Watch Video : Jaipur Nagar Nigam में गाली गलौच, जूतमपैजार

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Prabhat K Sharma | Updated: 26 Aug 2019, 08:34:54 PM (IST) स्‍पेशल

जनता अपनी समस्याओं को लेकर भले ही चीख-पुकार करती रहे। जनप्रतिनिधियों को भला इसकी परवाह कहां। जनता हार-थक कर भले ही अपना गला खराब कर बैठे लेकिन आपके जनप्रतिनिधि तो आपकी समस्याएं उठाने के बजाए नगर निगम में अपनी ढपली, अपना राग की कहावत को सच साबित करते दिखते हैं। चौंकिए नहीं, हम आपको लिए चलते हैं जयपुर नगर निगम में जहां निगम के मौजूदा बोर्ड की आखिरी साधारण सभा में वह सब कुछ हुआ जो नहीं होना चाहिए। धक्का-मुक्की, गाली-गलौज, शोर-शराबा, धरना प्रदर्शन सब कुछ। बैठक में शहर के विकास को लेकर चर्चा होनी थी, लेकिन पार्षद एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में ही उलझते रहे। तमाम उपाय बेअसर नजर आए तो सत्ता से बेदखल हुए भाजपा पार्षदों ने निगम सभागार में ही महफिल सजा ली। फिल्मी गानों से लेकर रामधुनी तक कर डाली। अब आप अंदाजा लगाते रहें। सद्बुद्धि की किसको दरकार है?

इस साल की शुरुआत में ही भाजपा ( bjp ) से बगावत कर विष्णु लाटा ( vishnu lata ) मेयर ( mayor ) बने थे। कांग्रेस ( congress ) ने लाटा को समर्थन दिया तो भाजपा के पार्षद सत्ता से बेदखल हो गए। कुर्सी उनको ही मिली जो मेयर के साथ थे। मौका मिला तो साधारण सभा की बैठक में भाजपा पार्षदों ने मेयर को घेर लिया। मेयर को सौंपे गए प्रशासनिक ( administrative ) और वित्तीय अधिकार ( finance rights ) फिर से निगम बोर्ड को सोंपने की मांग करने लगे। बस यहीं से शुरू हो गई तकरार।

यहां देखें Video - जयपुर निगम निगम में गाली गलौच, जूतमपैजार

वार्डो से सफाईकर्मचारी हटाने के विरोध में भाजपा पार्षद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। सुबह बैठक शुरू हुई तो शोरगुल और हंगामे के बीच पांच बार स्थगित भी करनी पड़ी। सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ( mahesh joshi ) और विधायक गंगादेवी ( ganga devi ) भी बैठक में आईं। भाजपा-कांग्रेस पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस पार्षद दल के उपनेता धर्मसिंह ( dharm singh ) ने तो माइक उठाकर फैंकने की कोशिश भी की। भाजपा के मान पंडित ने यहां तक कहा कि एक साल का नियम नहीं होता तो मेयर को कुर्सी से नीचे ले आते।
दोपहर होते-होते डिप्टी मेयर मनोज भारद्वाज भी धरने पर बैठ गए। भाजपा पार्षदों ने रामधुनी शुरू कर दी। दिन भी हंगामा और नारेबाजी के बीच मेयर ने साधारण सभा की बैठक स्थगित करने का एलान कर दिया।
एक तरह से अखाड़ा बन चुके इस सदन में जयपुर के विकास के मुद्दे भेंट चढ़ गए और जनता अपने उस वोट को देखकर खुद को कोसती रही, जो उसने नगर निगम चुनाव में अपनी और अपने इलाके की बेहतरी के लिए दिए थे।

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