महिला अधिकार: दहेज के लिए ताना मारने पर हो सकती है 3 साल की सजा

महिलाओं से जुड़े ऐसे ज़रूरी क़ानून जो हर भारतीय महिला को पता होने चाहिए

By: Mohmad Imran

Published: 13 Jan 2021, 02:26 PM IST

महिलाओं की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए साल 2005 में 'प्रोटेक्शन ऑफ वीमन फ्रॉम डॉमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट-20005' बनाया गया था। इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को शारीरिक या मानसिक रूप से हानि पहुंचाता है तो तीन साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है।

ताना मारना भी अपराध: इस एक्ट के तहत अगर शादी होने के दौरान या शादी के बाद दहेज के लिए तानाकशी भी नहीं कर सकते। इतना ही नहीं, पत्नी को जबरन शारीरिक संबंध बनाने या अश्लील सामग्री देखने के लिए भी विवश नहीं कर सकते।

यह कानूनी रूप से पति या पार्टनर (लिव इन रिलेशनशिप में) से साथी द्वारा की गई हिंसा से संबंधित किसी भी महिला साथी (चाहे पत्नी या महिलाएं हो) को सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें महिला अपने साथी या परिवार के सदस्यों के खिलाफ शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक परेशानी की शिकायत दर्ज करा सकती है जो उनके जीवन और शांतिपूर्ण अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर रहे हो। इस कानून में संशोधन के बाद विधवा महिलाओं, बहनों और तलाकशुदा महिलाओं के लिए भी इस तरह के अधिकार बढ़ाए गए है।

स्ट्रीट पर उत्पीड़न सम्बन्धी क़ानून
हालांकि भारतीय दंड संहिता अपनी पुस्तकों में स्ट्रीट उत्पीड़न / छेड़खानी का उपयोग या परिभाषित नहीं करती है लेकिन वह निश्चित तौर पर आपको नुकसान से बचाती है। सरल शब्दों में इसे सार्वजनिक रूप से किसी महिला को प्रताड़ित करना या परेशान करने के कार्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, उदाहरण के लिए उस पर अपमानजनक टिप्पणी करना। आईपीसी की धारा 294 और 509 महिलाओं को ऐसी परिस्थितियों से बचाती है और किसी भी व्यक्ति या समूह के लोगों को किसी भी उम्र की महिला के प्रति आक्रामक / अपमानजनक टिप्पणी या इशारा करने के लिए प्रतिबंधित करती है।

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