मिले सहारा तो बदल दें किस्मत

मिले सहारा तो बदल दें किस्मत
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Mukesh Kumar Sharma | Publish: Feb, 02 2016 11:36:00 PM (IST) Sirohi, Rajasthan, India

निशक्तों को सशक्तबनाने के लिए वादे खूब है। इनके लिए कई सारी योजनाएं भी बनी है। पर, असल में यह कितनी प्रभावी है

निशक्तों को सशक्तबनाने के लिए वादे खूब है। इनके लिए कई सारी योजनाएं भी बनी है। पर, असल में यह कितनी प्रभावी है और इसका कितना लाभ मिलता है। इसकी तस्वीर के दो पहलू आपके सामने है। तस्वीर का एक छोर विश्वास और दूसरा छोर अविश्वास है। दोनों के बीच के महीन सी डोर है। विश्वास किया तो इतिहास रच दिया और संशय किया तो कइयों के भविष्य पर काली स्याही अंकित हो गई। यहां बात सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के ओर से संचालित निशक्तों के कल्याण की एक महत्ती योजना मुख्यमंत्री विशेष स्वरोजगार योजना का है। बुधवार को नवनियुक्त निशक्त कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष धन्नालाल पुरोहित का जिले में दौरा है। ऐसे में यह तस्वीर भी इनके सामने होनी ही चाहिए।

दीपक शर्मा/ भरत प्रजापत
सिरोही। जिले में निशक्तों की मदद में सरकारी महकमों के साथ बैंकों की नकारात्मक भूमिका के चलते कई बेरोजगार गरीब निशक्तों की उम्मीदें बनने से पहले ही बिखर जाती है। बैंक रोजगार चाहने वालों की जरूरतों से ज्यादा उसकी हैसियत का मूल्याकंन करती है। इसके चलते विभागीय लक्ष्य दस फीसदी भी पूरे नहीं हो पाते है।

यह है तस्वीर

इस वित्तिय वर्ष में मुख्यमंत्री विशेष स्वरोजगार योजना के तहत विभाग को 88 निशक्तों को अनुदानित ऋण दिलाकर उसकी आर्थिक उन्नति के प्रयास करने थे। पर, जनवरी तक इस योजना में मात्र छह जने ही लाभान्वित हो पाए। हाल ही में पांच निशक्तों के ऋण स्वीकृत हुए है। ऐसे में योजना का दस फीसदी ही लक्ष्य पूरा हो
पाया है।

बैंक नहीं करती सहयोग

विभाग को 88 ऋण स्वीकृत कराने थे। इसके तहत सौ से ज्यादा आवेदन भी हुए। करीब 40 के प्रस्ताव तो विभाग से स्वयं अपने स्तर पर बैंकों को भेजे। पर, ऋण स्वीकृत मात्र 11 के ही हो पाए। इस योजना में तीस फीसदी अनुदान सरकार की ओर से देय है। करीब 40 फीसदी या इससे अधिक विशेष योग्यजन का प्रमाणपत्र होना
अनिवार्य है।

बैंक सहयोग दे...

 हमारी ओर से आवेदन बैंकों को भेजे जाते है। बैंक विशेष योग्यजनों को सहयोग दे तो काफी मदद मिल सकती है और यहीं सरकार की मंशा भी है। मीना शर्मा, उपनिदेशक, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग

अब आपको निकटवर्ती जावाल के विशेष योग्यजन विक्रम माली के पास ले चलते है।। समाज कल्याण विभाग की मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोजगार के तहत 25 मार्च 2013 को एक लाख रुपए का एसएसबीजे से ऋण लेकर लेकर अपना कारोबार शुरू किया। व्यवसाय था कम्प्यूटर हार्डवेयर का। किराए की दुकान से ऋण के जरिए मौका मिला तो विक्रम ने मेहनत में कोई कसर नहीं छोडी। तीन साल का सफर हो चुका है। उपलब्धि के नाम पर विक्रम ने पहले साल पांच लाख का टर्नओवर किया और अब तीन साल के सफर में इसका टर्नओवर बढ़कर 20 लाख का आंकड़ा
छूने को है।

दो वाहन भी खरीद लिए

विक्रम ने दुकान जमने के बाद ही कारोबार को विस्तार देना शुरू कर दिया। पहला ऋण उतरा तो करीब एक साल करीब नौ लाख की टवेरा कार ऋण के जरिए खरीदी और इसका कुशल संचालन किया। हाल ही दो दिन पूर्व विक्रम ने इतनी ही लागत ही एक और गाडी इनोवा खरीदी। यहीं नहीं दुकान पर हार्डवेयर के साथ ई टिकट का कारोबार भी शुरू कर दिया। मेहनत और भरोसे से विक्रम हर रोज एक नई सफलता का इतिहास रच रहा है।

सहयोग मिलना चाहिए...


अक्सर हमारी शारीरिक स्थिति को देखकर सब संशय करते है। पर, मैँं दावे के साथ कह सकता हूं कि विशेष योग्यजन सचमुच विशेष है। हम पर भरोसा करे। बैंकों को सहयोग देना ही चाहिए।विक्रम माली, जावाल   

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