modi 2.0 : मोदी मैजिक के सामने सब धराशायी

modi 2.0 : मोदी मैजिक के सामने सब धराशायी
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Govind Ram Thakre | Publish: May, 24 2019 06:21:39 PM (IST) स्‍पेशल

मोदी मैजिक के सामने सब धराशायी

मोदी मैजिक के दम पर भाजपा न सिर्फ अपना गढ़ बचाने में कामयाब हुई, बल्कि रिकॉर्ड मतों से कांग्रेस को मात भी दी। राकेश सिंह जीत का चौका लगाकर फिर किस्मत के सिकंदर साबित हुए हैं। इस बड़ी जीत के पीछे जनता की बड़ी आशा और अपेक्षाएं जुड़ी हैं। अपार जनसमर्थन राकेश सिंह के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उन पर इस बार भी जबलपुर के पिछड़ेपन का दाग मिटाने की बड़ी चुनौती रहेगी। यह भी कि किस तरह से जनता से वोट के रूप में मिले आशीर्वाद का प्रतिसाद दिया जाए। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब ब्रॉडगेज का काम जल्द पूरा होगा। स्मार्ट सिटी के रूप में जबलपुर का भविष्य चमकेगा। हवाई और रेल संपर्क पुख्ता करने के साथ ही पर्यटन व्यवसाय को पंख लगेंगे। इस चुनाव में मिलेनियम वोटर्स ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। उन्हें अब रोजगार के अधिक अवसर चाहिए। आयुध निर्माणियों को नई ऑक्सीजन मिलेगी और स्थानीय रोजगार बढ़ेगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते इस सीट से राकेश सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। विधानसभा चुनाव में हार के बाद जबलपुर में अंदरुनी गुटबाजी न केवल हावी होने लगी थी, बल्कि कुछ मौकों पर खुलकर सामने भी आई थी। अब इस परिणाम के बाद भाजपा का जिला स्तर पर राजनीतिक गणित बदलेगा। दिल मिले न मिले पर एकजुटता का प्रदर्शन करना मजबूरी होगी, जिसके संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं।
हालांकि, विधानसभा में जीत से उत्साहित कांग्रेस को इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने चुनाव में न सिर्फ एकजुटता दिखाने की कोशिश की थी, बल्कि राकेश सिंह के तीन कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठते हुए जनता के सामने उनकी नाकामी गिनाई। साफ-सुथरी छवि वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता विवेक तन्खा ने स्थानीय विकास को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन मोदी मैजिक के सामने सभी दावे धराशायी हो गए। वे हर राउंड में पिछड़ते गए। यहां तक कि वित्तमंत्री तरुण भनोत के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में ही कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई। आठ विधानसभाओं में केवल मंत्री लखन घनघोरिया के पर्व क्षेत्र में ही कांग्रेस ठीक-ठाक कर सकी। इतना ही नहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री कमलनाथ की सभाएं भी बेअसर साबित हुईं।

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