यहां डॉल्फिन के शानदार नजारे आपका मन मोह लेंगे

(Bihar News ) डॉल्फिन (Dolphin ) का नाम लेते ही उसका सौन्दर्य और अठखेलियों भरी हवा में छलांग जेहन में आने लगती है। इन दिनों बिहार में डॉल्फिन पूरे शबाब पर है। इनके शानदार नजारे ( Magnificent views of the dolphin ) पटना से करीब 25 किलोमीटर दूर गंगा-पुनपुन संगम त्रिवेणी घाट पर देखे जा सकते हैं। गांगेय डाल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव है। देश का इकलौता विक्रमशीला गांगेय डाल्फिन आश्रयणी बिहार में है। यह 60 किलोमीटर लंबा है।

By: Yogendra Yogi

Published: 25 Aug 2020, 03:56 PM IST

सिवान(बिहार): (Bihar News ) डॉल्फिन (Dolphin ) का नाम लेते ही उसका सौन्दर्य और अठखेलियों भरी हवा में छलांग जेहन में आने लगती है। इन दिनों बिहार में डॉल्फिन पूरे शबाब पर है। इनकी मस्ती और उछलकूद देखने वालों का मन मोह लेती हैं। डॉल्फिन को पानी से हवा में छलांग लगाते हुए देखने के शानदार नजारे ( Magnificent views of the dolphin ) पटना से करीब 25 किलोमीटर दूर गंगा-पुनपुन संगम त्रिवेणी घाट पर देखे जा सकते हैं। पटना सिटी के आलमगंज के सामने वैशाली जिले की सीमा क्षेत्र में गंगा और गंडक नदी (Ganga and Gandak river ) के संगम स्थल पर भी डाल्फिन को देखने का आनंद उठाया जा सकता है। पटना के गांधीघाट और गायघाट के पास भी डाल्फिन दिख जाती है।

इकलौता डॉल्फिन रहवास क्षेत्र
देश का इकलौता विक्रमशीला गांगेय डाल्फिन आश्रयणी बिहार में है। यह 60 किलोमीटर लंबा है। इस आश्रयणी में डाल्फिन देखने का आनंद पर्यटक उठाते हैं। पटना के गांधीघाट से फतुहा के बीच में 22 डाल्फिन हैं। गंगा में 1048 डाल्फिन हैं। बक्सर से मोकामा के बीच 298 तथा मोकामा से साहिबगंज के बीच 750 डाल्फिन की गणना की गई है। गंडक नदी में 155 और घघरा में 125 डाल्फिन हैं।116 डाल्फिन अन्य नदियों में देखी गई थी। विश्व में 3500 डाल्फिन बची हुई है। देश में आधा तथा विश्व में एक तिहाई डाल्फिन बिहार में है।

डॉल्फिन रिसर्च सेंटर
डॉल्फिन रिसर्च सेंटर का निर्माण 27.66 करोड़ की लागत से पटना लॉ कॉलेज घाट के पास होने जा रहा है। 4407 वर्ग मीटर भूमि में जी प्लस टू भवन बनेगा। भवन निर्माण का शिलान्यास सितंबर माह के अंत तक हो सकता है। रिसर्च सेंटर बन जाने से यहां देश-विदेश के विशेषज्ञ शोध करने के लिए आएंगे। पांच अक्टूबर 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गांगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। डॉल्फिन को जलीय जीव घोषित कराने का श्रेय पटना विवि के प्रोफेसर डॉ. आरके सिन्हा को दिया जाता है।

प्रोजेक्ट डॉल्फिन
स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से घोषणा की थी कि प्रोजेक्ट डाल्फिन पूरे देश में लागू किया जाएगा। इससे डाल्फिन के संरक्षण के साथ-साथ नदियों की जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा जलीय जीवों के साथ वनस्पतियों का भी संरक्षण होगा। घडिय़ाल, कछुआ, उद्विलाव, पक्षियों सहित इन नदियों के आसपास पाए जाने वाले जीव का संरक्षण होगा। नदी के पानी में शुद्धता आएगी। रोजगार भी मिलेगा। गंगा सहित नदियों के दियारा में हो रही खेती में कीटनाशक दवाओं और रासायनिक उर्वरक के बेधड़क इस्तेमाल में कमी आएगी।

राष्ट्रीय जलजीव है डॉल्फिन
बिहार के प्रयास से पांच अक्टूबर 2009 को केंद्र सरकार ने गांगेय डाल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डाल्फिन महिलाओं की तरह नौ माह तक गर्भ धारण करती है तथा बच्चे को जन्म देने के बाद दूध पिलाकर बड़ा करती है। नदी की आहार श्रृंखला में सबसे ऊपर रहने वाली डाल्फिन का जंगल में बाघ की तरह नदी में स्थान है।

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