शोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है

अवसाद दुनिया भर में 'डिस्एबिलिटी' का प्रमुख कारण है। यह व्यक्तिगत और समुदाय-संबंधी दोनों तनावों के कारण होता है। एक अध्ययन के अनुसार वंचित और गरीबी में रहने वाले पुरुषों में अच्छी स्थिति में रहने वाले पुरुषों की तुलना में अवसाद का 50 प्रतिशत अधिक खतरा होता है।

By: Mohmad Imran

Published: 06 Jan 2020, 06:23 PM IST

दुनिया भर में अवसाद (depression) बीते कुछ दशकों में एक गंभीर स्वास्थ्य मुद्दा बनकर उभरा है। अवसादग्रस्त लोगोंं की लगातार बढ़ती संख्या चिंताजनक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (world health organization) के अनुसार अवसाद दुनिया भर में 'डिसएबिलिटी' (disability) का प्रमुख कारण है और इस बीमारी के वैश्विक वृद्धि का एक बड़ा कारण भी है। दुनिया में वर्तमान में करीब 264 मिलियन (26.4 करोड़) से अधिक लोग अवसाद से पीडि़त हैं। वहीं अवसाद के चलते आत्महत्या करने वालों की संख्या भी 8 लाख तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि आत्महत्या करने वाले ज्यादातर लोगों की उम्र 15 से 29 साल के युवाओं की है।

शोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है

व्यक्तिगत पारिवारिक मुद्दे अवसाद का सबसे प्रमुख कारण हैं। वहीं अवसाद के अन्य कारणों में बेरोजगारी, शोक और मनोवैज्ञानिक आघात भी हैं। लेकिन शोध अध्ययन बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद होने की अधिक आशंका होती है। हालांकि एक नए अध्ययन में यह भी सामने आया है कि निर्धनता के कारण उपजने वाला अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है।
ब्रिटेन में पुरुषों और महिलाओं के बीच अवसाद के प्रभावों व जोखिमों की जांच करने वाले एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि ब्रिटेन में वंचित क्षेत्र में रहने वाले पुरुष पॉश एरिया में रहने वाले पुरुषों की तुलना में 50 फीसदी अधिक उदास, अवसाद और तनाव में रहते हैं। जबकि महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गरीबी का इतना गहरा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपने पारिवारिक संबंधों, विवाह जैसे मुद्दों के चलते अधिक उदास रहती हैं।

शोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है

विश्व आर्थिक मंच (world economic foram) के हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अवसाद के कुछ ऐसे भी कारण हैं जो व्यक्तिगत स्तर से परे हैं। अध्ययन के अनुसार व्यक्ति के आसपास के क्षेत्र में अगर बेरोजगारी, गरीबी और अभाव ज्यादा है तो यह अवसाद पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। इन कारणों से होने वाला अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि पुरुष मुख्य योजनाओं या office कार्यों में विफल होने पर अवसाद से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसमें ऑफिस में दिए गए टास्क को पूरा न कर पाना या परिवार को बेहतर आर्थिक जीवन न दे पाना शामिल है।

शोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है

बढ़ रहा पुरुषों में अवसाद
पुरुषों और महिलाओं के बीच अवसाद के प्रभावों की जांच करने वाले world economic foram के इस अध्ययन के अनुसार पुरुषों में गरीबी, वित्तीय संकट, बेरोजगारी, भोजन और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की कमी बहुत अखरती है। शोध में इन मूजलभूत आवासीय मुद्दों का महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव दर्ज नहीं किया गया था। लेकिन पुरुषों में इस अवसाद के कारण महिलाओं की तुलना में आत्महत्या करने की आशंका तीन गुना अधिक होती है।

शोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है

महिलाओं में अवसाद के प्रमुख कारण
अध्ययन में कहा गया है कि महिलाएं रिश्तों में सामंजस्य न बिठा पाने और अपनी सामाजिक नेटवर्किंग (social networking) के अच्छा न होने के कारण अवसाद का शिकार होती हैं, जिसका वे हिस्सा हैं। माता-पिता के प्यार की कमी, अपने विवाह से संतुष्ट न होना ऐसी कुछ परेशानियां हैं जो महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती हैं। फोरम के अध्ययन में यह भी कहा गया है कि वंचित क्षेत्रों में रहने वाले पुरुषों की तुलना में महिलाओं में उन मुद्दों को लेकर अवसाद कम हो तो भी चिंता (anxiety) अधिक होती है।

शोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता हैशोध कहते हैं की गरीबी से उपजे अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है
Mohmad Imran
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