हम सब भाई-भाई सारे, नहीं किसी को ठुकराना, मानवता की सेवा में नित अपना कर्तव्य निभाना...

नफरत जहाँ-जहाँ भी फैले, प्रेम की नदी बहाना तुम,
दीन, दुखी, पीडि़त प्राणी की, सेवा कर लाभ उठाना तुम,
हम सब भाई-भाई सारे, नहीं किसी को ठुकराना,
मानवता की सेवा में नित अपना कर्तव्य निभाना...

एन एच-19 के किनारे मांझी के पास यदि आप जाएंगे तो फटेहाल सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल नापने वाले श्रमिकों का काफिला खाना खाते हुए मिल जाएगा। इनकी इस सेवा में लगे हैं होटल के मालिक बसंत सिंह।

By: Yogendra Yogi

Published: 16 May 2020, 07:17 PM IST

सीवान(बिहार)प्रियरंजन भारती:
नफरत जहाँ-जहाँ भी फैले, प्रेम की नदी बहाना तुम,
दीन, दुखी, पीडि़त प्राणी की, सेवा कर लाभ उठाना तुम,
हम सब भाई-भाई सारे, नहीं किसी को ठुकराना,
मानवता की सेवा में नित अपना कर्तव्य निभाना...
कोरोना और लॉक डाउन के हालात में ऐसी मानवता का धर्म निभाने वाले जाबांज भी कम नहीं हैं। इन्हीं में से एक हैं बसंत सिंह। यूपी बिहार सीमा पर एन एच-19 के किनारे मांझी के पास यदि आप जाएंगे तो फटेहाल सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल नापने वाले श्रमिकों का काफिला खाना खाते हुए मिल जाएगा। इनकी इस सेवा में लगे हैं होटल के मालिक बसंत सिंह।

पांच सौ को भोजन
(Bihar News ) होटल मालिक सिंह भूखे-प्यासे राहगीरों को प्यार से भोजन कराते हैं ( Duty for humanity ) बल्कि रास्ते के लिए भी उन्हें खाने बांध कर देते हैं। वक्त के मारे इन सुदामाओं को ( Free food for all ) भोजन कराने से बसंत सिंह को आत्मसंतोष का अनुभव होता है। सिंह की इस होटल में करीब पांच सौ लोग हर दिन भोजन पा रहे हैं।

होटल बंद कर शुरु किया भंडारा
कोरोना बंदी में हर रोज सुबह से रात बीते तक यूपी के इसी रास्ते होकर बड़ी संख्या में घर लौटने के लिए पैदल चलने वालों की कतार लगी रहती है। यह देख होटल मालिक बसंत सिंह की मानवता जाग उठी और उन्होंने होटल का कैश काउंटर बंद कर डाला। होटल के कारीगरों का काम जारी रहा पर खाने वालों से पैसे लेने की गरज छोड़ दी। बसंत सिंह सुबह से देर रात तक इस काम में जुटे रहते हैं। नतीजन सुबह से रात तक लगभग पांच सौ बेबस भूखे राहगीरों को मुफ्त के सुस्वादु भोजन मिल रहा है। यही नहीं ,खाने के बाद सभी को रास्ते का खाना भी पैक कर भेंट किया जा रहा है।

इस काम में और भी साथ जुटे
होटल मालिक के इस नेक काम से सीख लेकर आसपास के गांवों के की लोगों ने मदद के साथ बढ़ाए। अब सेवाभावियों की पूरी एक टीम तैयार हो गई है जो घरों से भोजन के लिए राशन और सब्जियां लाकर देने के साथ बेबस राहगीरों को खाना खिलाने और उनका ख्याल रखने में जुटी है। झारखंड के खूंटी के रहने वाले मजदूर मुर्तज़ा ने बताया कि कई दिनों बाद घर जैसा बढिय़ा खाना भरपेट खाने को मिला। पश्चिम बंगाल के पुरूलिया निवासी सोहन बताते हैं कि रास्ते से जा रहे थे कि होटल वालों ने बुलाया और खूब खाना खिलाया।

सरकार ने अब किए हैं आदेश
रास्ते चलने वालों की विवशता है कि उन्हें भूखे प्यासे बस चलते ही जाना है। सफर में इन्हें खाने पीने के सामान बंदी के कारण नहीं मिल पाते हैं। सरकार ने दावे-वादे तो काफी किए पर इन राहगीरों के लिए कहीं कोई इंतजाम नहीं किया। होटल मालिक बसंत सिंह की दरिया दिली देखकर ही शायद सरकार ने अब हाईवे किनारे ढाबे शुरु करने के आदेश जारी किए हैं। यह और बात है कि खुलने वाले सभी ढाबों में खाने के बेहतर इंतजाम होंगे मगर बसंत सिंह सरीखा शायद ही कोई हो जो भूखों के लिए काउंटर बंद कर मुफ्त भोजन कराने की उदारता दिखा सके।

मिलता है आत्म संतोष
बेबस और भूखे राहगीरों को मुफ्त में भोजन कराकर होटल मालिक को बड़ी शांति और आत्म संतोष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि इसमें हमें अपार सुख मिल रहा है। ऐसा लगता है कि भगवान ने हमारे जीवन का मकसद सही साबित कर दिया हो। बातों बातों में मानवता के प्रति उनकी संवेदनशीलता आंखों और चेहरे की भाव भंगिमाओं से ओतप्रोत होकर टपक पड़ती है।

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