महिलाएं प्रतिदिन 352 मिनट का अवैतनिक 'काम' करती हैं-शोध

भारत की आधी आबादी का लगभग 16 बिलियन घंटे यानी 16अरब घंटे जिंदगी भर अवैतनिक काम करते हुए बीत जाता है जिसके लिए उन्हें कभी कोई सम्मान भी नहीं मिलता।

By: Mohmad Imran

Updated: 16 May 2020, 12:26 PM IST

लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम कल्चर के दौरान इन दिनों घर पर स्त्री-पुरुष ऐसे बहुत से कामों में साझेदार बन गए हैं जिन्हें पहले सिर्फ महिलाओं की ही जिम्मेदारी माना जाता था। खाना बनाना, नाश्ता तैयार करना, बच्चों को संभालना, घर की साफ-सफाईसे लेकर महीने का राशन और ऐसे ही दूसरे काम अब पुरुष भी करने लगे हैं। लेकिन ये उनकी दिनचर्या का हिस्सा नहीं है लेकिन अब वे इन कामों में हाथ बंटाकर यह समझ पा रहे हैं कि घर की जिम्मेदारियां ऑफिस मीटिंग और पीपीटी presentation से कहीं मुश्किल काम है। हालांकि ये सुखद अनुभूति बड़े मेट्रो शहरों और कस्बों के मध्यम वर्गीय परिवारों के एक छोटे समूह तक ही सीमित हैं। लेकिन जानकार इसे निकट भविष्य में घर और ऑफिस के काम में स्त्री-पुरुष के बीच असमानता और लिंगभेद की खाई को पाटने का एक संकेत मान रहे हैं।

महिलाएं प्रतिदिन 352 मिनट का अवैतनिक 'काम' करती हैं-शोध

भारत समेत दुनिया भर की औरतें घर चलाने का जिम्मा उठाती हैं। ओईसीडी डेटा के अनुसार, भारत में महिलाएं पुरुषों के लिए 52 मिनट की तुलना में प्रतिदिन 352 मिनट का अवैतनिक घरेलू काम करती हैं। इसमें बच्चों और बड़ों की देखभाल से लेकर अन्य घरेलू काम शामिल हैं। भारत की आधी आबादी का लगभग 16 बिलियन घंटे यानी 16 अरब घंटे जिंदगी भर अवैतनिक काम करते हुए बीत जाता है जिसके लिए उन्हें कभी कोई सम्मान भी नहीं मिलता। ओएक्सएफएम के एक शोध के अनुसार भारत में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दुनिया में सबसे कम 27 प्रतिशत है। अध्ययन के अनुसार अगर भरतीय महिलाएं पुरुषों की तरह समान दर पर श्रमशक्ति में हिस्सा लें तो हम देश की कुल जीडीपी को 43 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।

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