स्तन कैंसर पीडि़तों को letters लिखकर बांटती हैं उनका दुख-दर्द

शब्दों में गहराई होती है जो हमारी भावनाओं को छूने में सक्षम हैं। एक अजनबी का हाथ से लिखा एक साधारण-सा कार्ड स्तन कैंसर से जूझ रही महिला के लिए संजीवनी बन गया। उसे अपने रोग से लडऩे में एक नई ऊर्जा मिल गई। वह महिला इस कार्ड को रोज अपने सिरहने रखती और सोने से पहले पढ़कर सोती।

By: Mohmad Imran

Updated: 04 Nov 2019, 05:39 PM IST

यह कार्ड उस मुहिम का एक छोटे सा हिस्सा है जिसे जिना मलीगन 'गल्र्स लव मेल' के नाम से चला रही हैं। उनकी सह गैर-लाभकारी संस्था हाथों से लिखे काड्र्स और चिट्ठियां पूरे अमरीका में स्तन कैंसर से जूझ रही महिलाओं को भेजती हैं। साल 2011 में कभी एक लैटर से शुरू हुई मुहिम के अंतर्गत अब तक पूरे अमरीका में करीब 1 लाख 45 हजार से ज्यादा काड्र्स और चिठ्ठियां भेजी जा चुकी हैं।

स्तन कैंसर पीडि़तों को letters लिखकर बांटती हैं उनका दुख-दर्द

2009 में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करवाने के दौरान मलीगन ने चिठ्ठियों के रूप में एक नॉवेल लिखने की शुरुआत की थी। यह बाद में 'फ्रॉम अक्रॉस द रूम' नाम से प्रकाशित भी हुआ। इलाज के दौरान उन्हें मित्रों और रिश्तेदारों से 200 से ज्यादा खत और काड्र्स मिले जिसमें लोगों ने उनके संघर्ष में हमेशा साथ खड़ा रहने की बात कही। इनमें से ज्यादातर काड्र्स उन लोगों के थे जिन्हें वे कभी मिली नहीं थीं। इसने उन्हें 'गल्र्स लव मेल' मुहिम के लिए प्रेरित किया।

स्तन कैंसर पीडि़तों को letters लिखकर बांटती हैं उनका दुख-दर्द

आज 51 साल की उम्र में वे 10 साल से कैंसर फ्री जिंदगी जी रही हैं। साथ ही उस प्यार को दूसरों तक भी पहुंचा रही हैं जो उन्हें उनके दोस्तों के मित्रों, परिवारजनों और चर्च के अपने नियमित प्रार्थना करने आने वाले लोगों से मिली थी, जिन्हें वे जानती ही नहीं थीं। उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर वॉरियर्स के लिए इस मुहिम की शुरुआत कर उन्हें इस संघर्ष में जीतने के लिए प्रेरित करने को अपना लक्ष्य बना लिया है।

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Mohmad Imran
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