सोमनाथ मंदिर विधेयक लाकर बनाया जा सकता है तो अयोध्या में राम मंदिर क्यों नहीं : शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती

सोमनाथ मंदिर विधेयक लाकर बनाया जा सकता है तो अयोध्या में राम मंदिर क्यों नहीं : शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती
Jagat Guru Shankaracharya Atmanand Saraswati

Shatrudhan Gupta | Updated: 25 Oct 2017, 11:28:32 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

अयोध्या में बनने वाले राम मंन्दिर को लेकर आज सीतापुर में पत्रिका से बातचीत में जगत गुरु शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती ने एक बड़ा बयान दिया।

सीतापुर. केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बन जाने के बाद एक बात को लेकर भाजपा की सरकारें लगातार सवालों के घेरों में हैं कि अब आखिर कब अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनेगा ? अब जब अयोध्या का ढांचागत विकास को लेकर योगी सरकार ने मुहीम शुरू कर दी है तो अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को लेकर साधु-संतों ने भी बड़े बोल बोलना शुरू कर दिया है। अयोध्या में बनने वाले राम मंन्दिर को लेकर आज सीतापुर में पत्रिका से बातचीत में जगत गुरु शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती ने एक बड़ा बयान दिया।

पत्रिका उत्तर प्रदेश ने आज बैजनाथ धाम से सीतापुर के महोली आये कनिष्ट जगत गुरु शंकराचार्य आत्मानंद सरस्वती से राम मंदिर और अयोध्या के मुद्दे पर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी साधु-संत अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट को एक सड़क से जोड़ने की मांग कर रहे हैं और अयोध्या के विकास को लेकर सरकार से सहयोग मांग रहे हैं। इस दौरान अयोध्या में राम मंदिर को लेकर जब उनसे पूछा गया कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर बनाये जाने के खिलाफ आता है, तब आप मंदिर कैसे बनाएंगे? इस पर शंकराचार्य ने कहा कि वैसे तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के खिलाफ नहीं आएगा और अगर आता भी है तो सुप्रीम कोर्ट विधायिका से ऊपर नही है। यदि विधानसभा में विधेयक पास कराकर सोमनाथ का मंदिर बन सकता है तो विधेयक पास कराकर अयोध्या का मंदिर क्यों नहीं बन सकता है ? उन्होंने कहा कि मंदिर को बनाये जाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है और इसको लेकर निर्माण सामग्री भी लगातार अयोध्या पहुंचाई जा रही है।

उन्होंने योगी सरकार के सरयू किनारे श्रीराम की बड़ी मूर्ति लगाये जाने के फैसले को काफी सराहनीय बताया और कहा कि अयोध्या का विकास हर कोई श्री राम भक्त चाहता है और सरकार का इस तरफ कदम बढ़ाना श्री राम की जन्मभूमि को विश्व पटल पर पर्यटन के लिहाज से स्थापित करना है।

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