स्वाइनफ्लू रोकथाम को लेकर चिकित्सा विभाग अलर्ट

सिरोही. मौसम परिवर्तन के साथ ही स्वाइन फ्लू की रोकथाम को लेकर चिकित्सा विभाग अलर्ट हो गया है। चिकित्सा संस्थानों पर मरीजों की डोर टू डोर स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही स्वाइन फ्लू के हाई रिस्क संदिग्ध मरीजों की जांच के सैम्पलिंग कर तुरंत उपचार किया जा रहा है।

By: Rajuram jani

Published: 10 Jan 2019, 04:47 PM IST

सिरोही. मौसम परिवर्तन के साथ ही स्वाइन फ्लू की रोकथाम को लेकर चिकित्सा विभाग अलर्ट हो गया है। चिकित्सा संस्थानों पर मरीजों की डोर टू डोर स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही स्वाइन फ्लू के हाई रिस्क संदिग्ध मरीजों की जांच के सैम्पलिंग कर तुरंत उपचार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त विभाग की जिला स्तरीय, सेक्टर स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय रेपिड रेस्पोंस टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। सीएमएचओ डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू को लेकर विभाग प्रारम्भ से ही सतर्कता बनाए हुए हैं। इसी का नतीजा है कि जिले में स्वाइन फ्लू को लेकर स्थिति पूर्णत: नियंत्रण में हैं।् चिकित्सा संस्थानों में स्टाफ को स्वाइन फ्लू की जांच, उपचार एवं रोकथाम के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने को निर्देशित किया हुआ है।
हाई-रिस्क ग्रुप वाले बरतें सावधानी
सीएमएचओ ने बताया कि स्वाइन फ्लू का इलाज पूरी तरह संभव है और समय पर परामर्श और उपचार लिया जाए तो साधारण फ्लू की तरह यह भी कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। स्वाइन फ्लू के लक्षण साधारण फ्लू के लक्षणों जैसे ही होते हैं। सर्दी, खांसी, जुकाम में दी जाने वाली दवाओं और पर्याप्त आराम से रोगी कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो जाता है। हाई-रिस्क ग्रुप वाले मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। 65 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं, ह्रदय, गुर्दा, लीवर रोगी, कैंसर का उपचार ले रहे रोगी और एचआईवी रोगी इस केटेगरी में आते हैं।
उपचार गाइड लाइन
सीएमएचओ ने बताया कि स्वाइन फ्लू की उपचार गाइड लाइन के अंतर्गत चार केटेगरी में मरीजों का लक्षणों के अनुरूप उपचार किया जाता है। केटेगरी ए में हल्का बुखार, गले में खराश के साथ उल्टी और बदन दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इसमें लक्षणानुसार मरीज को दवाइयां दी जाती है और पानी अधिक पीने के साथ घर पर आराम करने की सलाह दी जाती है। इस केटेगरी में मरीज को टेमीफ्लू नहीं दी जाती। साथ ही टेस्टिंग भी नहीं की जाती। इसी तरह श्रेणी बी में मरीज को श्रेणी ए के लक्षणों के साथ ही बहुत तेज बुखार और गले में ज्यादा खराश व दर्द रहता है। इस अवस्था में मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है और पौष्टिक आहार लेने, पानी अधिक पीने और आराम करने की सलाह दी जाती है। इस अवस्था में मरीज की टेस्टिंग नहीं की जाती है। श्रेणी बी-२ में वे मरीज आते हैं जो हाई-रिस्क ग्रुप में हैं। वहीं अंतिम श्रेणी में मरीज को श्रेणी बी के लक्षणों के साथ सांस में तकलीफ, सीने में दर्द, बेहोशी आना, ब्लड प्रेशर कम होना, कफ में खून आना, नाखूनों का नीला, बच्चों में चिड़चिड़ापन और पुरानी बीमारी का बिगडऩा जैसे लक्षण उभरते हैं।

Rajuram jani Reporting
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