Delhi Election Result: केजरीवाल के इन पांच दांव ने फेल की चाणक्य की चाल

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की वापसी हो चुकी है। आप कार्यालय में जश्न है। वहीं भाजपा के चाणक्य खाने चित्त नजर आ रहे हैं। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक पूरी खेप दिल्ली में उतारने वाली भाजपा दहाई का अंक तो पार कर गई है लेकिन भाजपा के लिए दिल्ली का सूखा दो दशक से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

By: Anand

Published: 11 Feb 2020, 04:05 PM IST

जयपुर। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की वापसी हो चुकी है। आप कार्यालय में जश्न है। वहीं भाजपा के चाणक्य खाने चित्त नजर आ रहे हैं। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक पूरी खेप दिल्ली में उतारने वाली भाजपा दहाई का अंक तो पार कर गई है लेकिन भाजपा के लिए दिल्ली का सूखा दो दशक से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। वह भी तब जब प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्रियों की पूरी फौज उतार दी।

शाहीन बाग से लेकर पाकिस्तान तक भाजपा ने मुददा बनाया तो कुछ ने गोली मारो कहकर राष्ट्रवाद फैलाया। इसके बाद तीन गोलीकांड भी हो गए। इतना ही नहीं कुछ भाजपा नेताओं ने तो भारत—पाकिस्तान जैसा माहौल भी तैयार करने की कोशिश की लेकिन राजनीति की नौसिखिया आम आदमी पार्टी के सामने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी पानी मांग गई है। ऐसे में अब हम आपको बता रहे हैं कि ऐसे कौन से पांच फैक्टर हैं जिसकी वजह से अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित के बाद हैट्रिक लगाई और तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी अपनाई है।


काम पर फोकस, वोट मिले चौकस
अरविंद केजरीवाल चुनाव में लगातार कहते रहे कि इस बार का चुनाव काम पर लड़ा जा रहा है। अगर उन्होंने काम किया है तो जनता उन्हें वोट दे। परिणाम में भी इसकी झलक साफ दिखाई दे रही है। भाजपा ने राष्ट्रवाद पर फोकस किया वहीं आप ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर बात की। इतना ही नहीं आप के सरकारी स्कूल, मोहल्ला क्लीनिक, बसों में मुफ्त यात्रा, कुछ यूनिट तक मुफ्त पानी और बिजली वह भी बिना किसी अतिरिक्त केंद्रीय सहायता के उपलब्ध कराई। सीएजी ने भी इसकी तारीफ की और अब जनता ने भी मोहर लगा दी है।


विपक्ष के पास सीएम का चेहरा नहीं
आम आदमी पार्टी की तरफ से साफ था कि चेहरा अरविंद केजरीवाल ही हैं। आप हमेशा ही विपक्ष से पूछती रही कि मुख्यमंत्री का चेहरा कौन है, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही इस पर मौन हैं। मनोज तिवारी को भाजपा ने आगे तो कर दिया लेकिन सीएम प्रोजक्ट नहीं किया। कांग्रेस हमेशा की तरह ही दिल्ली में हर जगह संशय की स्थिति में नजर आई। वहीं केजरीवाल फंटफुट पर खेले और पोस्टर से लेकर कैंपेन तक हर जगह खुद आगे नजर आए और परिणाम हमारे सामने है।


आतंकी नहीं केजरीवाल
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव की तरह ही विधानसभा में लोगों को चुनावी चाशनी में डूबोने की पूरी कोशिश की लेकिन यह कोशिश पूरी तरह से नाकाम रही। चुनाव में एनआरसी, सीएए, पाकिस्तान, राष्ट्रवाद और शाहीन बाग को लेकर एक हिंदू बनाम मुसलमान का नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की वहीं इससे ठीक उलट केजरीवाल की टीम ने अपने आप को इससे दूर रखा और कोई भी सांप्रदायिक बयान नहीं दिया। भले ही भाजपा के नेताओं ने केजरीवाल को नक्सली और आतंकी बता दिया। जनता में यह मैसेज गया कि आप काम पर वोट मांग रही है और भाजपा उसे आतंकी कह रही है और फिर आप का परिणाम बड़ा होता चला गया।


व्यापारियों की नाराजगी
दिल्ली में दुकानों की सीलिंग भी पिछले कुछ सालों से बड़ा मुद्दा रहा है। इसे लेकर हर बार दिल्ली के दंगल में राजनीति तेज हो जाती है। इस बार व्यापारियों ने साफ आरोप लगाया कि एमसीडी और लोकसभा चुनाव में जीत के बाद भी भाजपा ने सीलिंग नहीं रूकवाई। इतना ही नहीं भाजपा की जीएसटी, नोटबंदी सहित कई आर्थिक नीतियों ने व्यापारियों को बर्बाद कर दिया। इस बात को लेकर दिल्ली के व्यापारी खासा नाराज दिखाई दिए और फिर इसका फायदा केजरीवाल को हुआ। गरीब तो गरीब अमीर आदमी भी आम आदमी पार्टी के काम से खुश नजर आया।

कांग्रेस का सुपड़ा साफ
2015 दिल्ली चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक 67 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। अब 2019 में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलती दिख रही है लेकिन कांग्रेस के पीछे रहने का सीधा फायदा आप को हुआ है। कांग्रेस में नेतृत्व की कमी, प्रदेश अध्यक्ष को लेकर असमंजस, बड़े नेताओं की चुनावी राजनीति से दूरी से आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ। भाजपा नरेंद्र मोदी और अमित शाह के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है वहीं आज के पास केजरीवाल का नाम है लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस चुनाव से काफी हद तक दूरी बनाए रहे।

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