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पांच सौ साल पुराने केशव मंदिर को खतरा, दीवारों में बढ़ रही दरारें

चंबल नदी किनारे स्थित पांच सौ साल पुराने केशव मंदिर को खतरा पैदा हो गया है। मंदिर की दीवारों में दरारें पड़ गई है। मुख्य द्वार पर पत्थर टूटने के बाद से दरारें लगातार बढ़ रही हैं।

बूंदीJun 24, 2024 / 07:28 pm

पंकज जोशी

पांच सौ साल पुराने केशव मंदिर को खतरा, दीवारों में बढ़ रही दरारें

केशवरायपाटन. भगवान केशव मंदिर पर खुलने लगे जोड़।

केशवरायपाटन (बूंदी). चंबल नदी किनारे स्थित पांच सौ साल पुराने केशव मंदिर को खतरा पैदा हो गया है। मंदिर की दीवारों में दरारें पड़ गई है। मुख्य द्वार पर पत्थर टूटने के बाद से दरारें लगातार बढ़ रही हैं। पत्थर तड़ककर दो दुकड़ों में बदल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य सरकार काशी, उज्जैन की तर्ज पर भगवान केशव के प्राचीन मंदिर का कायाकल्प करवाए।
इस ऐतिहासिक धरोहर पर जिम्मेदारों ध्यान नहीं है। मंदिर शिखर लेकर भूतल तक जर्जर हो गया है। कभी इसके पत्थर गिरते हैं तो कभी कंगूरे टूट कर श्रद्धालुओं पर गिर रहे हैं। मंदिर का चयन प्रसादम योजना में किया गया, लेकिन धरातल पर योजना शुरू नहीं हो पाई।
एक साल बाद भी सुध नहीं
एक साल पहले आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर का शिखर कलश के पास क्षतिग्रस्त हो गया। इस कारण बरसात के दौरान पानी मंदिर में जाने लग गया है। मंदिर की कलात्मक शिल्पकला नष्ट होने के कगार पर है। कई जगह पर बजरी सीमेंट लगा कर मूल स्वरूप को ही बिगाड़ दिया गया। देवस्थान विभाग के स्वतंत्र प्रभार वाले इस मंदिर के प्रति विभाग भी गंभीर नहीं है। बजट के अभाव में मंदिर का रखरखाव नहीं हो पा रहा।
खुलने लगे जोड़
मंदिर के निर्माण में पत्थरों का उपयोग किया गया था, लेकिन अब पत्थरों के जोड़ खुल गए हैं। मंदिर की नींव में पानी समाने से अब इसमें दरार आ गई है। इसके पत्थर टुकड़ों में तब्दील होकर गिर रहे है। पुराना लोहा गल चुका है।
पूरी राशि खर्च नहीं
मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सात साल पहले तत्कालीन भाजपा सरकार ने पांच करोड़ स्वीकृत किए थे। इसमें से सिर्फ एक करोड़ खर्च किए गए। नदी किनारे बनाई गई पचास लाख की छतरियां बनने के कुछ समय बाद ही चंबल में आई बाढ़ में बह गई।
भगवान केशवरायजी के मंदिर के लिए अतिरिक्त कोई बजट नहीं आया है। इस मंदिर को पर्यटन विभाग ने स्वदेशी दर्शन योजना 2.0 में लिया हुआ है। उसके बाद ही जीर्णोद्धार संभव है। इसकी कार्य योजना पर्यटन विभाग बना रहा है जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं है।
आशुतोष गुप्ता, निरीक्षक, देवस्थान विभाग, बूंदी

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