शव वाहन न मिलने से बाइक पर बेटे का शव लेकर पहुंचा पिता, वीडियो हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे की काफी किरकिरी हो रही है।

By: Abhishek Gupta

Published: 28 May 2021, 02:41 PM IST

सीतापुर. उत्तर प्रदेश के सीतापुर में जिला अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आयी है। यहां स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और अनदेखी के चलते एक पिता अपने मासूम बेटे के शव को बाइक पर ही ले जाने को मजबूर हो गया। बेबस और लाचार पिता द्वारा बेटे के शव को बाइक पर ले जाने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से पलड़ा झाड़ते हुए परिजनों को ही अस्पताल प्रशासन को जानकारी न देने का कसूरवार ठहरा रहे है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे की काफी किरकिरी हो रही है।

बाइक पर बेटे का शव लेकर पहुंचा पिता

मामला सीतापुर के सदर जिला अस्पताल परिसर का है। यहां तालगांव थाना क्षेत्र के ग्राम देवरिया निवासी छेदी का 10 वर्षीय पुत्र अंकुर कल दोपहर कस्बे में ही सड़क हादसे का शिकार हो गया। परिजनों ने उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। मिली जानकारी के मुताबिक, आज सुबह मासूम बच्चे ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया तो डॉक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के किये शवगृह में रखवा दिया। पुलिस ने पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए तैयार किया, जिसके बाद परिजन शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए शव वाहन की तलाश करने लगे।पिता अपने मासूम बेटे के शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बैठे डॉक्टरों की गणेश परिक्रमा की और स्वयं भी शव वाहन के ड्राइवरों को फोन करके शव ले जाने का आग्रह किया लेकिन उसकी किसी ने नही सुनी।

शव वाहन का ड्राइवर था नशे में धुत

पिता का आरोप है कि शव वाहन का ड्राइवर नशे में भी धुत था। पिता की बेबसी और मायूसी उस समय दम तोड़ गयी जब बेटे का शव खुले आसमान के नीचे घण्टों शव वाहन का इंतजार करता रहा। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी से मजबूर पिता ने बाइक पर अपने बेटे का शव ले जाना मुनासिब समझा और उसे लेकर बाइक पर ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गया। इस वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस ए. के.अग्रवाल का कहना हैं कि पंचायतनामा के बाद शव को ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग की होती है अगर फिर भी ऐसी कोई बात थी वह मुझे सूचित करते तो अस्पताल प्रशासन उसे पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने का प्रयास करता।

Abhishek Gupta
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