scriptWrit has been imposed in NGT, but there is a provision to develop | एनजीटी में लगाई है रिट, पर मास्टर प्लान में अम्बेडकर व माली कॉलोनी को विकसित करने का है प्रावधान | Patrika News

एनजीटी में लगाई है रिट, पर मास्टर प्लान में अम्बेडकर व माली कॉलोनी को विकसित करने का है प्रावधान

- जुलाई में माउंट आबू प्रशासन रखेगा एनजीटी में अपना पक्ष

सिरोही

Updated: June 09, 2022 10:21:35 pm

माउंट आबू । हिल स्टेशन माउंट आबू में अतिक्रमण एवं कृषि भूमि पर की जा रही व्यावसायिक गतिविधियों के सिलसिले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर रिट लोकेद्रसिंह बनाम राज्य सरकार को लेकर अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि, इस मामले में एनजीटी ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जुलाई माह में उससे रिपोर्ट मांगी है। उधर, प्रशासन ने भी इस मामले में तैयारियां शुरू कर कृषि भूमि पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सम्बंधित को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। एनजीटी में दायर रिट में अम्बेडकर कॉलोनी, माली कॉलोनी व स्ट्रीट वैंडरों की ओर से किए गए अतिक्रमण का जिक्र किया गया है। जबकि, वर्ष-2015 में सरकार की ओर से बनाए गए मास्टर प्लान में अम्बेडकर कॉलोनी व माली कॉलोनी को विकसित करने का प्रावधान रखा हुआ है। ऐसी स्थिति में इस रिट को लेकर इन कॉलोनियों में निवासरत दर्जनों परिवार असमंजस की स्थिति में हैं। हालांकि, कई शहरवासियों ने बिना अध्ययन के एनजीटी में लगाई गई रिट पर बताया कि इसमें कई बिंदुओं में फेरबदल करने की जरूरत है।
एनजीटी में लगाई है रिट, पर मास्टर प्लान में अम्बेडकर व माली कॉलोनी को विकसित करने का है प्रावधान
एनजीटी में लगाई है रिट, पर मास्टर प्लान में अम्बेडकर व माली कॉलोनी को विकसित करने का है प्रावधान
महेन्द्र कुमार ने उड़ाई प्रशासनिक अधिकारियों की नींद

माउंट आबू का मामला एनजीटी में पहुंचने के बाद अब प्रशासन पूरी तरह से हरकत में आ गया है। उधर, सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र कुमार ने रसूखदारों के आधा दर्जन से भी ज्यादा और मामले अब प्रशासन के संज्ञान में लाकर प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब तक 23 संपत्तियों के नाम उजागर किए जा चुके हैं और कई और संपत्तियों के नाम उजागर होने की संभावना है। जिसके बाद अब एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र कुमार ने हाल ही में जिला कलक्टर व उप वन संरक्षक को मेल कर पूरे मामले का खुलासा किया था।
साथ ही कई संपत्तियों के नाम उजागर कर कृषि भूमि के व्यवसायिक उपयोग, बिना सक्षम स्वीकृति के होटल संचालन व वर्ष-2009 के बाद बड़े स्तर पर हुई अनियमितताओं की पूरी जानकारी दी गई थी। महेन्द्र कुमार ने बताया कि 2009 से पूर्व की कई पुरानी संपत्तियों के धारकों को कार्रवाई के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जबकि, वर्ष-2009 की अधिसूचना के बाद बड़े स्तर पर ऐसी संपत्तियों का संचालन हो रहा है जिसकी सुध तक नहीं ली जा रही। उन्होंने कार्रवाई के अभाव में वर्तमान में एनजीटी में चल रहे प्रकरण में पार्टी बनने की चेतावनी दी है।
कई जगह बताया अवैध निर्माण

एनजीटी में लोकेन्द्रसिंह की ओर से दायर रिट में अम्बेडकर कॉलोनी, माली कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, कई गेस्ट हाउस, अधर देवी के पास, नक्की झील के पास, चाचा सराय के पास अतिक्रमण की बिक्री होनी बताई गई है। इतना ही नहीं, स्ट्रीट वैंडरों के अलावा कृषि भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां चलने वाली कई संपत्तियों को भी उजागर किया गया है। लोकेन्द्र ङ्क्षसह ने नगरपालिका की ओर से अवैध रूप से पट्टे जारी किए जाने व अतिक्रमण को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले वैध रूप का भी जिक्र किया है।
इनका कहना है...
मैंने पूरा अध्ययन कर यह मामला एनजीटी में दायर किया है। कॉलोनियों को लेकर व मास्टर प्लान के मामले में घर पहुंच कर फाइल देखकर ही बता पाऊंगा। अभी मैं मेहमानों के साथ बाहर हूं। - लोकेद्रसिंह, एनजीटी में रिट दायरकर्ता
वह जगह जहां वैध बस्ती एवं गरीब बस्ती (बड़े पैमाने पर अतिक्रमण) बसी हुई है और उनसे कोई पर्यावरणीय नुकसान नहीं हो रहा है। ऐसी बस्तियों को आवासीय दर्शाया जाए, ताकि गरीब परिवारों को एक वैधानिक स्टेटस मिल सके। अम्बेडकर व माली कॉलोनी को मास्टर प्लान में भी विकसित करना दर्शाया है। - सौरभ गांगडिया, पूर्व सदस्य, मॉनिटङ्क्षरग कमिटी, माउंट आबू
एनजीटी में दायर मामले में पूरा अध्ययन नहीं किया गया है। मास्टर प्लान में कई कॉलोनियों को विकसित करने का प्रावधान है। गरीबों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। - जीतू राणा, पालिका अध्यक्ष, माउंट आबू
अम्बेडकर कॉलोनी पांच दशक पूर्व से बसी हुई है। बड़ी तादाद में लोग रहते हैं, इसीलिए मास्टर प्लान में इसे सरकार ने विकसित करने का प्रावधान रखा है। अब इन्हें बेदखल करना संभव नहीं है। पीढिय़ों से लोग यहां रह रहे हैं। - जसोदा अरोड़ा, पार्षद, माउंट आबू

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