scriptकुथियाना घाट से सहेजे 28 अंडों से बाहर आए शावक घडिय़ाल, संख्या बढकऱ 206 हुई | Patrika News
खास खबर

कुथियाना घाट से सहेजे 28 अंडों से बाहर आए शावक घडिय़ाल, संख्या बढकऱ 206 हुई

– पहली बार देखी बाहरी दुनियां…देवरी ईको सेंटर में हैचिंग के बाद निकले शावक घडिय़ालों को छोटे पूल में छोड़ा
– 15 से 20 दिन बाद इन्हें बड़े पूल में किया जाएगा
डिस्चार्ज

मोरेनाJun 11, 2024 / 11:20 pm

Ashok Sharma

मुरैना. चंबल नदी के कुथियाना घाट (बाबूसिंह की घेर) से 30 दिन पहले सहेजकर देवरी ईको सेंटर में लाए गए घडिय़ालों के 28 अंडों की हैचिंग कराई गई। इस दौरान सभी अंडों से बाहर निकले शावक घडिय़ालों को छोटे पूल में छोड़ा गया, ताकि उन्हें पानी में रहने की आदत पड़ सके। 15 से 20 दिन बाद इन्हें बड़े पूल में डिस्चार्ज किया जाएगा ताकि यह स्वच्छंद रूप से विचरण कर सकें।
देवरी स्थित ईको सेंटर पर चंबल अभ्यारण्य के अधीक्षक भूरा गायकवाड़, रेंजर देवरी घडिय़ाल केंद्र रिंकी आर्या, हैचरी प्रभारी ज्योति डंडौतिया की मौजूदगी में मादा घडिय़ालों से सहेजे गए 28 अंडों की हैचिंग कराई गई। तकरीबन एक से डेढ़ घंटे की प्रोसेस के बाद सभी शावक घडिय़ाल सुरक्षित ढंग से अपने अंडों से बाहर निकल आए। इसके बाद इन सभी शावक घडिय़ालों को देवरी ईको सेंटर में बनाए गए स्पेशल पूल में छोड़ा गया, जहां यह 15 दिन तक विशेषज्ञों की निगरानी में रहेंगे। 15 दिन बाद इन्हें बड़े पूल में डिस्चार्ज किया जाएगा ताकि यह नदी के तेज प्रवाह में बहने का हुनर सीख लें।
-2023 के 94 और 2022 के 84 शावक घडिय़ाल भी देवरी में मौजूद
देवरी स्थित ईको सेंटर में वर्ष 2023 में अंडों से हैचिंग के दौरान निकले 94 और 2022 के 84 शावक घडि?ालों को रखा गया है। इन 28 घडिय़ालों को मिलाकर अब देवरी ईको सेंटर में शावक घडिय़ालों की संख्या बढकऱ 204 के करीब हो गई है।
-चंबल नदी में 2456 घडिय़ाल, 111 डॉल्फिन
चंबल नदी में इसी साल 14 फरवरी से 26 फरवरी तक बॉम्बे नेशनल हिस्ट्री सोसाइटी और वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट, वाइल्ड इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया मप्र, राजस्थान, यूपी के 11 जलीय जीव विशेषज्ञों ने गणना की थी। जिसमें चंबल नदी में 2108 घडिय़ाल चिन्हित किए थे। वहीं 111 डॉल्फिन, इसी प्रकार मगरमच्छों की संख्या 878 से बढकऱ 928, इंडियन स्कीमर की संख्या 740 से बढकऱ 843 हो गई है।
-चंबल नदी में 435 किमी एरिया में पाए जाते हैं घडिय़ाल
विलुप्त प्राय: प्रजातियों में शामिल घडिय़ालों की 80 प्रतिशत संख्या चंबल नदी में ही पाई जाती है। 900 किमी से अधिक लंबाई में बहने वाली चंबल नदी में 435 किमी का एरिया घडिय़ालों की मुफीद हैं और घडिय़ाल इसी एरिया में पाए जाते हैं, यह एरिया श्योपुर से मुरैना होकर भिंड से गुजरते हुए पचनदा तक जुड़ता है। वहीं चंबल नदी राजस्थान, उत्तरप्रदेश की सीमाओं को जोड़ते हुए चलती है।

Hindi News/ Special / कुथियाना घाट से सहेजे 28 अंडों से बाहर आए शावक घडिय़ाल, संख्या बढकऱ 206 हुई

ट्रेंडिंग वीडियो