scriptNot allowed to leave Dhamani Colony with pucca houses and basic amenit | पक्के आशियाने व बुनियादी सुविधाओं के साथ धमाणी कॉलोनी छोडऩा नहीं मंजूर | Patrika News

पक्के आशियाने व बुनियादी सुविधाओं के साथ धमाणी कॉलोनी छोडऩा नहीं मंजूर

  • खसरा नंबर-39 की 4 बीघा जमीन पर बसी है धमाणी कॉलोनी, 'पत्रिकाÓ की खबर के बाद कलक्टर ने मांगी रिपोर्ट

सिरोही

Published: April 09, 2022 07:38:05 am

माउंट आबू. कई साल पूर्व नगर पालिका की ओर से नीम्बू नाले से धमाणी कॉलोनी में बसाए गए परिवारों को अब पक्के आशियाने व बुनियादी सुविधाएं छोड़कर किसी दूसरी जगह बसना मंजूर नहीं हैं। पालिका प्रशासन ने उन्हें करीब-करीब तमाम बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाई हुई है। ऐसी स्थिति में कॉलोनी में बसे लोग अपने पक्के आशियाने व बुनियादी सुविधाओं का त्याग कर अन्यत्र जाकर बसने के मूड में नहीं है। इन्हीं हालात में वे अब प्रशासन व सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनकी सालों पुरानी समस्या का स्थाई समाधान किया जाए। मसलन अब उन्हें स्थाई रूप से धमाणी कॉलोनी में ही बसा रहने देने की इजाजत दे दी जाए। दरअसल नीम्बू नाले से इन परिवारों को विस्थापित कर धमाणी कॉलोनी में बसाने के बाद कॉलोनी की जमीन वन विभाग को आवंटित कर दी गई थी। अब वन विभाग का कहना है कि कॉलोनी अतिक्रमण कर वन विभाग की जमीन पर बसी हुई है। उधर, कॉलोनी के वाशिन्दे अब चाहते हैं कि वन विभाग को किया आवंटन निरस्त कर दिया जाए और कॉलोनी की जमीन की एवज में वन विभाग को अन्य जगह पर जमीन मुहैया करवा दी जाए। ताकि, इस समस्या का सदैव के लिए निराकरण हो जाए। कॉलोनी वासियों का कहना है कि यदि उनके यहां पक्के मकान व तमाम सुविधाएं नहीं होती तो उन्हें अन्य जगह जाकर बसने में कोई आपत्ति नहीं होती। पर, उन्होंने लाखों रुपए खर्च कर यहां मकान बनाए हैं। चिडिय़ा भी अपना घोसला नहीं छोड़ सकती है तो वे अपने आशियाने कैसे छोड़ दे। उनके साथ बार बार हो रहे अन्याय को अब वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। हालांकि, उन्हें धमाणी कॉलोनी से विस्थापित कर अन्यत्र पुनर्वास करने का अंतिम निर्णय पालिका बोर्ड की बैठक में किया जाएगा। 'पत्रिकाÓ की ओर से इस मामले को लगातार उठाने के बाद अब पालिका ने भी इसे अपने एजेन्डा में शामिल कर लिया है।
पक्के आशियाने व बुनियादी सुविधाओं के साथ धमाणी कॉलोनी छोडऩा नहीं मंजूर
मांउट आबू. धमाणी कॉलोनी व कॉलोनी में बने पक्के मकान।
धमाणी के पास वन विभाग को दी जा सकती है जमीन

जमीन के हक को लेकर वन विभाग व धमाणी कॉलोनी के वाशिन्दों के बीच चल रहे विवाद का निराकरण नगर पालिका वन विभाग को अन्यत्र जमीन देकर कर सकती है। गोवा गांव से लेकर जावाई और सालगांव तक खसरा नम्बर-39 की 51 बीघा जमीन पर वन विभाग का अधिकार है। प्रशासन ने इसमें से 4 बीघा भूमि पर धमाणी के वाशिन्दों को बसाया गया था। वन विभाग की जमीन से सटकर ही नगर पालिका की जमीन आई हुई है। अगर वहां 4 बीघा जमीन नगर पालिका की ओर से वन विभाग को दी जाती है तो धमाणी कॉलोनी के वाशिन्दों की समस्या का स्थाई तोड़ निकल सकता है। हालांकि, इसे लेकर अंतिम निर्णय बोर्ड की बैठक में ही किया जाएगा।
इधर कलक्टर ने स्थानीय प्रशासन से तलब की रिपोर्ट

हिल स्टेशन माउंट आबू के वाशिन्दों की समस्याओं को 'पत्रिकाÓ की ओर से लगातार उठाए जाने के बाद जिला कलक्टर डॉ. भंवरलाल ने स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। हाल ही में 'पत्रिकाÓ ने माउंट आबू में शौचालय सहित कई समस्याओं से सम्बंधित मुद्दे प्रमुखता से उठाए थे। कई लोगों के घरों में आजादी के बाद से लेकर अब तक शौचालय का निर्माण ही नहीं हुआ। कई सरकारी योजनाएं भी माउंट आबू में लागू नहीं हो पा रही हैं। जिसको लेकर जिला कलक्टर ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
हम कई सालों से यहां रह रहे हैं। हमारे पास सभी सरकारी रेकर्ड भी है। अब हम यहां से कहीं और जाकर नहीं बस सकते। वन विभाग को अन्य जगह जमीन दी जाए।
उदाराम चौधरी, निवासी - धमाणी
हमें सरकार ने नीम्बू नाले से विस्थापित कर यहां पुनर्वास किया था। न तो हम जबरदस्ती आकर बसे हैं और ना ही अतिक्रमण किया है। हमारा यहां पुनर्वास करने के बाद प्रशासन ने वन विभाग को भूमि आवंटित कर हमारे साथ धोखा किया है। अब इस समस्या का समाधान भी प्रशासन ही करें।
महेन्द्र दान, निवासी - धमाणी
&हमारे साथ लम्बे अर्से से अन्याय हो रहा है। इसको लेकर हमने अधिकारियों व कई मंत्रियों को भी ज्ञापन सौंपे। आज दिन तक समाधान नहीं हुआ। अब हम अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ताराराम लोहार, निवासी - धमाणी
&हमारी 4 बीघा जमीन पर धमाणी वासियों ने अतिक्रमण कर रखा है। नगर पालिका हमें इसके बदले कहीं पर भी जमीन दे दें तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम भी चाहते हैं कि कॉलोनीवासी किसी भी सूरत में डिस्टर्ब नहीं हो।
विजयशंकर पांडे, डीएफओ, वन विभाग, माउंट आबू

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