प्रशिक्षक ही नहीं, कैसे निखरे खेल प्रतिभा

यहां की प्रतिभाओं को खेलने के प्रति जुनून भी हैं और जज्बा भी, बस कमी हैं तो द्रोणाचार्य की। सरकारी स्कूलें,

By: मुकेश शर्मा

Published: 23 Feb 2016, 11:35 PM IST

सिरोही।यहां की प्रतिभाओं को खेलने के प्रति जुनून भी हैं और जज्बा भी, बस कमी हैं तो द्रोणाचार्य की। सरकारी स्कूलें, स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थी खेल खेलने के भी इच्छा जाहिर करते है, लेकिन शारीरिक शिक्षक नहीं होने के कारण खेल के प्रति रुचि नहीं दिखाते है। साथ ही खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने से वंचित रह जाते है। शिक्षा विभाग में बात चाहे प्रारम्भिक शिक्षा की हो या फिर माध्यमिक शिक्षा की दोनों विभाग के अधीन संचालित स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हुए है। ऐसे में ग्रामीण प्रतिभाएं गांवों तक ही सीमित रह जाती है।

प्रारम्भिक में 12, माध्यमिक में 20

बचपन से ही प्रतिभाओं को तराशने की प्रवृत्ति डालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन, बचपन से ही खिलाडिय़ों को तराशने का प्रमुख माध्यम ही न हो तो उम्मीदें करना बेमानी होगा। क्योंकि प्रारम्भिक शिक्षा में शारीरिक शिक्षकों के 12 पद रिक्त हैं। जबकि माध्यमिक शिक्षा में 20 पद लम्बे समय से रिक्त चल रहे है। इसमें द्वितीय श्रेणी के 13 एवं तृतीय श्रेणी के 7 पद रिक्त है। ऐसे में दूर-दराज स्थित ग्रामीण स्कूलों में रिक्त पद होने से वहां की प्रतिभा निखर नहीं पाती है। साथ ही रिक्त पद होने से स्कूलों में कार्यरत अन्य शिक्षक भी खेल के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखाते है।


कई खेल मैदान भी नहीं विकसित


जिले के कई स्कूलों में यह भी विडम्बना हैं कि खेल है पर मैदान ही नहीं है। ऐसे में ग्रामीण प्रतिभाएं निखर कर सामने नहीं आती है। शिक्षा विभाग की ओर से हर साल जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता शुरू होती है, लेकिन बिना संसाधनों से स्कूलें में पढऩे वाले विद्यार्थी रुचि नहीं दिखाते है। जबकि सरकारी स्कूलों को प्रत्येक एक खेल में भाग लेना अनिवार्य होता है। खेल मैदान तैयार करने के लिए लाखों का बजट स्कूल प्रशासन को चाहिए, लेकिन बजट के अभाव में स्कूल भी मैदान तैयार करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाते है। हालांकि मनरेगा के तहत भी खेल मैदान को विकसित करने का प्लान था, लेकिन वो भी सिरे नहीं चढ़ पाया है।

प्रयास करेंगे...

द्वितीय श्रेणी के शारीरिक शिक्षकों की माध्यमिक शिक्षा में कम है। नए शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति होने से रिक्त पद भरने के प्रयास किए जाएंगे।-शीशराम, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) सिरोही
मुकेश शर्मा Reporting
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