scriptOnly 3 to 6 days of coal remaining, Chhattisgarh should save Rajasthan | 3 से 6 दिन का ही कोयला शेष, राजस्थान को ब्लैकआउट से बचाए छत्तीसगढ़ : ऊर्जा मंत्री ने शुरू किया twitter War | Patrika News

3 से 6 दिन का ही कोयला शेष, राजस्थान को ब्लैकआउट से बचाए छत्तीसगढ़ : ऊर्जा मंत्री ने शुरू किया twitter War

मानसून सर पर है और राजस्थान के 4340 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों में मात्र 3 से 6 दिन का ही कोयला बचा है। इस संकट ने राजस्थान के ऊर्जा मंत्री की नींद उड़ा रखी है। डर है कि मानूसन में कोयला खनन मुश्किल होने से ये संकट गहरा न जाए। इन हालातों के बीच छत्तीसगढ़ में कोयले पर चल रही 'राजनीति' ने राजस्थान सरकार की नींद उड़ा रखी है। इसका जवाब देने और प्रदेश के बिजलीघरों तक कोयला लाने के लिए अब सोशल मीडिया को भी हथियार बनाया है। खुद ऊर्जा मंत्री भी इसमें कूद गए हैं।

जयपुर

Published: June 18, 2022 02:03:11 pm

राजस्थान में फिर से बिजली संकट की स्थिति बन रही है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम की 8 यूनिट से बिजली उत्पादन (2720 मेगावाट) बंद है। इनमें से कुछ यूनिट तकनीकी कारण से बंद हुई तो उस दौरान बिजली कटौती करनी पड़ी। हालांकि, बाद में दूसरे स्रोत से बिजली लेकर सप्लाई शुरू की गई। उधर, राजस्थान के कोयले पर छत्तीसगढ़ में हो रही 'सियासत’ ने ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी की भी नींद उड़ा दी है। मंत्री भाटी ने शुक्रवार को ट्वीट कर राजस्थान को अंधेरे (ब्लैक आउट) से बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से तत्काल कोयला खनन शुरू कराने में सहयोग देने की अपील की है। भाटी ने खनन का विरोध करने वालों को भी आड़े हाथ लिया है।
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कोयला आपूर्ति के सिलसिले में रैक की मांग के लिए दिल्ली में डाला ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने डेरा।
कोयला के लिए दिल्ली डाला डेरा

इसी बीच राज्य विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी आर.के. शर्मा कोल इंडिया से ज्यादा से ज्यादा कोयला लेने के लिए दिल्ली पहुंचे। रेल की खाली रैक की जरूरत को लेकर भी रेल मंत्रालय भी पहुंचे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से बात की है। गौरतलब है कि राजस्थान के बिजलीघरों में अभी 3 से 6 दिन का ही कोयला है।
अब खुद ऊर्जा मंत्री ने संभाला, किया ट्वीट

इस संकट को लेकर अब प्रदेश के ऊर्जा मंत्री भी सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाल चुके हैं। इसके पहले राजस्थान विद्वुत उत्पादन निगम ने इसके लिए अलग से ट्विटर अकाउंट (आरवीयूएन कोल ब्लॉक) बनाया है। इसके जरिए छत्तीसगढ़ में कोयला खनन का विरोध कर रहे लोगों की पोल खोली जा रही है। खुद उर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी भी इससे जुड़ गए हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी टैग किया गया है। पहली बार है जब सरकारी एजेंसी इस तरह से सक्रिय हुई है और खुद मंत्री भी उससे जु़ड़ गए हों।
इस तरह विरोध करने वालों और जनता को दे रहे जवाब
  • कोल ब्लॉक के लिए 1898 हेक्टेयर भूमि दो चरणों में दी गई। पहले चरण में 762 हेक्टेयर भूमि में 2013 में खनन शुरू हुआ। इस दस वर्ष में 80 हजार पेड़ों की एवज में 48 लाख पेड़-पौधे लगाए गए। 8946 पेड़ का ट्रांसप्लांटेशन किया। इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत है कि खनन से जंगल उजड़ रहे हैं।
  • राजस्थान को कोयला आवंटित खदान घने वन भूमि में नहीं है, बल्कि इससे 2 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावित होगा।
  • अब 8 लाख नहीं, केवल 8 हजार पेड़ काटने पड़ेंगे। इसके एवज में भी चार गुना पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैं।
  • खदान वाले जिले में ही स्थानीय लोगों के लिए विद्वुत उत्पादन निगम 100 बेड का अस्पताल बनाकर सौंपेगा।
  • पर्यावरण की स्थिति को देखकर ही केन्द्र और राज्य सरकार ने यहां खनन की अनुमति दी है।
  • खनन शुरू होने से करीब 4 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
  • विरोध पर सवाल : पीईकेबी (परसा ईस्ट एंड कांते बेसिन) कोल ब्लॉक के पहले चरण में खनन का काम वर्ष 2013 में शुरू हुआ। यह कोई नया कार्य नहीं है, जिसका इतना पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
  • खनन की जरूरत : राजस्थान के 4340 मेगावाट क्षमता की यूनिट से विद्युत की सुचारू आपूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ के हसदेव—अरण्य वन क्षेत्र में खनन शुरू करना आवश्यक है।
  • अंधकार से बचाने की अपील : राजस्थान को अंधकार से बचाने के लिए छत्तीसगढ़ की जनता एवं प्रशासन से आंदोलन व विरोध समाप्त कर सहयोग करने की अपील करता हूं।
13 तरह के हैशटैग का उपयोग
ट्विटर पर 13 हैशटैग का उपयोग किया जा रहा है। इसमें कोल क्राइसिस, पावर क्राइसिस, पावर आउटेज, कोल शॉर्टेज, पावरकट, हसदेव, पारसाकोल ब्लॉक सहित अन्य हैं।

यह है डिमांड और सप्लाई का पूरा गणित
राजस्थान ऊर्जा विकास निगम के अनुसार एक दिन पहले बिजली की अधिकतम डिमांड 14856 मेगावाट तक पहुंच गई। जबकि, उपलब्धता 12653 मेगावाट की रही। इस अंतर को पाटने के लिए बाजार से बिजली खरीदनी पड़ी। हालांकि, यह भी नाकाफी रही।
सूरतगढ़ थर्मल (सुपर क्रिटिकल)— 660 मेगावाट (1 यूनिट)

सूरतगढ़ थर्मल (सब क्रिटिकल)— 1000 मेगावाट (4 यूनिट)

कालीसिंध थर्मल पावर— 600 मेगावाट (1 यूनिट)

छबड़ा पावर प्लांट— 250 मेगावाट (1 यूनिट)

कोटा थर्मल पावर प्लांट— 210 मेगावाट (1 यूनिट)

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