REPORT : कनाडा में लॉकडाउन के दौरान लोग क्यों हो रहे हैं अवसाद के शिकार

-लोगों में अलग सी बेचैनी है, सरकार काउंसलिंग करवा रही है

-अपने देश आना चाहते हैं कई भारतीय छात्र (Many Indian students want to come to their country)
-यहां हर रोज शाम बालकनी में आकर कोरोना कर्मवीरों के सम्मान में बजाते हैं तालियां
-ओंटेरियो से नई दिल्ली की प्रियंका शारदा ने पत्रिका को बताए वहां के हालात

By: pushpesh

Updated: 02 May 2020, 06:50 PM IST

ओंटेरिया.

अमरीका की तरह ही कनाडा में भी शुरुआत में लॉकडाउन की ठीक से पालना नहीं हुई। भारत की तरह सख्ती भी नहीं थी। शुुरू में लोगों ने भारत के रवैया को काफी बुरा भला कहा। लेकिन जब हालात काबू से बाहर जाने लगे तो लोगों की जुबान पर यही था कि लॉकडाउन के लिए भारत सरकार के मॉडल को फॉलो करना चाहिए। यहां लॉकडाउन की पालना नहीं होने की एक वजह यह भी सामने आई कि वर्ष के ज्यादातर महीने ठंड और बर्फबारी झेलने वाले लोग इन दिनों ही बाहर निकलते हैं, घूमने जाते हैं। लोगों को लॉकडाउन और कोरोना के जोखिम का पता है, लेकिन वे स्प्रिंग की खूबसूरती का लालच छोड़ नहीं पा रहे। लोगों में अजीब सी बेचैनी है। जैसे वे चाहकर भी खुद को घरों में कैद नहीं रख सकते। इसी के चलते लोग अवसाद से घिर गए हैं और सरकार उनकी काउंसलिंग करवा रही है।

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आने वाले दिनों में मौसम होगा चुनौती
अभी मौसम खुशनुमा है, लेकिन जैसे-जैसे यहां हवा गर्म होगी, चक्रवातीय तूफान का खतरा बढ़ेगा। इससे दूर दराज के इलाकों में कोरोना रोगियों के उपचार में लगे चिकित्साकर्मियों और अन्य लोगों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा।

‘लिटिल इंडिया’ से भारतीय होने पर गर्व
मैं गर्व से कहना चाहती हूं कि हमारी वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति यहां भी दिख रही है। यहां थ्रोनो में ‘लिटिल इंडिया’ रेस्टोरेंट गरीब और जरूरतमंदों को फ्री खाना दे रहा है। यहां कहा जाता है कि पैसे हैं तो ऑर्डर कीजिए, नहीं है तो पैक्ड फूड लेकर खा लीजिए। खास बात ये है कि यहां भारतीय ही, नहीं किसी भी देश, मजहब का व्यक्ति आकर खाना ले सकता है।

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यहां हर रोज शाम को बजाते हैं ताली
भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रंटलाइन डॉक्टर और कार्यकर्ताओं के लिए ताली बजवाई थी। यहां तो हर रोज शाम साढ़े सात बजे लोग बालकनी में आकर क्लेपिंग करते हैं। अब ये लोगों की आदत में आ गया, समय होती ही बालकनी में आ जाते हैं।

बेरोजगारों की मदद करती है सरकार
जिन लोगों की नौकरी चली गई या वेतन कट रहा है उन्हें सरकार काफी सपोर्ट कर रही है। सीईआरबी (कैनेडियन इमरजेंसी रिलीफ बैनिफिट) के माध्यम से ऑनलाइन मदद की जा रही है, भले ही वह किसी भी देश का हो। हालांकि इसके लिए क्राइटेरिया है, जैसे इससे पहले पांच हजार रुपए प्रतिमाह कमाए गए हों। सरकार इन्हें दो हजार डॉलर तक की मदद कर रही है।

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अपने देश आना चाहते हैं कई भारतीय छात्र
मैं भारत सरकार से कहना चाहती हूं कि मेरी तरह और भी भारतीय छात्र देश जाना चाहते हैं। यहां भारतीय दूतावास ने हमें बताया कि मेल कर दें। इसके बाद हमने आवेदन भी किया है, लेकिन भारत में लॉकडाउन के चलते फ्लाइट बंद होने से दूतावास ने विवशता जाहिर कर दी।

स्टूडेंट्स के दिया इमरजेंसी फंड
भारतीय दूतावास के प्रयासों के बाद यहां की यूनिवर्सिटीजी ने स्टूडेंट्स को इमरजेंसी फंड देना शुरू कर दिया। मेरी ओंटेरियो यूनिवर्सिटी ने मुझे भी यह फंड दिया है। खास बात ये है कि इसमें सीईआरबी की पांच हजार वाली शर्त भी लागू नहीं होती।

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हेल्थ इंश्योरेंस में कोविड-19 को जोड़ेंगे
कनाडा सरकार दूसरे देशों के विद्यार्थियों को खूब सपोर्ट कर रही है। बाहर के छात्रों के हेल्थ इंश्योरेंस में कोविड-19 का प्रावधान नहीं था। लेकिन सभी देशों के छात्रों के कहने के बाद ओंटेरियो प्रांत ने इसका भरोसा दिलाया है।

( रिपोर्ट : पुष्पेश शर्मा )

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