ग्रीन इकोनॉमी से सालाना 10 खरब डॉलर और 40 करोड़ नौकरियां मिल सकती हैं

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Foram) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक प्राकृतिक संकट से उबरने के दौरान साल 2030 तक 40 करोड़ (400 मिलियन) नौकरियां और करीब 10 खरब डॉलर का व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।

By: Mohmad Imran

Published: 27 Jul 2020, 05:19 PM IST

दुनिया के 213 देश इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। अंतरराष्टीय मुद्राकोष (IMF) के अनुसार इस महामारी को रोकने पर वैश्विक रूप से अब तक 10 खरब डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन World Economic Foram (WEF) की एक रिपोर्ट के अनुसार जब दुनिया इस महामारी से उबरेगी तब तक यह वैश्विक जीडीपी (World GDP) के आधे से अधिक के बराबर हमारी प्राकृतिक दुनिया को नष्ट कर चुकी होगी। उस समय कोई भी व्यवसाय आज की तरह सामान्य नहीं रह जाएगा। 2019 में ही वैज्ञानिकों ने चेतावनी दे दी थी कि मानव पृथ्वी के प्राकृतिक जीवन को तेजी से नष्ट कर रहा है। डब्ल्यूईएफ के द्वारा प्रकाशित न्यू नेचर इकोनॉमी प्रोजेक्ट की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यवसायिक घरानों और राजनेताओं की ओर से 'Nature First' यानी प्रकृति पहले की सोच से रोजगार जैसी समस्या का आसान समाधान निकाला जा सकता है।

यूनिलीवर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और डब्ल्यूईएफ के सदस्य एलन जोप का कहना है कि अगर प्रकृति को न बचाया गया तो इंसान भी नहीं बचेंगे। जोप के मुताबिक तीन प्रमुख सेक्टर 80 फीसदी प्राकृतिक संपदा को खतरे में डाल रहे हैं। ये तीन सेक्टर हैं- खाद्य और भूमि उपयोग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण और ऊर्जा एवं खनन। लेकिन यही तीनों क्षेत्र प्रकृति को बचाने और खरबों रुपए का व्यवसाय खड़ा करने की क्षमता भी रखते हैं।

40 करोड़ नौकरियां सालाना
डब्ल्यूईएफ के नेचर एक्शन एजेंडा की प्रमुख आकांक्षा खत्री के अनुसार अगर हम प्रकृति में निवेश करें तो प्रकृति हमारी अर्थव्यवस्थाओं को फिर से उबारने में मदद कर सकती है। इतना ही इस कदम से साल 2030 तक सालाना 10 खरब डॉलर का वैश्विक व्यवसाय और करीब 40 करोड़ नौकरियां सालाना विकसित की जा सकती है। इसी प्रकार एक अन्य रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि अगर दुनिया की लगभग एक तिहाई भूमि और महासागरों को नष्ट होने से बचा लिया जाए तो हम 2030 तक जैव विविधता को नष्ट होने से बचा सकते हैं, साथ ही अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक तिहाई भूमि और महासागरों को संरक्षित करने में 140 अरब डॉलर के निवेश की जरुरत पड़ेगी। यह विभिन्न देशों की सरकारों की ओर से जारी की जाने वाली उस एक-तिहाई सब्सिडी से भी कम है जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देती हैं।

'ग्रीन इकोनॉमी' से उबर सकते हैं संकट से
डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में नौकरियों और अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए बहुत से विकल्पों का हवाला दिया गया है। मसलन, धातु के भूमिगत स्टोरेज बनाकर खाद्य पदार्थों को सडऩे से बचाकर हम खाने की बर्बादी रोक सकते हैं। ऐसे ही मछली पकडऩे का बेहतर प्रबंधन कर हम सालाना 14 करोड़ नौकरियां और अर्थव्यवस्था में 170 अरब डॉलर का इजाफा कर सकते हैं। डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट के अनुसार अगर कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए फर्टिलाइजर, रसायन और हाइब्रिड बीजों पर दी जाने वाली 2 अरब डॉलर की सब्सिडी को खत्म कर हम इस फिजूलखर्ची को रोक सकते हें जो प्रकृति और समुद्री संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे ही शहरों में ऊर्जा की बचत कर हम साल 2030 तक 625 अरब डॉलर की बचत कर सकते हैं। वहीं शहर में छतों पर रूफ गार्डन से 9 अरब डॉलर बचा रहे हें और यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।

यही सही अवसर है
कोविड-19 महामारी ने भले ही दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया हो लेकिन ग्रीन इकोनॉमी के लिए इससे बेहतर अवसर कभी नहीं मिल सकता। महीनों चले लॉकडाउन के कारण आज हमारी हवा पहले से ज्यादा शुद्ध, कम कार्बन उत्सर्जन और वन्यजीवों के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या हम इस अवसर को भुनाने में सफल हो पाएंगे। रिपोर्टके अनुसार अक्षय ऊर्जा भी एक बहुत बड़ा निवेश अवसर है जिससे वर्तमान में 30 से अधिक देश जीवाश्म ईंधन की लागत कम कर कार्बन-फुटप्रिंट को नियंत्रित कर रहे हैं। ऐसे ही बायोगैस भी ऊर्जा का बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में शामिल इस ग्रीन इकोनॉमी के लिए सालाना 2.7 खरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता है जो मार्च में अमरीका द्वारा प्रोत्साहन पैकेज के बराबर है।

Mohmad Imran
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