CLIMATE CHANGE : तापमान 4 डिग्री बढ़ा तो पिघल जाएगी अंटार्कटिका की 34 फीसदी बर्फ

इस आपदा से बचने के लिए तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस तक रोकना होगा

By: pushpesh

Published: 22 Apr 2021, 06:20 PM IST

तापमान वृद्धि के चलते धु्रवीय क्षेत्रों में ग्लेशियर्स पिघलने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इस बीच ब्रिटेन की रीडिंग विश्वविद्यालय के अध्ययन में चिंताजनक तस्वीर निकलकर आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि चार डिग्री सेल्सियस के ऊपर जाती है तो अंटार्कटिका महाद्वीप के एक हिस्से की 34 फीसदी बर्फ (5 लाख वर्ग किमी) पिघल जाएगी। निष्कर्ष पेरिस समझौते में निर्धारित वैश्विक तापमान को सीमित करने के महत्व को रेखांकित करते हैं। यदि हम जलवायु परिवर्तन के सबसे खराब परिणामों से बचना चाहते हैं, जिसमें समुद्र के जल स्तर में वृद्धि भी शामिल है, तो तापमान वृद्धि को पेरिस जलवायु समझौते के मुताबिक 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना होगा।

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समुद्र में इतना पानी बढ़ेगा, जिसकी कल्पना भी नहीं की
शोधकर्ताओं ने जिस विशाल हिमखंड पर अध्ययन किया है, वह चार वर्ष पहले ए-68 ग्लेशियर से अलग हो गया था। इसी हिस्से के पिघलने की आशंका व्यक्त की गई है। शोध वैज्ञानिक डॉ. एला गिल्बर्ट ने कहा कि बर्फ के खंड महत्वपूर्ण हैं जो ग्लेशियरों को जमीन से समुद्र में बहने से रोकते हैं ये ग्लेशियर समुद्र के जल स्तर को बढ़ाने में अहम योगदान देते हैं। जब वे ढहते हैं, तो यह एक विशालकाय की तरह होते हैं, जिससे ग्लेशियरों से पानी की इतनी मात्रा समुद्र में जा सकती है जिसकी हमने कभी कल्पना भी न की हो।

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