भूला के लीलूड़ी-बड़ली में शहीद स्मारक बनाने को लेकर मुखर हुए लोग

भूला के लीलूड़ी-बड़ली की तलाई में 5 मई 1922 को लगान के विरोध में आन्दोलनरत आदिवासियों

By: Bharat kumar prajapat

Published: 12 Feb 2021, 08:20 PM IST

सिरोही. भूला के लीलूड़ी-बड़ली की तलाई में 5 मई 1922 को लगान के विरोध में आन्दोलनरत आदिवासियों के नरसंहार की घटना के बाद अगर 198 9 में प्रयासों को अमली जामा पहना दिया जाता तो शायद 32 बरस पहले ही शहीद स्मारक बन जाता लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब शहीद स्मारक के मुद्दे को राजस्थान पत्रिका ने उठाना शुरू किया तो स्थानीय लोगों भी मुखर होने लगे हैं।

गजेटियर में भी उल्लेख...
मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में भूला के लीलूड़ी-बड़ली स्थान पर जनजाति भील व गरासिया जाति के लोगों के नरसंहार की घटना का अंग्रेजों के समय की पुस्तक राजस्थान सिरोही गजेटियर में भी उल्लेख है। उसके अनुसार इस दौरान 18 00 लोग शहीद हुए एवं 6 00 घरों को जलाया गया था। शहीदों में महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे। सरकार को इस स्थान पर शहीद स्मारक बनाकर शहादत का सम्मान करना चाहिए।
- डॉ. पुनाराम पटेल, इतिहास विशषज्ञ एवं साहित्यकार, रोहिड़ा

तभी होगी सच्ची श्रद्धांजलि...
यह घटना मानवता पर भी कलंक है। इस स्थल पर जलियांवाला बाग से भी बड़ा शहीद स्मारक बना कर गुमनाम शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए।
- डॉ. उदयसिंह, इतिहासकार, सिरोही


गीत से किया था आह्वान...
अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध आदिवासी परम्परा के अनुसार ढोल बजा कर सभी एकत्र हुए थे। यहां शहीद स्मारक नहीं बनना बदकिस्मती ही कही जा सकती है। उस समय स्थानीय भाषा में 'धोमजो भाईयो, धोमजो गोरो खुद करे हैं... धोमजो भाईयो, धोमजो भूलू गोम बले रे... गीत से आह्वान किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों से शहीद स्मारक बनाने का वादा भी था। इस वादे को पूरा करने का अब उचित समय भी है।
- अवधेश देवल, अधिवक्ता एवं समाजसेवी, कासिन्द्रा

Bharat kumar prajapat Reporting
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