देखो सरकार! कच्चा तेल 11 रुपया लीटर, पेट्रोल बिक रहा 73 रुपया लीटर

19 मार्च को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई परिवर्तन नहीं आया है और इसके भाव फिलहाल तीन दिन से स्थिर ही बने हुए हैं। जी हां पेट्रोल और डीजल के भावों में गुरुवार 19 मार्च को एक बार फिर कोई कमी नहीं की गई। जबकि पिछले तीन दिनों में क्रूड ऑयल ब्रेंट के भाव में 6 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है। बुधवार को पेट्रोल के भाव 73.35 और डीजल के भाव 67.13 रुपया प्रति लीटर ही दर्ज किए गए।

Swatantra K Jain

19 Mar 2020, 07:00 PM IST

जयपुर। क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल के भाव में इन दिनों जो गिरावट नजर आ रही है वो हैरान करने वाली है। क्रूड ऑयल के भाव नायमैक्स पर यानी अमरीकी क्रूड के भाव 21 डॉलर प्रति बैरल तक गिर चुके हैं जबकि ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव 25 से 26 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुके हैं। बात करें कच्चे तेल की भारतीय बास्केट की तो ये 1,672 रुपये प्रति बैरल तक गिर चुकी है और फिलहाल 10 बचे इसके भाव 1748 पर इसके भाव चल रहे थे। बता दें कि एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है, इस तरह कच्चे तेल का भाव करीब 11 रुपये लीटर बना हुआ है।
इस तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को कच्चे तेल का भाव 18 साल के निचले स्तर पर आ गया। और लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाली दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और घटेंगी। लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकार अब भाव घटाएगी? फिलहाल तो ऐसा नहीं हो रहा।
19 मार्च को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई परिवर्तन नहीं आया है और इसके भाव फिलहाल तीन दिन से स्थिर ही बने हुए हैं। जी हां पेट्रोल और डीजल के भावों में गुरुवार 19 मार्च को एक बार फिर कोई कमी नहीं की गई। जबकि पिछले तीन दिनों में क्रूड ऑयल ब्रेंट के भाव में 6 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है। बुधवार को पेट्रोल के भाव 73.35 और डीजल के भाव 67.13 रुपया प्रति लीटर ही दर्ज किए गए।
सवाल यह भी उठता है कि आखिर सरकार भाव नहीं कम कर रही तो कर क्या कर रही है - इसका जवाब है कि सरकार खुद ही कोरोना से लड़ने की तैयारी कर रही है और इसके लिए टैक्स बढ़ा रही है - और मोदी सरकार ने इस सप्ताह के शुरू में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3-3 रुपए बढ़ा दी है।
15 मार्च को बढ़ाई गई विशेष एक्साइज ड्यूटी के बाद अब भारत में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क प्रति लीटर 19.98 से बढ़ाकर 22.98 पैसे और डीजल पर प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी 15.83 से बढ़ाकर 18.83 हो गई है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर वैट भी वसूलती हैं - जो कि राजस्थान में पेट्रोल पर करीब 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 15 रुपए प्रति लीटर वसूला जा रहा है। यानी एक लीटर पेट्रोल पर आप और हम टैक्स के पेटे करीब 45 रुपए और डीजल पर करीब 33 रुपए वसूले जा रहे हैं।
इस तरह कच्चे तेल के भावों में गिरावट का जो बड़ा फायदा उपभोक्ता को मिलना था वो अब केंद्र सरकार ने अपने पास ही रख लिया है। एक अनुमान के अनुसार इस बढ़ोतरी से मोदी सरकार को सालाना 40 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा।
मोदी सरकार जब 2014 में सत्ता में आई थी तब पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.48 रुपये प्रति लीटर था और डीजल पर उत्पाद शुल्क 3.56 रुपये प्रति लीटर था। जो कि अब पेट्रोल पर बढ़कर 22.98 पैसे और डीजल पर बढ़कर 18.83 पैसे हो गया है। इस तरह मोदी राज में पेट्रोल पर 13.50 पैसे एक्साइज ड्यूटी बढ़ी है और डीजल पर 15.27 पैसे एक्साइज ड्यूटी बढ़ी है। लेकिन हमें
यह भी नोट करना होगा कि मई 2014 में भारत में डॉलर का एक्सचेंज रेट 60.54 रुपया प्रति डॉलर था, जो 19 मार्च को 75 रुपया प्रति डॉलर को पार कर गया है। यानी अब भारत को प्रति डॉलर कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
चलते -चलते ये बता दें कि - बाजार के जानकारों की मानें कि कोरोना वायरस के प्रकोप से कच्चे तेल की मांग घटने और तेल बाजार की हिस्सेदारी को लेकर छिड़ी कीमत जंग के कारण कच्चे तेल के दाम में गिरावट आई है यह भी कहा जा रहा है कि इसका सबसे बड़ा टारगेट अमरीका है - जिसका असर भी दिख रहा है। अमरीका में जो कच्चा तेल निकाला जाता है उसको निकालने की प्रक्रिया खाड़ी देशों में तेल के कुएं से तेल निकालने की तुलना में जटिल है। यहां तेल के कुएं न होकर पत्थरों के बीच तेल है - जिसे शेल ऑयल भी कहा जाता है और इसको निकालने की प्रक्रिया को फ्रेकिंग भी कहा जाता है। इस कारण अमरीका के लिए तेल निकालना अपेक्षाकृत महंगी प्रक्रिया है और इस कारण अमरीका को कच्चा तेल 30 डॉलर प्रति बैरल से कम पर बेचना घाटा का सौदा होता है। लेकिन अब यही हो रहा है। अमरीका का कच्चा तेल जिसे WTI यानी वेस्ट टैक्सास इंटरमीडियट ऑयल कहा जाता है के भाव खाड़ी देशों के कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड ऑयल की तुलना में तेजी से गिर रहा है। WTI के भाव 20 से 21 डॉलर प्रति तक गिर चुके हैं - जबकि ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव 25 से 26 डॉलर प्रति बैरल बने हुए हैं। इन दोनों के दामों में फासला 5 से 6 डॉलर प्रति बैरल का हो रहा है जो कि तीन दिन पहले तक एक से दो डॉलर प्रति बैरल का था और सामान्यता ये फासला 3 डॉलर प्रति बैरल का रहता था। साफ है कि अमरीकी कच्चे तेल के भाव तेजी से गिर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो अमरीकी क्रूड ऑयल इंडस्ट्री के लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा।
खैर जो भी हो हकीकत ये है कि पेट्रोल के भाव अब भी 70 पार हैं - और इनके कम होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही - ऐसे में लोग तो अब ये कहने लगे हैं कि - भाई पेट्रोल भरवाकर नहीं टैक्स भरके आ रहे हैं।

Swatantra Jain Desk
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