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संग्रहालय तो खूबई कमात हैं… लेकिन संरक्षण और विकास कार्यों के लिए बजट नहीं

जयपुर . हमारे ऐतिहासिक स्मारकों एवं संग्रहालयों से झोली भर कर कमाई हो रही है, लेकिन ये संरक्षण के अभाव में खतरे में हैं। देश-दुनिया से आने वाले पावणों को हम इनकी बदहाली दिखा रहे हैं। उखड़ा फर्श, टूटी खिड़कियां, दरकती दीवारें इन विश्वप्रसिद्ध स्मारकों की छवि खराब कर रहे हैं। सरकार की अनदेखी देखिए, […]

जयपुरJun 17, 2024 / 01:11 pm

Girraj Sharma

जयपुर . हमारे ऐतिहासिक स्मारकों एवं संग्रहालयों से झोली भर कर कमाई हो रही है, लेकिन ये संरक्षण के अभाव में खतरे में हैं। देश-दुनिया से आने वाले पावणों को हम इनकी बदहाली दिखा रहे हैं। उखड़ा फर्श, टूटी खिड़कियां, दरकती दीवारें इन विश्वप्रसिद्ध स्मारकों की छवि खराब कर रहे हैं। सरकार की अनदेखी देखिए, जहां इन स्मारकों से सालाना 73.83 करोड़ रुपए की कमाई हो रही है। अब पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने बजट बढ़वाने के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है।
विभाग को वर्ष 2024-25 के लिए बजट के नाम पर कुल 7.13 करोड़ रुपए मिले हैं। विभाग ने स्मारकों व संग्रहालयों के संरक्षण व विकास कार्यों के लिए यह बजट कम बताते हुए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है और 22.76 करोड़ रुपए की जरूरत बताई है।
हकीकत: विकास कार्यों की दरकार

  • हवामहल – जगह-जगह दरारें आ रही हैं। खिड़कियां टूटी हुई हैं। रतन मंदिर, शरद मंदिर व विचित्र मंदिर में अराइश का फर्श उखड़ा हुआ है। मुकुट पर लगे कलशों की स्वर्णिम आशा हट गई है।
  • आमेर महल – दीवाने आम में ऐतिहासिक पत्थरों में क्रेक आ गए हैं और वे गंदे हो रहे हैं। शीश महल के शीशे दरकने लगे हैं। महल में लगी जालियां टूट गई हैं।
  • जंतर-मंतर – यंत्र टूटने लगे हैं। यंत्रों के पास बने गार्डन से हरियाली सूखने लगी है।
पिछले साल से भी घटाया बजट
सरकार ने पुरातत्व विभाग को मिलने वाले बजट में कटौती पिछले साल के मुकाबले अधिक की है। पिछले साल यानी वर्ष 2023-24 में स्मारकों के संरक्षण व विकास कार्यों के लिए 10.75 करोड़ रुपए का बजट मिला। हालांकि यह बजट खर्च कर दिया है। फिर भी स्मारकों की संरक्षण अधूरा रह गया है।
70.23 करोड़ रुपए तो जयपुर से हुई कमाई
सरकार को प्रदेशभर के स्मारकों और संग्रहालयों से 73.83 करोड़ रुपए की आय हुई है, इसमें से जयपुर के आमेर महल, हवामहल, नाहरगढ़, जंतर-मंतर, अल्बर्ट हॉल आदि से ही 70.23 करोड़ रुपए कमाई हुई। वहीं बाहर के स्मारकों से 1.73 करोड़ रुपए की आय हुई, जबकि बाहर के संग्रहालयों से 1.87 करोड़ रुपए कमाए हैं।

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