उपचुनाव: दो नगर पंचायतों में भाजपा की करारी हार, निर्दलियों ने बड़े अंतर से हराया

एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार को मिले महज 51 वोट

सोनभद्र. जिले के नगर पंचायत उपचुनाव में भाजपा का हार का सामना करना पड़ा है। चोपन और रेणुकुट सीट पर निर्दल प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। इस हार से भाजपा के खेमें में पूरी मायूसी है।

चोपन नगरपंचायत में अध्यक्ष पद के लिए 14 जनवरी को वोट डाले गये थे। मतदान के बाद से ही मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी फरीदा बेगम और बीजेपी उम्मीदवार सत्य प्रकाश तिवारी के बीच बताया जा रहा था। गुरूवार को मतगणना शुरू तो पहले ही राउंड से निर्दल उम्मीदवार ने बढ़त बनाई जो आखिरी तक जारी रही। इस हार से भाजपा खेमें में पूरी मायूसी है। बतादें कि चोपन नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशी को 2323 मत और निर्दलीय फरीदा बेगम को 2873 मत मिले। फरीदा ने पांच सौ से अधिक मतों से जीत अपने नाम किया।

रेणुकूट में भी भाजपा की हार

रेणुकूट सीट से निर्दल प्रत्याशी निशा सिंह तीनों चरणों में आगे रही। पहले चरण में निशा सिंह को 1597, अनिल सिंह को 875, भाजपा प्रत्याशी शारदा खरवार को 26 व राजपति साहनी को 16 मत प्राप्त हुए। इस तरह पहले चरण में निशा सिंह 722 मतों से आगे रही। दूसरे चरण में निशा सिंह को 1463 मत, अनिल सिंह को 789 मत, शारदा खरवार को 20 मत व राजपति साहनी को 18 मत मिले। तीसरे व अंतिम चरण की मतगणना में निशा सिंह को 416 मत, अनिल सिंह को 226 मत, शारदा खरवार को 5 मत मिले। तीनों चरणों में निशा सिंह को 3476 मत व उनके प्रतिद्वन्दी अनिल सिंह को 1890 मत ही मिले। इस प्रकार निशा सिंह 1586 मतों विजयी रहीं।

हत्या के बाद खाली हुईं थी दोनों सीट

बतादें कि दोनों सीटों पर पहले अध्यक्षों की गोली मारकर हत्या के बाद यहां उपचुनाव कराया गया था चोपन नगर पंचायत अध्यक्ष रहे इम्तियाज अहमद की 25 अक्टूबर 2018 गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं रेनुकूट नगर पंचायत के अध्यक्ष रहे शिव प्रताप सिंह उर्फ बबलू सिंह की 30 सितम्बर 2019 को गोली मारकर की गई थी हत्या के बाद ये सीटें खाली हुई थी। प्रशासन ने यहां 14 जनवरी को मतदान कराया था। जिसका परिणाम गुरूवार को घोषित किया गया। बतादें कि दोनों विजयी अध्यक्ष फातिमा औऱ निशा, पूर्व के अध्यक्ष इम्तियाज और बबलू सिंह की पत्नी हैं।

हार के बाद भाजपा खेमें में मायूसी

इस चुनाव को लेकर भाजपा के स्थानीय नेता जहां पूरी ताकत के साथ जीत का दावा कर रहे थे। वहीं हार के बाद जिला बीजेपी में पूरी मायूसी है। जीत सुनने के लिए जिला कार्यालय पर सुबह से ही डटे नेता दोपहर होने और मतगणना में पिछड़ने की खबरों के साथ ही कार्यालय से खिसकने लगे। कई नेताओं से संपर्क साधने की कोशिश की गई तो उन्होने फोन तक नहीं उठाया। हार के बाद ये कहना गलत नहीं होगा की इस हार ने जिले में एक बार फिर भाजपा को सबक सिखाने का काम किया है।

Ashish Shukla Desk
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