका) की राधाकुमारी  तीरंदाजी में दूसरे व दीतू कुमारी तीसरे स्थान पर रही। इंदिरा कुमारी ने दौड़ (200 मीटर) में तीसरा स्थान प्राप्त किया।  दिलचस्प बात यह है कि बालिकाओं को तीरंदाजी का प्रशिक्षण देने के लिए कोच ही नहीं लगा हुआ है। फिर भी राधाकुमारी व दीतूकुमारी ने यह कमाल कर दिखाया। उधर, इस छात्रावास से महज एक फर्लांग की दूरी पर स्थित खेल छात्रावास (बालक) में तीरंदाजी के कोच की व्यवस्था होने के बावजूद बच्चे कमाल नहीं दिखा पाए। यह दीगर बात है कि टीम में शामिल इस छात्रावास के छात्र अशोककुमार गरासिया, अनिलकुमार गरासिया व जीताराम चित्रकला प्रतियोगिता में क्रमश: पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे।
उपकरण देरी से मिलने का नतीजा
खेल छात्रावास (बालक) के वार्डन भरतकुमार पुरोहित से पूछने पर बताया कि बच्चों ने मेहनत तो खूब की। कोच ने भी पूरा प्रशिक्षण दिया, लेकिन तीरंदाजी (रिकर्व) के उपकरण पिछले साल अक्टूबर में ही मिलने से बच्चे अच्छी तरह से तैयारी नहीं कर पाए। ये ही उपकरण यदि शैक्षिक सत्र के आरम्भ में मिल जाते तो बच्चे जरूर करिश्मा दिखाते। फिर भी छात्रों ने चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल छात्रावास के बच्चे जरूर करिश्मा दिखाएंगे।  
92 में से चार ने रोशन किया नाम
इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में आदिवासी बहुल आबूरोड ब्लॉक के आश्रम छात्रावासों के 92 खिलाडिय़ों ने भाग लिया था। इनमें पैतीस तीरंदाज थे। खिलाडिय़ों की चार टीमों में 26 बालिकाएं भी शामिल थीं। बालकों की तीन टीमों में कबड्डी के 19 व वॉलीबाल के 16 खिलाड़ी, 4 धावक, 2 एथलेट्स, तीरंदाजी (इंडियन) के 13 व तीरंदाजी (रिकर्व) के 14 तीरंदाज शामिल थे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के तहत तीरंदाजी, कबड्डी, वॉलीबाल व एथलेटिक्स (100 मीटर एवं 200 मीटर) की प्रतियोगिताएं हुई। ज्ञातव्य है कि राजस्थान पत्रिका ने गत 21 दिसम्बर को 'बगैर प्रशिक्षण के कैसे दिखाएंगे कुव्वतÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पहले ही खुलासा कर दिया था कि इस प्रतियोगिता में बगैर प्रशिक्षण के भाग लेने वाले खिलाडिय़ों से ज्यादा उम्मीद रखना बेमानी होगा।

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