Tamilnadu: निर्णायक भूमिका में होंगे प्रवासी मतदाता

Ashok Rajpurohit

Updated: 11 Oct 2019, 08:58:35 PM (IST)

स्‍पेशल

चेन्नई. भले ही तमिलनाडु को कर्मभूमि बनाया हो लेकिन अपनी जन्मभूमि से उनका नाता आज भी बना हुआ है। राजस्थान के लोग व्यापार के सिलसिले में तमिलनाडु एवं दक्षिण के अन्य प्रदेशों में बसे हैं लेकिन अपनी जन्मभूमि राजस्थान के प्रति उनका लगाव आज भी है। पर्व-त्यौहार, शादी-ब्याह, चुनाव एवं अन्य अहम मौकों पर प्रवासी राजस्थान जाते रहे हैं। राजस्थान में 21 अक्टूबर को खींवसर एवं मंडावा विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ने खींवसर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मानस टटोला तो उनका राजस्थान से असीम प्रेम एवं लगाव की बात सामने आई। खींवसर विधानसभा क्षेत्र के प्रवासी मतदाताओं की मानें तो वे अक्सर हर चुनाव के वक्त राजस्थान जाते रहे हैं औ्र अपने मताधिकार का प्रयोग करते रहे हैं। नागौर जिले के खींवसर विधानसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले कई गांवों के लोग तमिलनाडु में निवास कर रहे हैं। इनमें कई प्रवासियों के नाम राजस्थान की मतदाता सूची में भी है। खींवसर विधानसभा क्षेत्र परिसीमन के बाद अस्तितत्व में आया। इससे पहले मूंडवा विधानसभा क्षेत्र था जिसका अधिकांश हिस्सा खींवसर विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया गया है। खींवसर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2008 में पहला चुनाव हनुमान बेनीवाल ने भाजपा के टिकट पर जीता। वर्ष 2013 में दूसरा चुनाव भी हनुमान बेनीवाल ने ही जीता लेकिन निर्दलीय। वर्ष 2018 में तीसरा चुनाव भी हनुमान बेनीवाल के नाम ही रहा और उन्होंने खुद की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। इस तरह लगातार तीन चुनाव में हनुमान बेनीवाल ही यहां से विजयी रहे। बाद में वे नागौर से सांसद चुने गए तो खींवसर सीट रिक्त हो गई। जिस पर अब उप चुनाव कराए जा रहे हैं।
कांग्रेस को खाता खुलने का इंतजार
उप चुनाव में भाजपा एवं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने हनुमान बेनीवाल के छोटे भाई नारायण बेनीवाल को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने हरेन्द्र मिर्धा को टिकट दिया हैं। बेनीवाल व मिर्धा में सीधी टक्कर बताई जा रही हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी अपनी सीट बचाने की जुगत में हैं तो कांग्रेस यहां से खाता खुलने के लिए जोर लगा रही है।
मुद्दा गौण, जाति केन्द्र में
मुद्दा यहां गौण हैं तथा जाति ही केन्द्र में हैं। दोनों ही दलों ने जाट जाति के प्रत्याशियों पर ही भरोसा जताया है। जाट मतदाता यहां बड़ी संख्या हैं। लेकिन इस बार जाट मतों के बिखराव की संभावना है। ऐसे में अन्य जातियों पर सारा दारोमदार हो सकता है। पहले दो चुनाव में खींवसर से कांग्रेस की जमानत जब्त होती रही है तथा बसपा के दुर्गसिंह चौहान लगातार दो चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे। इस बार दुर्गसिंह चुनाव मैदान में नहीं है। ऐसे में बसपा के वोट किधर जाते हैं, यह भी हार-जीत तय करेगा।
लगातार सक्रिय रहे बेनीवाल
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने सेवानिवृत्त डीआईजी सवाईसिंह चौधरी को टिकट दिया और वे दूसरे नंबर पर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस में जान फूंकने का काम किया। लेकिन इस बार कांग्रेस ने सवाईसिंह चौधरी की जगह मिर्धा को उम्मीदवार बनाया है। इलाके में प्रजापत व राजपूत मतदाता भी अच्छी संख्या में बताए जाते हैं। हनुमान बेनीवाल जहां लगातार सक्रिय रहे हैं इसका लाभ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को मिल सकता है।
मिर्धा परिवार की पैठ
वहीं मिर्धा परिवार की पैठ इलाके में आज भी कायम हैं। मिर्धा के बार-बार हार के चलते भी लोगों की उनके प्रति सहानुभूति भी नजर आ रही है। ऐसे में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी एवं कांग्रेस के बीच इस बार कड़ा मुकाबला बन सकता है। परिचर्चा का संयोजन राजस्थान पत्रिका चेन्नई के मुख्य उप संपादक अशोकसिंह राजपुरोहित ने किया।
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खूब विकास हुआ क्षेत्र में
वर्ष 2013 में मोदी की आंधी में भी हनुमान बेनीवाल निर्दलीय जीत गए थे। तब दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी सामने टिक नहीं पाए थे। इस बार भाजपा भी साथ है। इसका फायदा भी मिलेगा। खींवसर विधानसभा क्षेत्र में विकास के खूब काम हुए हैं। हनुमान बेनीवाल लगातार सक्रिय रहे हैं। इसका लाभ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को मिलेगा। पार्टी प्रत्याशी नारायण बेनीवाल की मिलनसार छवि भी जीत का कारण बनेगी।
-हुकमाराम गोदारा, कार्यकर्ता, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी।
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चलेगा मोदी का जादू
केन्द्र की मोदी सरकार का विभिन्न योजनाओं का फायदा भी इस चुनाव में मिलेगा। मतदाताओं ने ही मोदी पर भरोसा जताते हुए उन्हें लगातार दूसरी बार देश की गद्दी सौंपी। ऐसे में युवा मतदाताओं को झूकाव भाजपा की तरफ अधिक हुआ है। इस बार युवा पीढ़ी का वोट भी अहम भूमिका निभाएगा। यह वोटर भाजपा के साथ है।
-संजय कुमार सेन, कार्यकर्ता, भाजपा।
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कांग्रेस की सरकार का लाभ मिलेगा
कांग्रेस प्रत्याशी हरेन्द्र मिर्धा ने 1980 में मूंडवा में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। इस बार राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। साथ ही इलाके में मिर्धा परिवार की प्रतिष्ठा है। ऐसे में मिर्धा के लिए चुनाव जीत की संभावना बन रही है। इसके साथ ही बसपा से दो बार चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहे दुर्गसिंह के भी कांग्रेस में आने से मिर्धा की स्थिति मजबूत हुई है।
-सहदेव सोऊ, कार्यकर्ता, कांग्रेस।
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भाजपा का साथ मिलने से राह आसान
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से गठबंधन किया था। इस गठबंधन को कायम रखते हुए खींवसर विधानसभा उप चुनाव में यह सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के लिए छोड़ी है। खींवसर सीट पर हनुमान बेनीवाल की पकड़ रही है और अब भाजपा के साथ आने से उनकी राह और आसान हो गई है।
-करनाराम गोदारा, कार्यकर्ता, भाजपा।
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