kishanagrh-आयातित और निर्यात मार्बल कोराबार पर कोरोना का ब्रेक

मार्बल उद्योग पर छाया कोरोना वायरस का साया
उद्योग से जुड़े ट्रांसपोर्ट, टूल्र्स कारोबार भी हुआ बाधित

Kali Charan kumar

20 Mar 2020, 11:36 AM IST

कालीचरण
मदनगंज-किशनगढ़.
दूनिया भर में कोरोना वायरस प्रकोप के चलते एरिशा की सबसे बड़ी मार्बल मंडी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे है। इन दिनों इम्पोर्टेड (विदेशी आयातित) मार्बल ब्लॉक का आयात और स्थानीय मार्बल का निर्यात कारोबार पूर्णत: ठप हो गया है। साथ ही चायना से आयातित किए जाने वाला करोड़ों को टूल्र्स कारोबार भी कई दिनों से पूर्णत: बंद पड़ा है। मार्बल कारोबारियों की मानें तो आयातित मार्बल कारोबार से 5 करोड रुपए, निर्यात मार्बल कारोबार से 30 लाख रुपए प्रतिदिन और आयातित टूल्र्स कारोबार से तकरीबन 30 से 35 लाख रुपए प्रतिदिन का कारोबार चौपट हो रहा है। हालांकि स्थानीय स्थानीय मार्बल और ग्रेनाइट कारोबार पर इसका असर नजर नहीं आया है। लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिन तक रहती है तो इस उद्योग के भी चपेट में आने की संभावनाएं बन सकती है।
एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी भी कोरोना वायरस के प्रकोप से अछूती नहीं रही। देश और दूनिया से आयातित और निर्यात किए जाने वाला मार्बल कारोबार एवं आयातित टूल्र्स कारोबार पूर्णत: प्रभावित हो गए है। इसके कारण उद्योग से जुड़ा ट्रांसपोर्ट कारोबार भी प्रभावित हुआ। गिरते कारोबार के ग्राफ के कारण उद्यमी और श्रमिक परिवार भी चिंतित रहने लगे है। मार्बल मंडी में तकरीबन 150 से अधिक फैक्ट्रियों में इम्पोर्टेड मार्बल का कारोबार किया जा रहा है और 400 उद्यमी सीधे और प्रत्यक्ष रूप से इंम्पोर्टेड मार्बल के आयातित कारोबार एवं स्थानीय मार्बल के निर्यात कारोबार से जुड़े है। किशनगढ़ मार्बल मंडी एवं आस पास की अन्य मार्बल मंडियों में इटली, टर्की, वियतनाम, स्पेन, मिश्र (इजिप्त) एवं चायना से इम्पोर्टेड मार्बल आयातित किया जाता है। जबकि इन्ही देशों में स्थानीय मार्बल का निर्यात कारोबार भी किया जाता है। यहीं नहीं मार्बल मंडी में चायना से मशीनें और टूल्र्स बड़ी मात्रा में आयातित भी किया जाता है।
दो महीनें से कोरोना वायरस का असर
मार्बल उद्यमियों ने बताया कि करीब दो महीनें से आयातित और निर्यात का मार्बल कारोबार पूर्णत: ठंड पड़े है। विदेश और देश के अलग-अलग बंदरगाहों पर कई टन मार्बल पड़ा है जो कि आयात और निर्यात किया जाना है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण दो महीने यह कारोबार चपेट में आ गया। हालांकि शुरुआती दौर मेें कारोबार को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन बीते कई दिनों से यह कारोबार पूर्णत बंद पड़े है।
आयातित इम्पोर्टेड मार्बल मार्केट : रोजाना 5 करोड कारोबार चौपट
अजमेर जिले की किशनगढ़ समेत सावर, केकड़ी इत्यादि मार्बल मंडिय़ों से इम्पोर्टेड मार्बल विदेशों से आयात किया जाता है। 70 से 80 टन इम्पोर्टेड मार्बल आयातित किया जाता है यानि औसतन 2000 टन मार्बल रोज आयात होता है। 25 हजार रुपए प्रति टन के भाव के अनुसार करीब 5 करोड रुपए प्रति दिन का व्यापार बंद पड़ा है। यह करोबार बीते करीब डेढ़ महीनें से बंद पड़ा है। ऐसे में करोड़ो का व्यापार चौपट हो गया। आयातित इम्पोर्टेड मार्बल की दिल्ली, गुडगांव, कोलकाता, आसाम, मुम्बई समेत तकरीबन उत्तरी भारत में अधिक पंसद किया जाता है और इन्हीं क्षेत्रों से इस इम्पोर्टेट मार्बल की डिमांड रहती है। लेकिन कोरोना वायरस के कारण बंदरगाह से माल आना बंद होने और व्यापारियों के यात्रा से परहेज के कारण व्यापार ठप सा हो गया है। कारोबारों का कहना है कि जो पहले स्टॉक में माल पड़ा था और ऑडर बुक थे उन्हें ही माल की डिलेवरी दी जा रही है। जबकि नए माल की आवक पूर्णत बंद पड़ी है।
निर्यात मार्बल मार्केट : रोजाना 35 लाख का कारोबार बंद
मार्बल और ग्रेनाइट के साथ ही मिनरल और पाउडर का निर्यात करोबार भी करीब डेढ महीनेें से बंद पड़ा है। यहां से दूनिया के विभिन्न देशों में करीब 10 हजार टन मार्बल और ग्रेनाइट प्रति माह निर्यात किया जाता है। कारोबार बंद होने से औसतन 10 हजार रुपए प्रति टन के अनुसार तकरीबन 30 से 35 लाख का रोज का व्यापार बंद पड़ा है। मांग कम होने और कारोबार बंद होने के कारण स्थानीय उद्यमियों में भी इन दिनों निराशा है।
चायना से टूल्र्स कारोबार : करीब 10 करोड का व्यापार ठप
मार्बल मंडी और चायना के बीच मार्बल और ग्रेनाइट के आयात और निर्यात के कारोबार के साथ ही मशीनों और टूल्र्स का कारोबार भी बड़ी मात्रा में किया जाता है। फिलहाल यह कारोबार भी बंद पड़ा है। जानकारों ने बताया कि चायना से करीब 9 से 10 करोड रुपए प्रति माह मशीनों और टूल्र्स कारोबार किया जाता है। जो कि इन दिनों बंद पड़ा है। टूल्र्स का आयात नहीं होने से यहां कीमतों में भारी वृद्धि हो गई है।

kali charan Reporting
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