सीतापुर की नव्या ने तीन साल में खड़ी की करोड़ों की कंपनी

   सीतापुर की नव्या ने तीन साल में खड़ी की करोड़ों की कंपनी

Online market में आईवीईआई के लकड़ी उत्पादों ने बनाया विशेष स्थान, दक्षिण भारत में हुये काफी लोकप्रीय.

हिमांशु पुरी
सीतापुर.
बंगलौर से डिजाइनिंग का कोर्स करने वाली नाव्या ने अपने पिता के बड़े व्यवसाय से हटकर जब लकड़ी के उत्पादों पर काम करने का मन बनाया था तो उनको खुद इसकी जल्द मिली सफलता का अंदाजा नहीं था। एक आईएएस की पत्नी और एक सफल बड़े व्यवसायी की पुत्री नाव्या ने सीतापुर में बंद हो रहे कुटीर उद्योगों के लिए नयी मिसाल पेश कर एक नए व्यवसाय को जन्म तो दिया ही साथ ही 15 नए लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया।

आई वैल्यू एव्री आइडिया नामक एनजीओ के अंतर्गत सीतापुर के विजय लक्ष्मी नगर के गजानन भवन में हो रहा पॉपुलर की लकड़ी से बने उत्पादों का निर्माण आज तमाम ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों में छाया हुआ है। एनजीओ को चला रहीं नाव्या अग्रवाल ने पत्रिका से खास बात करते हुए बताया कि उन्होंने रैफल्स मिलेनियम इंटरनेशनल, बंगलौर से प्रोडक्ट डिज़ाइनर का कोर्स किया था। जिसके बाद करीब वर्ष 2013 में सीतापुर में इस उद्योग को लगाया।



नाव्या ने बताया कि उन्होंने करीब 15 लोगों को पॉपुलर की लकड़ी से तरह तरह के ख़ूबसूरत सामानों को बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जिसमें करीब पांच लड़कियां भी शामिल हैं। मौजूदा वक्त में इस कारखाने में ज्वेलरी बॉक्स, ट्रेडिशनल हुक्स, कॉस्टर्स, अगरबत्ती स्टैंड, वुडेन ट्रे, गिफ्टकार्डस, पेन ड्राइवर्स सहित करीब 10 दर्जन सामानों का निर्माण हो रहा है। यह सामान ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ्लिपकार्ट, अमेजॉन, फैबफर्निश, स्नैपडील, शॉपक्लूज के जरिये देश के दूर दराज शहरों में बेचा जा रहा और महज कुछ ही समय में लगभग सालाना 15 लाख का टर्न ओवर भी आईवीईआई द्वारा किया जा रहा है। नाव्या ने पत्रिका को बताया कि उनके उत्पाद वैसे तो दिल्ली, मुम्बई, बंगलौर जैसे शहरों में खूब पसंद किये जा रहे हैं, लेकिन बिक्री का बड़ा छेत्र दक्षिण भारत है। यहां लकड़ी के बने उत्पादों को लोग ज्यादा पसंद करते हैं।



देश के बड़े शहरों में बने हैं आईवीईआई के रिटेलर्स
सीतापुर आईवीईआई के बने उत्पादों की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से बेहद आसानी से लगाया जा सकता है कि यहां के उत्पादों को बेचने के लिए दिल्ली, बंगलौर और चेन्नई के लोगों ने रिटेल आउटलेट भी खोल रखे हैं। जिसमें अन्य उत्पादों के साथ आईवीईआई को खास जगह दी गयी है। नाव्या ने बताया कि लकड़ी के बने चाभी के गुच्छे और दीवार घड़ी को ही अक्सर लोगों द्वारा देखा जाता था, लेकिन आईवीईआई के प्रयासों ने लोगों को अन्य उत्पादों से भी रूबरू कराया जिसका असर इन बड़े शहरों में खासकर देखा जा रहा है।

15 लोगों को मिला इस कुटीर उद्योग से रोजगार
एक तरफ जहां सीतापुर से कुटीर उद्योगों का पलायन हो रहा है वहीं नाव्या अग्रवाल की एक नयी कोशिश सीतापुर को एक नए प्लेटफॉर्म पर लाती हुई दिखाई दे रही है। इस तरह से सीतापुर से शुरू हुआ नए प्रकार का उद्योग नई नई प्रतिभाओं को जन्म दे रहा है। फ़िलहाल लकड़ी के उत्पादों के निर्माण में 15 लोगों को रोजगार मिल चुका है।

बच्चों के खिलौनों और घरेलू आइटम्स पर खास ध्यान
आईवीईआई के जरिये नाव्या की कोशिश लोगों के घरों तक पहुँचने की है। लिहाजा उन्होंने बच्चों के खिलौनों और घरेलू उत्पादों पर ज्यादा ध्यान पहले से ही दिया है। इसीलिए वह अपने कारखाने में स्नैक बाउल्स, मिनी फर्नीचर सेट, बच्चों की गुल्लक, पजल राइटिंग बोर्ड, हॉबी बोर्ड्स, पिन बोर्ड्स, फोल्डिंग टेबल, खिलौनों में ट्रक आर्गेनाइजर, यूटिलिटी कैलेंडर आदि का निर्माण करा रही हैं।
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