SIROHI- भाजपा कार्यालय को आवंटित भूमि के मामले में यथास्थिति के आदेश

- उच्च न्यायालय ने तीन सप्ताह में मांगा जवाब

By: Bharat kumar prajapat

Published: 25 Apr 2018, 10:10 AM IST

सिरोही. राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता ने सिरोही जिला कलक्टर, आयुक्त नगर परिषद, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग के सचिव एवं भाजपा को नोटिस जारी कर सिरोही में अम्बेडकर सर्किल के पास भाजपा कार्यालय के लिए खसरा नंबर 2709 में 0.28 हैक्टेयर आवंटित भूमि के मामले में यथास्थिति के आदेश दिए हैं। सभी को पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। याचिका के निस्तारण तक इस पर अब कोई निर्माण नहीं किया जा सकेगा। कांग्रेस पार्षद दल के नेता ईश्वरसिंह डाबी ने याचिका दायर की है। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
याचिका में 14 जुलाई 2017, 18 अक्टूबर 2017 व 2 नवम्बर 2017 के आदेश को निरस्त करने की प्रार्थना की गई है। याचिका में राजस्थान पुलिस की सीआईडी (अपराध शाखा) से दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर बेशकीमती भूमि को आपराधिक षड्यंत्र कर प्राप्त करने एवं राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में कार्यवाही का आग्रह किया गया है।
याचिका में कहा गया कि प्रकरण में राज्य सरकार ने जिला कलक्टर की राय को भी दरकिनार किया। उन्होंने लिखित में अवगत करवाया था कि भूमि की बाजार कीमत 50 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। इससे किसी तरह का कोई जनहित नहीं हो रहा है। भूमि का उपयोग 57 साल से सार्वजनिक निर्माण विभाग कर रहा था और इस भूमि की उन्हें आवश्यकता थी। आबादी क्षेत्र में आई वही राजस्व भूमि नगर परिषद को आवंटित की जा सकती है जो खाली हो तथा अधिवासित नहीं हो। जनहित में आवंटन निरस्त किया जाए।
मास्टर प्लान में भू उपयोग परिवर्तन के लिए 19 जून 2017 को आपत्ति मांगी गई जिसका अखबारों में 24 जून 2017 को प्रकाशन हुआ। अनेक जनप्रतिनिधियों व लोगों ने आपत्ति दर्ज करवाई लेकिन बगैर किसी सुनवाई के मास्टर प्लान में भू उपयोग परिवर्तन कर दिया गया। यह सब साफ जाहिर करता है कि यह पूर्व नियोजित था और आपत्तियां मांगना सिर्फ गैर कानूनी काम को एक आवरण देना भर था। इसमें आवंटन नीति 2015 को आधार बनाया गया है जो इस प्रकरण में लागू नहीं होती है।
याचिका में कहा गया कि भाजपा ने भूमि कौडिय़ों के भाव प्राप्त की है। इतना ही नहीं, राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ के निर्णय के विपरीत आवंटन किया गया है। इस पूरे प्रकरण में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए कार्यपालिका एवं सत्ता का दुरुपयोग किया है। इसके साथ ही राजस्थान नगर पालिका (डिस्पोजल ऑफ अर्बन लैण्ड) नियम 1974 का उल्लंघन किया गया है। आवंटित भूमि की कीमत पचास करोड़ से ज्यादा है लेकिन 1,05,91,500 रुपए में आवंटित किया है।
तमाम आपत्ति के बावजूद राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव ने 25 अप्रेल 2017 के पत्र जरिए भूमि नगर परिषद को आवंटित करने के निर्देश दिए। इसके बाद भाजपा के जिलाध्यक्ष ने 3 मई 2017 को नगर परिषद आयुक्त को भूमि आवंटन के लिए पुन: आवेदन किया। आयुक्त ने 13 मई 2017 को सचिव स्वायत्त शासन से आरक्षित दर पर भूमि आवंटन की स्वीकृति मांगी। स्वायत्त शासन विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने 23 मई को बोर्ड प्रस्ताव साइट प्लान आदि मांगे। आयुक्त ने अतिरिक्त निदेशक को पत्र भेजकर मास्टर प्लान के संबंध में जानकारी दी। नगर परिषद ने भू उपयोग के संबंध में आपत्ति मांगी, अनेक पार्षदों व लोगों ने इस पर लिखित आपत्ति दर्ज करवाई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर परिषद ने 25 अगस्त 2017 को आवंटन कार्यवाही पूर्ण कर ली। आश्चर्यजनक यह है कि स्टेट ग्राण्ट एक्ट 1958 के अन्तर्गत भूमि की 7 नवम्बर 2017 को रजिस्ट्री करवाई गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संदीप शाह ने पैरवी की।
पत्रिका ने उठाया था मामला
इस मामले में राजस्थान पत्रिका ने समय-समय पर समाचार प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया था।

Bharat kumar prajapat Reporting
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