शरीर में उतरता पॉलीथिन का जहर

शरीर में उतरता पॉलीथिन का जहर
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Mukesh Kumar Sharma | Updated: 04 Jun 2015, 11:45:00 PM (IST) Sirohi, Rajasthan, India

पर्यावरण के लिए बेहद घातक और पशुओं की जान का सबसे बड़ा दुश्मन पॉलीथिन। सरकार ने भी इसे

सिरोही।पर्यावरण के लिए बेहद घातक और पशुओं की जान का सबसे बड़ा दुश्मन पॉलीथिन। सरकार ने भी इसे माना और इस बीमारी से निजात पाने के लिए पॉलीथिन पर पांच बरस पूर्व प्रतिबंध लगा दिया। इसकी रोकथाम की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी।


पर, सिरोही का समूचा प्रशासन इस जिम्मेदारी को उठाने के बजाए तमाशबीन ही नजर आ रहा है। हां, यदा कदा कुछ अफसर अभियान के रूप में पॉलीथिन हटाने की नौटंकी करते हुए फोटो खिंचवाने तक की कार्रवाई को ही सर्वोपरि मान रहे है। शहर में हर कचरा पात्र पॉलीथिन की सड़न से अटा हुआ है। हैरानी यह कि बडे साहबों के दफतरों में सब के सब पॉलीथिन के कप में चाय गुड़गुड़ाते रहते है।


दो दिन पूर्व शहर में अंधड़ आया तो धूल मिट्टी से ज्यादा आसमान में पॉलीथिन का जहर उड़ रहा था। आज विश्व पर्यावरण दिवस है और हम आज से ही पर्यावरण के मददगार साबित होकर पॉलीथिन के उपयोग ना करने की शपथ ले।

2010 में जारी हुई थी अधिसूचना


केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 198 6 की धारा पांच की शक्तियों का उपयोग कर पॉलीथिन केरीबेग्स पर प्रतिबंध लगाने राज्य सरकार ने 14 मई 2010 को गजट अधिसूचना जारी की इसके तहत सम्र्पूण राजस्थान को पॉलीथिन मुक्त क्षेत्र घोषित कर पॉलीççान के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया।


इसके तहत इसके तहत कोई भी व्यक्ति, दुकानदार, विक्रता, पॉलीथिन का ना उपयाग करेगा ना ही भंडारण करेगा। इसके अलावा दुध, चाय,नर्सरी के उन्नत पौधों की पैंकेजिंग भी नहीं की जा सकती है।

हो रही है सिर्फ खानापूर्ति


शहर सहित जिले भर में पॉलीथिन की रोकथाम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। बैठकों में यह मुद्दा अहम होता है। इसके चलते अधिकारी कागजी कार्रवाई करते हुए पॉलीथिन को लेकर दुकानों में कुछ दिन धरपकड़ करते है।


पर, दो चार दिन बाद सब कुछ पूर्ववत हो ज्यादा है। खानापूर्ति का हाल यह कि अब अफसर कार्रवाई के लिए निकलते है तो व्यापारी आगे बढकर किलो भर पॉलीçथिन स्वत ही पकड़ा देता है।

आयुक्त को दिए निर्देश


स्वायत्त शासन विभाग के सचिव ने भी जून 2011 में आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों को निर्देश जारी कर बताया कि 40माइक्रोन मोटाई से कम की केरीबेग्स का निर्माण, स्टॉक, वितरण और विक्रयनहीं हो सकता है। इसके अलावा गुटखा, तम्बाकू और पान-मसालों की पैकिंग भी नहीं हो सकता है।

समाज भी करे पहल


आज गो हत्या और बूचड़खानों के विरोध में तो हर दूसरे दिन प्रदर्शन हो रहे है। पर, गोवंश के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक पॉलीथिन के बारे में धार्मिक संगठन और समाजसेवी भी खामोश है। प्रशासन केे साथ आमजन को भी पॉलीथिन मुक्त शहर का संकल्प अपने परिवार और मूक मवेशियों को बचाने के लिए लेना ही होगा।

दीपक शर्मा

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

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