टोल की कतार से मुक्ति कब?

mahesh parbat

Publish: Mar, 14 2018 09:12:46 AM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 09:13:37 AM (IST)

Sirohi, Rajasthan, India
टोल की कतार से मुक्ति कब?

टिप्पणी

त्रिलोक शर्मा

सिरोही. ना म बड़े और दर्शन छोटे...टोल प्लाजा पर यह कहावत सटीक बैठती है। टोल की लाइन में खड़े वाहन चालकों में गुस्सा है। कहीं बद-इंतजामी पर, कहीं भारी टोल टैक्स तो कहीं खराब सड़कों को लेकर लोग उद्वेलित हैं। ब्यावर-पिण्डवाड़ा फोरलेन पर उथमण टोल प्लाजा जून २०१५ में शुरू हुआ पर व्यवस्थाएं अब तक सुचारू नहीं हो पाईं। कार का एकतरफा शुल्क १०५ रुपए और दोनों तरफ का १५५ रुपए है। ट्रक व अन्य भारी वाहनों का शुल्क और अधिक है।
प्रारंभ से ही यह टोल प्लाजा विवादों में रहा है। सरकारी एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी मना करते रहे और ठेका कम्पनी एलएण्डटी ने अचानक वसूली शुरू कर दी। यह मामला कुछ शांत हुआ तो वाहनों के लम्बे जाम से लोग दुखी रहने लगे। सिरोही से पाली की तरफ जाने पर १५ मिनट से एक घंटे तक इंतजार करना आम बात है। आखिर साढ़े तीन साल में व्यवस्था सही क्यों नहीं हो पाईं? एम्बुलेंस व अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए अलग रास्ता क्यों नहीं बनाया गया? वाहनों से टैक्स वसूली के लिए बूथ की संख्या क्यों नहीं बढ़ पाई? आड़े-तिरछे खड़े वाहनों को सही करवाने के लिए गार्ड क्यों नहीं तैनात किए? ये ऐसे सवाल हैं जो जाम में फंसा शख्स टोल कम्पनी से पूछ रहा है। क्या किसी बीमार के साथ अनहोनी होने पर कुछ सुधार करेंगे?
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पालड़ी एम थाना पुलिस रविवार को टोल प्लाजा पर गई और वाहनों की लम्बी लाइन देखी। बीमार लोग भी जाम में फंसे पाए। जाम की वीडियोग्राफी भी की। थाना पुलिस ने लोगों के जीवन व स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव को लेकर रिपोर्ट दर्ज की। सीआरपीसी की धारा १३३ के तहत जांच की जा रही है।
टोल मैनेजर विजयसिंह तीन लेन बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ चुके हैं। जांच कर कार्रवाई होने और लेन बढऩे तक क्या जनता यूं ही गर्मी में त्रस्त होती रहेगी? जहां तत्काल कार्रवाई की जरूरत है वहां इस तरह के बयान जख्मों पर नमक छिड़कने के समान ही हैं।
जिले में यही एकमात्र टोल प्लाजा है जहां टनल के कारण भारी-भरकम शुल्क वसूली
की जा रही है फिर भी चालकों को घंटों कतार में खड़ा रहना
पड़ रहा है।
शहर से गुजरने वाले निजी वाहन, बसें, ट्रक आदि टनल का उपयोग नहीं करते, इसके बावजूद टोल के नाम पर जेब कटवा रहे हैं। उच्च स्तर तक यह पीड़ा पहुंचने के बावजूद ध्यान नहीं देना 'जनहितैषीÓ सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। क्या टोल की व्यवस्था आम लोगों के खिलाफ है? क्या टोल नीति में कहीं खामी है? जब सरकार सड़क, पुल, हाईवे जैसे बुनियादी ढांचे के लिए टैक्स वसूलती है तो कुछ सड़कों के लिए अलग से टोल क्यों लगता है?
राज्य राजमार्गों पर निजी वाहनों को टोल मुक्त कर वाहवाही लूटने वाली सरकार को नेशनल हाईवे पर इस तरह की पहल करनी चाहिए थी। अगर जनता को सही मायने में राहत ही देनी है तो सरकार के लिए यह करना मुश्किल नहीं है। राज्य राजमार्गों पर टोल दर १०-२० से ज्यादा नहीं है और वहां जाम के हालात भी कम ही होते हैं।
बहरहाल, कम से कम निजी वाहनों से तो टोल वसूली बंद होनी चाहिए। कार-जीप से सड़क को वैसे भी नुकसान नहीं होता। ऐसे वाहन चालक इस दंश से मुक्त होने चाहिए। ऐसा करने से टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार भी कम हो जाएगी।

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