राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस आज

1 अक्टूबर यानि स्वैच्छिक रक्तदान दिवस, रक्तदान जागरुकता के लिए 1975 से हर साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है। एक-दो नहीं बल्की बडी संख्या में संस्थाए, लोग इस पुनीत कार्य में लगे हुए हैं। रक्तदान केा लेकर पिछले सालों में जागरुकता भी बढी है। लेकिन भ्रान्तियां भी अभी कम नहीं हैं। इन्हीं भ्रान्तियों को खत्म कर रक्तदान को बढावा देकर बचार्इ जा सकती हैं कर्इ जिंदगीयां।

By: abhishek

Published: 01 Oct 2015, 02:24 PM IST

1 अक्टूबर यानि स्वैच्छिक रक्तदान दिवस, रक्तदान जागरुकता के लिए 1975 से हर साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है। एक-दो नहीं बल्की बडी संख्या में संस्थाए, लोग इस पुनीत कार्य में लगे हुए हैं। रक्तदान केा लेकर पिछले सालों में जागरुकता भी बढी है। लेकिन भ्रान्तियां भी अभी कम नहीं हैं। इन्हीं भ्रान्तियों को खत्म कर रक्तदान को बढावा देकर बचार्इ जा सकती हैं कर्इ जिंदगीयां।

रक्तदान को लेकर भ्रान्तियां
रक्तदान को लेकर शुरू से ही कर्इ तरह की भ्रान्तियां फैली हैं। कर्इ लोग कहते हैं कि रक्तदान से कमजोरी आती है या फिर आैर कर्इ नुकसान होते हैं। जबकि एेसा नहीं है। रक्तदान की पूरी अपनी गाइड लाइन है। किसी भी भ्रान्ति के समाधान के लिए इनके बारे में किसी जानकारी से समझा जा सकता है। बकायदा रक्तदान के लिए उम्र, वजन आदि निर्धारित हैं,इन सब गाइड लाइनों का पालन कर रक्तदान करना चाहिए।
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कितना अहम है रक्तदान
रक्तदान में कमी आने पर ब्लड बैंकों में भी रक्त की कमी हो जाती है। कर्इ बार जागरुकता की कमी के चलते परिजन ही अपनों को ब्लड नहीं देते हैं। एेसे में रक्त के जरूरतमंदों-रोगियों के लिए परेशानी हो जाती है। खासकर थैलेसीमीया, हिमोफीलिया, ल्यूकिमिया जैसे रोगों से ग्रस्त रोगियों की तो जान पर बन जाती है।
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रक्तदाताआें से लें प्रेरणा

रक्त की बढती जरूरत के साथ साथ लोगों में जागरुकता भी आ रही है। कर्इ लोगों ने तो रक्तदान को अपने जीवन का अहम हिस्सा ही बना लिया है। एेसे ही शख्स हैं अरविंद शर्मा। शर्मा बताते हैं की वे सालों से रक्तदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक उन्हें इस काम के लिए विभिन्न पुरस्कार-सम्मान भी मिल चुके हैं। मौसमी बीमारियों के वक्त भी खून की जरूरत बढ जाती है। एेसे में रक्तदाता लोगों का बडा सहारा बनते हैं। रक्तदान को लेकर फैली भ्रान्तियों को लेकर अरविंद आैर उन जैसे अन्य रक्तदाता भी खासे चिन्तित रहते हैं। कारण कि जरूरत के समय लोगों को रक्त नहीं मिल पाता। इससे बचाव के लिए जरूरी है जागरुकता जिसे लेकर वे समय समय पर विभिन्न् संस्थाआें के सहयोग से तरह तरह के आयोजन कर लोगों को इसके लिए जागरुक करते हैं। विभिन्न संस्थाआें, विद्यार्थियों आदि का सहयोग इस काम में वाकर्इ काबिले तारीफ है।

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