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फादर्स डे : 20 वर्षों से दिव्यांग व अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए पेंशन के रूप में देते हैं अपनी कमाई का एक हिस्सा

अनाथ बेटियों के पिता: 3 की कराई शादी, 30 के विवाह में किया सहयोग

शाहडोलJun 16, 2024 / 12:21 pm

Ramashankar mishra

शहडोल. बच्चों की परवरिस में सबसे बड़ा महत्व माता-पिता का होता है। मां की ममता बच्चों को परिवरिश सिखाती है तो पिता का प्यार उन्हें संघर्ष करना सिखाता हैं। लेकिन जिनके सिर से पिता का साया छिन जाए उनके जीवन में मां ही माता व पिता दोनों का फर्ज निभाती है। वहीं जिसके सिर से माता-पिता दोनों का साया छिन जाए उसका जीवन अंधकार मय हो जाता है। फिर चाहे वह बालक हो या बालिका उसके सिर पर पिता का साया नहीं होने से समाज में कठिन संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे ही बच्चों को पिता का प्यार व बेटियों की शादी का चिंता करने वाले समाज सेवी रंजीत बसाक हंै। जो बीते करीब 20 वर्षों से ऐसे बच्चों की परिवरिश के लिए अपनी कमाई का एक हिस्सा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पेंशन के रूप में देते हैं। वहीं अबतक तीन बेटियों की स्वयं के खर्चे से शादी कर उनका घर बसा चुके हैं। इतना नहीं गरीब बेटियों की शादी के लिए वह 2100 से 21 हजार रुपए तक की मदद करते आ रहे हैं। साथ ही सुख दुख में भी उनकी मदद करते हैं।

माता-पिता की मौत के बाद संवारा बच्चों का भविष्य
आठ वर्ष पूर्व माता-पिता की मौत के बाद बच्चों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। परिवार के लोग भी मदद के लिए पीछे हट गए थे। समाजसेवी रंजीत बसाक को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने तीन बेटे व एक बेटी की परिवरिश का जिम्मा लिया। तीन साल पहले बेटी की शादी भाटापारा छत्तीसगढ़ में रेलवे कर्मचारी के साथ की। वहीं बड़े बेटे को बीएससी कंपलीट कराया, दूसरे को सिविल इंजीनियर की तैयारी करा रहे हैं तो तीसरा बेटा कॉमर्स से सेकेंड ईयर में है।

बेटी के रहने की व्यवस्था की, फिर कराई शादी
माता-पिता की मौत के बाद परिवार के लोग बेटी का सहयोग नहीं कर रहे थे, बेटी शादी योग्य हो चुकी थी। समाजसेवी को जानकारी लगते ही उन्होंने बेटी को शांतिधाम में रखवाकर उसकी परिवरिस की। 2010-11 में उसकी शादी इलेक्ट्रीशियन के साथ सागर में तय की। वहीं स्वंय के खर्चे से सागर जाकर उसके हाथ पीले किए। सामजसेवी ने बताया कि समय-समय पर उससे बात करते रहते हैं, किसी प्रकार की समस्या होने पर मदद भी करते हैं।

शादी तय होते ही पिता की हो गई मौत, समाजसेवी ने की मदद
अंडर ब्रिज पुरानी बस्ती के पास एक बेटी का रिश्ता तय होते ही उसके पिता की मौत हो जाने के बाद मां परेशान हो गई। परिवार के लोग मदद करने तैयार नहीं थे, समाजसेवी रंजीत बसाक को जानकारी लगते ही उन्होंने परिजनों ने मुलाकात कर उनकी परेशानियों को समझा और शादी की पूरी तैयारी कर धूमधाम से बेटी की शादी कराई।

22 असहाय व दिव्यांग बच्चों को दे रहे पेंशन
रंजीत बसाक ने बताया कि अनाथ, असहाय व दिव्यांग बच्चों को चिन्हित कर उनकी मदद कर रहे हैं। 22 से अधिक बच्चों को हर महीने उनकों पेंशन की रूप में 500 रुपए देते हैं। उन्होंने बताया कि जैतपुर के खाम्हीडोल 4 वर्ष के बालक का दोनों हाथ नहीं होने पर उसकी मदद कर रहे हैं, वहीं नरौजाबाद में नेत्रहीन बालक को बीते 1 साल से पेंशन की राशि भिजवा रहे हैं। पिपरिया में अर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे के भरण पोषण के लिए उसे पेंशन दिया जाता है।

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