सोनभद्र नरसंहार: मुआवजा बांटने पहुंचे सरकारी नुमाइंदे से बोले पीड़ित, जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे

सोनभद्र नरसंहार: मुआवजा बांटने पहुंचे सरकारी नुमाइंदे से बोले पीड़ित, जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे
सोनभद्र नरसंहार: मुआवजा बांटने पहुंचे सरकारी नुमाइंदे से बोले पीड़ित, जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे

Ashish Kumar Shukla | Publish: Jul, 20 2019 06:40:38 PM (IST) | Updated: Jul, 20 2019 06:42:59 PM (IST) Sonbhadra, Sonbhadra, Uttar Pradesh, India

मृतक के परिजनो को मुख्यमंत्री राहतकोष से पांच-पांच लाख का चेक दिया गया, घायलों को 50 -50 हजार उनके खाते में भेजे जाएंगे

सोनभद्र. घोरावल थाना क्षेत्र के उभ्भा गांव में नरसंहार के चौथ दिन शनिवार को मृतक के परिजनों को पांच पांच लाख के सहायता राशि का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष से दे दिया गया। साथ ही सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि घायलों के खाते में जल्द ही 50-50 हजार रूपये भेज दिये जाएंगे।

जी हां शनिवार को जिस समय काग्रेस की नेता प्रियंका चुनार किले में धरने पर बैठी थीं उसी समय सरकार की तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल नरसंहार पीड़ितों से मुलाकात कर चेक वितरित कर रहा था। सरकार के मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख का चेक दिया। घायलों के खाते में जल्द 50-50 हजार रूपये देने की बात कही गई है। इस दौरान सोनभद्र के जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, भाजपा के एमएलसी केदारनाथ सिंह, क्षेत्रीय विधायक डॉ अनिल मौर्य,सांसद पकौड़ी लाल कोल, समेत भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद रहे।
पीड़ितों ने कहा हमें पैसे नहीं कार्रवाई चाहिए
जिस समय सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री राहत कोष के चेक लोगों को बांटे जा रहे थे। उसी समय ग्रामीणों में काफी नाराजगी थी। भाजपा नेताओं से गांव के लोगों ने कहा महज पैसा देने से काम नहीं चल पाएगा, नरसंहार करने वालो को सजा मिलनी चाहिए तभी हमें संतोष होगा।

कहा बुलाए गये थे शूटर

प्रतिनिधि मंडल को अपना दर्द सुनाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि हमारा आखिर क्या दोष था कि इतनी बड़ी साजिश करके हमें मार दिया गया। बाहरी शूटरों को बुलाकर हमपें गोलियां बरसाईं गईं। ये आखिर कैसा न्याय है।

कहा जमीन का आवंटन ही वास्तविक हल

गांव के लोगों ने सरकार से अपील किया है कि मर्माहत आदिवासियों के नाम से इस जमीन का आवंटन किया जाना चाहिए। कहा कि जब तक जमीन हमारे नाम से नहीं कर दी जाएगी। हमे लोगों का शिकार होना ही पड़ेगा। कहा प्रशासन हमे झुनझुना थमाने का काम कर रहा है। कहा कि हम जमीन नहीं जान देते रहेंगे।

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