जज्बे को सलाम...दोनों पांव नहीं लेकिन हौसले बुलंद इतने कि दिव्यांग भाई को पीठपर बिठाकर स्कूल ले जाते, अब दोनों सरकारी नौकरी में

जज्बे को सलाम...दोनों पांव नहीं लेकिन हौसले बुलंद इतने कि दिव्यांग भाई को पीठपर बिठाकर स्कूल ले जाते, अब दोनों सरकारी नौकरी में

Bharat Kumar Prajapat | Updated: 12 Aug 2019, 10:04:47 PM (IST) Sirohi, Sirohi, Rajasthan, India

दिल में कुछ करने का जज्बा हों तो सारी बाधाएं बौनी

सिरोही से भरत कुमार प्रजापत

सिरोही. दिल में कुछ करने का जज्बा हों तो सारी बाधाएं बौनी नजर आती हैं। कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है पिण्डवाड़ा तहसील के केर गांव के दो सगे भाइयों माधुराम देवासी और धीरज कुमार देवासी ने। माधुराम दोनों पांव से दिव्यांग है। इस कारण धीरज उसे पीठपर बिठाकर पढऩे स्कूल ले जाते। कॉलेज तक की पढ़ाई दोनों ने साथ की। इस दौरान बाधाएं खूब आईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी। नतीजा यह है कि आज दोनों किसी के मोहताज नहीं है। सरकारी नौकरी में हैं और शान से माता-पिता के साथ रहे हैं।

इनकी सफलता की कहानी दूसरों के लिए प्रेरणा दायक
केर गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद दोनों भाइयों ने घर से बाहर रहकर पढ़ाई की। पिता मूलाराम देवासी के पशुपालन का कार्य करने पर घर की स्थिति भी ठीक नहीं थी। दोनों भाइयों के कांधे पर जिम्मेदारी थी। आठवीं तक की पढ़ाई गांव के स्कूल में ही की। इसके बाद में 10वीं सरूपगंज से, 11वीं सिरोही से, 12वीं आवासीय विद्यालय हरीयाली जालोर और कॉलेज की शिक्षा सिरोही से हासिल की। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षा के लिए दोनों भाई जोधपुर चले गए। 2017 में दोनों भाइयों की कुछ अंतराल में ही सरकारी नौकरी लगी। वर्तमान समय में माधुराम देवासी सामुदायक स्वास्थ्य केन्द्र पिण्डवाड़ा में जूनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। वहीं धीरज देवासी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोजरा में एलडीसी हैं।
दिव्यांग माधुराम ने बताते हैं कि मेरी उम्र अभी 25 साल की है और छोटा भाई धीरज अभी 23 का हुआ है। उसने छोटा होने के बावजूद कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह पांवों से लाचार है। हमेशा धीरज अपनी पीठ पर बिठाकार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते रहे। स्कूल की पढ़ाई हो या अन्य कोई काम। हमेशा उन्होंने साथ दिया। माता-पिता के साथ मेरी भी इच्छा है छोटे भाई की पहले शादी हो जाए उसके बाद मैं मेरे बारे में विचार करूंगा। वैसे माता लीलू देवी गृहिणी हैं और हम माता-पिता के साथ दोनों भाई शान से रह रहे हैं। दोनों भाइयों का कहना है कि बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता, यदि मेहनत करोगे तो सफलता जरूर मिलेगी। इसी मकसद को लेकर दोनों भाई गांव के युवाओं को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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