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China India Dispute: चीनी तोपों की रेंज में आयी 'चिकन नेक'

China India Dispute: मेजर जनरल (रि) सुधाकर जी बताते हैं कि जिस जगह पर चीन इस समय आकर बैठा है, वहां से गलियारे की वायु दूरी 30 किलोमीटर से कम है। अगस्त 2017 में डोकलाम में भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर

जयपुर

Published: November 19, 2021 11:18:29 am

आनंदमणि त्रिपाठी
China India Dispute: पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी गलियारा, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है, चीनी तोपों (आर्टिलरी) की रेंज में आ गया है। भूटान की विवादित भूमि पर चीन के चार गांव बनाने की खबरों के बाद यह स्थिति बनी है। इसका सीधा असर पूर्वोत्तर की सुरक्षा पर पड़ता दिखाई दे रहा है। मेजर जनरल (रि) सुधाकर जी बताते हैं कि जिस जगह पर चीन इस समय आकर बैठा है, वहां से गलियारे की वायु दूरी 30 किलोमीटर से कम है। अगस्त 2017 में डोकलाम में भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। उसके बाद चीनियों ने रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए यह चाल चली है।
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China India Dispute Siliguri Corridor
नए बसाए गए ये चीनी गांव भूटान क्षेत्र में दो किमी दूर और डोकलाम के बेहद करीब हैं। मैक्सर की सैटेलाइट तस्वीरों से साफ पता चलता है कि इनका निर्माण मई 2020 और नवंबर 2021 के बीच किया गया। ये गांव उस समय बसाए गए जब भूटान के साथ चीन सीमा समझौता वार्ता का दिखावा कर रहा था। भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि भारत ही भूटान की सुरक्षा का जिम्मा देखता है।
निगहबानी जरूरीः ले. जनरल(रि) नरसिम्हन
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रि) एसएल नरसिम्हन बताते हैं कि चीन अपनी रणनीति पर काम करते हुए भूटान और भारत में ऐसी जगह कब्जा कर रहा है जहां आधारभूत ढांचा विकसित नहीं हुआ है। चीन भूटान में ही नहीं बल्कि करीब 4000 किलोमीटर की सीमा रेखा पर 628 गांव बसा रहा है। फिलहाल चीन की गतिविधि पर निगाह रखने की जरूरत है।

दरअसल, चीन चुंबी वैली में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाह रहा है। वह नहीं चाहता है कि किसी अप्रिय स्थिति में उसका हश्र पेंगौंग त्सो झील के जैसा हो। गौरतलब है पेंगौंग त्सो झील पर भारतीय सेना के जवानों ने ब्लैक टॉप पर कब्जा कर लिया था और मोल्डो सहित अन्य चीनी सैन्य अड्डे भारतीय सेना के निशाने पर आ गए थे। इसके बाद यहां भी चीनियों को पीछे हटना पड़ा था।
अरूणाचल में बसाई एक और कालोनी
मैक्सर इमेज के अनुसार, भारतीय सीमा के अंदर चीन ने अरुणाचल प्रदेश के शी-योमी जिले में एक और कॉलोनी (एनक्लेव) बना ली है। इसमें करीब 60 इमारतें हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब छह किलोमीटर भीतर और वास्तविक नियंत्रण रेखा के उस पार है। इस इलाके पर भारत का दावा है। यह नया एन्क्लेव उस इलाके से 93 किलोमीटर पूर्व में स्थित है जहां पहले चीन ने कॉलोनी बनाई थी।
1998 से चीनी चाल
कर्नल विनायक भट (रिटायर्ड) बताते हैं कि चीन पूरी सीमा पर माओत्से तुंग की नीति अपना लगातार घुसपैठ कर रहा है। माओ ने कहा था कि पांचों अंगुलियां बराबर होनी चाहिए और जरूरत पडे तो अंगुली काट दी जाए। इसी नीति को अपनाते हुए वह पूरी सीमा पर हान लोगों का गांव बसा रहा है। जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दावा कर सकें कि यह गांव मूल रूप से चीनियों के ही हैं। दूसरे चीन को तिब्बतियों पर भरोसा नहीं है। इन गांवों को सियावखांग गांव कहा जाता है।
तिब्बितयों की नस्ल बर्बाद कर रहा चीन
कर्नल भट बताते हैं चीन एक साथ कई मोर्चों पर काम करता है। एक तरफ वह सीमा पर हान लोगों को बसाकर रणनीतिक तौर पर उनसे अर्ली वार्निंग सुरक्षा अलर्ट का काम करा रहे है तो वहीं सामाजिक स्तर पर तिब्बतियों की नस्ल बदल रहे है। तिब्बती चीन को पसंद नहीं करते हैं और आजादी की मांग करते हैं। ऐसे में सीमाई इलाकों में हान लोगों को बसा रहा है और यहां हान लोग तिब्बती लड़कियों को आकर्षित कर शादी कर रहे हैं और उन्हें हान में परिवर्तित कर रहे हैं।
अलग-अलग बयान पहुंचा रहे नुकसान
कर्नल विनायक भट (रिटायर्ड) बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के दो मंत्रालय का अलग अलग बयान नुकसान पहुंचा रहा है। रक्षा मंत्रालय कहता है कि कब्जा नहीं है और विदेश मंत्रालय कहता है कि चीन हमारी सीमा में घुसे है। ऐसे में नुकसान होता है। चीन के खिलाफ हमें स्पष्ट और बेहद कडे शब्दों में हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिरोध करना होगा।
भारत—चीन के बीच 14 वीं बैठक जल्द

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक बार फिर भारत—चीन के बीच वार्ता हुई। भारत-चीन सीमा मामलों (WMCC) पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यतंत्र की इस 23वीं बैठक में दोनों पक्षों ने शांति बहाल करने के लिए पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ अन्य मुद्दों को तत्काल समाधान करने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ स्थिति पर स्पष्ट और गहन चर्चा की और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि आगे जमीनी स्थिति सामान्य रहेगी और किसी भी अप्रिय घटना को अंजाम नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही इसके अलावा दोनों पक्षों में वरिष्ठ कमांडरों की बैठक के अगले (14वें) दौर को जल्द से जल्द आयोजित करने पर भी सहमति बनी है। हालांकि, इसको लेकर अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर पर 13 दौर की बेनतीजा बातचीत हो चुकी है।

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