हरियाणा: अस्थायी बस चालकों की नियुक्ति बरकरार, चतुर्थी श्रेणी कर्मचारियों पर लटकी तलवार, विरोध में चल रहा है आंदोलन

हरियाणा: अस्थायी बस चालकों की नियुक्ति बरकरार, चतुर्थी श्रेणी कर्मचारियों पर लटकी तलवार, विरोध में चल रहा है आंदोलन
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Prateek Saini | Updated: 28 May 2019, 08:27:38 PM (IST) Sonipat, Sonipat, Haryana, India

हरियाणा रोडवेज महासंघ के प्रधान बलबीर सिंह जाखड़ ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 23 मई को एक पत्र जारी किया था जिसमे 2016 में भर्ती हुए बस चालक और परिचालक आदि कर्मियों को निकाले जाने के आदेश थे...

(चंडीगढ,सोनीपत): हरियाणा के परिवहन मंत्री कृृष्ण लाल पंवार ने हालांकि आज यहां कहा कि वर्ष 2016 में रोडवेज में अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए बस चालकों को नहीं हटाया जाएगा और नई खरीदी जाने वाली बसों के लिए उनकी सेवाएं ली जायेगी। लेकिन उन्होंने रोडवेज में माली, चौकीदार और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 500 पदों पर अस्थायी रूप से की गई नियुक्तियों को जारी रखने के बारे में कोई खुलासा नहीं किया।

 

हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी अस्थायी रूप से नियुक्त किसी कर्मचारी को न हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। कमेटी ने आंदोलन के तहत आज हरियाणा और चंडीगढ़ स्थित हरियाणा रोडवेज के डिपो पर सुबह 2 घंटे प्रदर्शन किया। हरियाणा रोडवेज महासंघ, इंटक समेत कई यूनियन के सदस्यों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। कमेटी के नेताओं ने बताया कि राज्य सरकार ने 23 मई को इन कर्मचारियों को हटाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद जारी किया गया। इससे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन भी हुआ है। उन्होंने बताया कि 2016 में भर्ती किए गए साढे तीन सौ के लगभग बस चालक तथा पिछले 3 सालों में रोडवेज के वर्कशॉप तथा दफ्तर आदि में भर्ती किए गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, माली, चौकीदार जैसे 500 से अधिक कर्मचारी शामिल हैं।

 

हरियाणा रोडवेज महासंघ के प्रधान बलबीर सिंह जाखड़ ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 23 मई को एक पत्र जारी किया था जिसमे 2016 में भर्ती हुए बस चालक और परिचालक आदि कर्मियों को निकाले जाने के आदेश थे। इसके खिलाफ कमेटी की ओर से रोहतक में 25 मई को एक बैठक की गई थी। बैठक में सरकार द्वारा कर्मचारियों को निकाले जाने के आदेशो को गैर कानूनी माना गया। बलबीर सिंह के मुताबिक जिन कर्मचारियों को निकला गया है उन्होएँ पूरे टेस्ट पास करने के बाद नियुक्ति ली थी। उन्होंने मांग की कि सरकार अपने इन आदेशों को वापिस ले। अगर ऐसा नहीं होता तो कमेटी पूरे राज्य में विशाल आंदोलन की रुपरेखा तय करेगी।

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