भारतीय संस्कृति का एक खास रंग है सैला

Sunil Vandewar

Publish: Aug, 28 2018 12:17:03 PM (IST)

स्‍पेशल

सिवनी. सनातन संस्कृति की मान्यता अनुसार को घंसौर विकासखण्ड के बिनैकी स्टेशन टोला में कजलिया उत्सव मनाया गया। सभी ग्रामीणों ने एकत्रित होकर पारम्परिक सैला नृत्य का आनंद लिया।
ग्राम के राजेश यादव, बलकरन बैगा, राजाराम बैगा, विमलेश यादव, सबोध यादव, अक्षय यादव, रमेश बैगा, उमेश बैगा व अन्य ने बताया कि ग्राम में ढोलक-कोपर व पारम्परिक वाद्ययंत्रों के साथ एक घेरा बनाकर बुजुर्ग व युवाओंं ने सैला के गीत गाते हुए नृत्य किया।
आर्थिक स्पर्धा एवं इंटरनेट के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों को अपनी प्राचीन संस्कृति से लगभग दूर कर दिया है। वहीं दूसरी ओर छिंदवाड़ा मार्ग स्थित ग्राम फुलारा में वर्षों से कजलिया पर्व के बाद आयोजित सैला प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।
सैला नृत्य कला में पारंपरिक पहनाने और दोनों हाथों में थामीं गई लाठी, पारंपरिक वाद्ययंत्रों का विशेष महत्व है। कजलियां पर्व के साथ ही शैला कला ग्रामीण क्षेत्र उत्साह, उमंग और उल्लास का परिचायक मानी जाती है। सैला देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, तो वहीं मढ़ई-मेले का भी आयोजन होता है। ग्रामीणों द्वारा शैला का अभ्यास व प्रदर्शन किया जा रहा है।

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