बोर्ड रूम में महिलाओं को जगह देने में हम विश्व में 12वें स्थान पर

अध्ययन में यह पाया गया कि भारत की 628 कंपनियों में से 55 प्रतिशत में महिला निदेशक हैं।

Mohmad Imran

24 Mar 2020, 02:36 AM IST

महिलाओं की उद्योग जगत में वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए हाल ही हुए 'वुमन ऑन बोर्ड-2020' नामक एक अध्ययन के अनुसार, बोर्ड मेंबर के रूप में महिलाओं को महत्त्वपूर्ण पद देने के के मामले में भारत विश्व में 12वें स्थान पर है। यह अध्ययन संयुक्त रूप से दो वैश्विक रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म की ओर से आयोजित किया गया था। अध्ययन में भाग लेने वाली 7824 सूचीबद्ध कंपनियों में से 628 भारत से थीं। अध्ययन में लगभग 36 देशों के नियोक्ता भी शामिल थे। अध्ययन में यह पाया गया कि भारत की 628 कंपनियों में से 55 प्रतिशत में महिला निदेशक हैं। यह संख्या बीते साल की तुलना में 14 फीसदी ज्यादा है।

बोर्ड रूम में महिलाओं को जगह देने में हम विश्व में 12वें स्थान पर

एशिया महाद्वीप में लगभग 54 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं। बात करें भारत की तो देश में यह आंकड़ा महज 39 प्रतिशत है। इतना ही नहीं इस संख्या का बहुत छोटा हिस्सा ही कंपनियों के वरिष्ठ और महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त होता है। अध्ययन में भाग लेने वाली वैश्विक कंपनियों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। दुनिया की 14.87 फीसदी कंपनियों में ही नेतृत्व की बागडोर महिला निदेशकों के हाथ है। हालांकि सह आंकड़ा भी बीते दो सालों की तुलना में दोगुना है। इनमें से 29 प्रतिशत कंपनियों में दो महिला निदेशक हैं, जबकि अन्य 63 प्रतिशत कंपनियों में निदेशक पद पर केवल एक महिला है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि कंपनी के बोर्ड सदस्यों के कार्यकाल में भी खासा अंतर है। बोर्ड में शामिल पुरुषों और महिला सदस्यों की बात करें तो 46 फीसदी महिलाओं का बोर्ड सदस्य के रूप में अधिकतम कार्यकाल पुरुषों की तुलना में एक वर्ष से भी कम होता है।

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नॉर्वे है शीर्ष पर
अध्ययन के अनुसार, 40.72 प्रतिशत महिला बोर्ड सदस्यों के साथ नॉर्वे इस सूची में शीर्ष पर है। स्वीडन 30.84 प्रतिशत और फिनलैंड 29.91 प्रतिशत महिलाओं के साथ क्रमश: दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं। विश्व शक्ति अमरीका में 20.41 प्रतिशत महिलाओं को ही बोर्ड मेंबर बनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर, 14.87 प्रतिशत महिलाएं ही अपनी कंपनी की बोर्ड मेंबर हैं।

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बोर्ड सदस्यता में ये भेदभाव क्यों?
बीते साल अप्रैल में देश की शीर्ष 500 कंपनियों में से 51 कंपनियों में भी स्वतंत्र महिला निदेशक नहीं थीं। यह दिखाता है कि कार्पोरेट सेक्टर में आज भी लैगिंक भेदभाव किया जाता है। महिलाओं को वरिष्ठ और महत्त्वपूर्ण प्रबंधकीय भूमिकाएं जानबूझकर नहीं दी जा रही हैं। शोध का कहना है कि महिलाओं को पुरुषों के समान भूमिका पाने के लिए तुलनात्मक रूप से उनसे अधिक योग्य होना होगा। इसके अलावाए शोध में यह भी पाया गया कि जिन महिलाओं को बोर्ड का सदस्य बनाया भी जाता है उन्हें भी पूर्णकालिक सदस्य नहीं बनाया जाता। केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बोर्ड मेंबर के रूप में महिलाओं को लगातार यह साबित करना होगा कि वे इस पोजिशन के लायक हैं।

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Mohmad Imran Desk/Reporting
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