राहुल की रैली से तय होगा हरियाणा कांग्रेस का भविष्य

राहुल गांधी द्वारा आगामी 29 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित की जा रही जन आक्रोश रैली से हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का भविष्य तय होगा

By: शंकर शर्मा

Published: 25 Apr 2018, 12:37 AM IST

चंडीगढ़। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गांधी द्वारा आगामी 29 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित की जा रही जन आक्रोश रैली से हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का भविष्य तय होगा। इससे पहले कांग्रेस पार्टी द्वारा दिल्ली में आयोजित की जाने वाली रैलियों में भीड़ जुटाने का पूरा दारमदार हरियाणा पर ही रहा है लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं।

हाईकमान के लाख प्रयासों तथा लोकसभा और विधानसभा हारने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर तथा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक मंच पर नहीं आ सके हैं। यह रैली इन दोनों नेताओं के निर्णायक साबित होगी। क्योंकि इसके कांग्रेस पार्टी में बड़े बदलाव तथा एक गुट द्वारा बड़ा फैसला लिए जाने की अटकलों का दौर जारी है।

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की यह पहली रैली होगी और इसके मद्देनजर पार्टी हाईकमान शुरु से ही फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी हाईकमान हरियाणा कांग्रेस के नेताओं की आपसी फूट अथवा गुटबाजी को दिल्ली रैली से दूर रखने के प्रयास में है। यह वजह है कि रैली में भीड़ जुटाने का एक बड़ा दारोमदार संभाल रहे हरियाणा के तमाम कांग्रेसी दिग्गजों को शुरुआत में इस हिसाब से रैली की तैयारियों में जुटने को कहा गया है।

हरियाणा में शुरू से यह पंरपरा रही है कि इस स्तर की राष्ट्रीय रैलियों में अपनी ताकत दिखाने के लिए नेताओं द्वारा समर्थकों को अलग-अलग रंग की पगडिय़ां, पटके और टोपियां पहनाई जाती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट गुलाबी पगड़ी के सहारे अपनी अलग उपस्थिति दिखाने की कोशिश करता रहा है तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर का गुट लाल रंग में पंडाल में अपनी नजर आता रहा है।

जन आक्रोश रैली के मद्देनजर हाईकमान ने पहले ही साफ कर दिया है कि कोई भी गुट अलग-अलग रंग की पगडिय़ां पहनकर नहीं आएगा। सभी कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी के झंडे तले एकत्र होंगे। पिछले बार हुई रैली में गुलाबी व लाल रंग की पगड़ी वाले कार्यकर्ताओं में मारपीट तक हो गई थी और अशोक तंवर चोटिल हो गए थे।

सूत्रों की मानें तो हाईकमान ने हरियाणा के नेताओं को दिल्ली रैली के लिए करीब 50 हजार लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा पिछले कई दिनों से पैर में फ्रैक्चर के चलते अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी अनुपस्थिति में दीपेंद्र हुड्डा रैली की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि पार्टी के भीतरी राजनीतिक समीकरणों को भांपते हुए हुड्डा समर्थक विधायक भी इस बार रैली को लेकर ज्यादा सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। इसके बावजूद हुड्डा ने बुधवार को अपने दिल्ली आवास पर बैठक बुलाई है।

रैली में महज चार दिन पहले होने जा रही इस बैठक का रैली में क्या असर दिखाई देगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं हुड्डा खेमे के विधायक धर्म सिंह छोकर ने बताया कि रैली में भीड़ जुटाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। आज की बैठक में सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। दूसरी तरफ यह रैली कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी हाईकमान ने एक तरह से अशोक तंवर को रैली के आयोजन के लिए फ्री हैंड दे
रखा है। तंवर अपने स्तर पर एक माह से जनसंपर्क अभियान चलाए हुए हैं।

अगर रैली में भीड़ जुटती है तो इस बार उसका श्रेय हुड्डा गुट की बजाए तंवर गुट को मिलेगा और यही भीड़ अशोक तंवर की लोकप्रियता का पैमाना होगी। क्योंकि दीपेंद्र सिंह हुड्डा, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई सरीखे नेताओं ने रैली के प्रचार हेतु खुद को एक दायरे तक ही सीमित रखा है।

हरियाणा कांग्रेस में इस बात के प्रबल संकेत मिल रहे हैं कि रैली के बाद हुड्डा व तंवर गुट में कई नए समीकरण देखने को मिलेंगे। बहरहाल राहुल गांधी की जन आक्रोश रैली का पूरा असर हरियाणा की राजनीति पर पडऩा तय है।

शंकर शर्मा
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