श्रीजीत 760 दिनों से कर रहा था यह युवा अकेले प्रोटेस्ट, अब उसके समर्थन में उतरे लोग

Mazkoor Alam

Publish: Jan, 14 2018 05:23:44 PM (IST) | Updated: Jan, 14 2018 05:23:45 PM (IST)

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श्रीजीत 760 दिनों से कर रहा था यह युवा अकेले प्रोटेस्ट, अब उसके समर्थन में उतरे लोग

श्रीजीत 2014 में पुलिस की हिरासत में पुलिस यातना की वजह से हुई मौत की न्यायिक जांच कराने के लिए कर रहे हैं प्रोटेस्ट

तिरुअनंतपुरम : केरल में एक युवा श्रीजीत 760 दिनों से भी ज्यादा समय से न्याय पाने के लिए अकेले संघर्ष कर रहे थे। अब उनकी न्याय पाने की लड़ाई को बड़ी संख्या में केरल के युवाओं का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उसके प्रोटेस्ट को देख कर हजारों की तादाद में केरल के युवा उसके समर्थन में उतर आए हैं। मामला २०१४ में पुलिस की हिरासत में पुलिस यातना की वजह से उनके भाई के मारे जाने का है। वह उसके लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं।

30 दिनों से भूख हड़ताल पर
वह करीब दो सालों से भी ज्यादा समय से इसके लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। 760 से भी ज्यादा दिनों से वह राज्य सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि सोशल मीडिया पर उनके इस अभियान को देखकर केरल के हजारों युवा उनके समर्थन में उतर आए हैं। 2014 में श्रीजीत के भाई को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। श्रीजीत ने बताया कि उनका भाई पुलिस यातना का शिकार होकर पुलिस की हिरासत में उसकी मौत हो गई।
पहले वह राज्य सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे अब वह पिछले 30 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह कहते हैं कि राज्य सरकार पहले इस बात के लिए तैयार हो गई थी कि वह सीबीआई जांच करवाएगी, लेकिन वह अब यह कह रही है कि स्पेशल पुलिस इंवेस्टिगेशन टीम से इसका दोबारा जांच करवाएगी। यह क्या है? यह राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मुझे इंसाफ दिलाए। मेरे भाई की मौत पुलिस हिरासत में पुलिस यातना का शिकार हो कर हुई है।

राज्य के युवा उतरे समर्थन में
29 साल के श्रीजीत करीब 700 दिनों तक इसके लिए अकेले प्रोटेस्ट करते रहे। लेकिन पिछले 10 दिनों से राज्य के युवाओं का उन्हें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। वे राज्य सचिवालय के बाहर उनके समर्थन में जमा हो रहे हैं और उन्हें यकीन दिला रहे हैं कि वे उसके साथ हैं। वह कहते हैं कि कि श्रीजीत के समर्थन में आए हैं। पिछले दिनों से हैशटैग के साथ उनके विरोध प्रदर्शन को देख रहा था। उसके बाद निर्णय लेकर मैं उनकी लड़ाई में साथ देने आया हूं और न्याय के लिए उनके साथ कंधा से कंधा मिला कर खड़ा हूं। केरल की राजनीति का केंद्र सचिवालय है। यहां पर कांग्रेस, सीपीएम और बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा हर रोज सैकड़ों विरोध प्रदर्शन होते हैं। इस राज्य के हर दल के बड़े-बड़े नेता बहुत बार श्रीजीत को यहां प्रदर्शन करते देख कर आगे बढ़ गए होंगे। लेकिन उनमें से कोई भी उनके समर्थन में आगे नहीं आया। अब हमें न्याय चाहिए। इससे कम पर कोई समझौता नहीं।

पुलिस का कहना है कि श्रीजीत के भाई ने आत्महत्या की थी
मालूम हो कि पुलिस जांच प्राधिकरण ने इसके समानांतर जांच शुरू की थी, जिसमें उसने पाया कि श्रीजीत के भाई की मौत का कारण पुलिस हिरासत में दी गई यातना ही थी। राज्य सरकार ने श्रीजीत की मौत के बाद मुआवजे में 10 लाख रुपए की राशि दी थी और इस मामले की गहराई से छानबीन के लिए पिछले साल सीबीआई को केस भेजा था, लेकिन पिछले महीने दिसंबर में सीबीआई ने केस लेने से इनकार कर दिया।
इसके बाद भी श्रीजीत ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। पुलिस के शीर्ष स्तर के सूत्र बताते हैं कि इसमें कुछ प्रक्रियागत गड़बडिय़ां जरूर हुई है, लेकिन पुलिस यातना के कारण हिरासत में मौत नहीं हुई थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्रीजीत के भाई श्रीजीव को पुलिस ने २०१४ में चोरी के आरोप में जब गिरफ्तार किया था, तब उसने जहर खा लिया था। उसने अपने अंडरवियर में जहर छिपाकर रखा था। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो उसने डॉक्टर को बताया था कि उसने जहर खा लिया है और जहर का नाम भी बताया था। पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने डॉक्टर ने इस बात की पुष्टि भी की थी कि कोई चोट नहीं है। हम किसी से कुछ छिपा नहीं रहे हैं। इसलिए हम किसी भी जांच एजेंसी से जांच के लिए तैयार हैं।

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